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क्रिप्टो एक्सचेंजों की कहानी दिनों-दिन दिलचस्प होती जा रही है

क्रिप्टो एक्सचेंजों की कहानी दिनों-दिन दिलचस्प होती जा रही हैAnand Kumar

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वज़ीरएक्स, एक बड़ा स्वघोषित क्रिप्टो 'एक्सचेंज' है जिसने समाजवाद की खोज की कर ली है. कुछ दिन पहले, इसने एक घोषणा की - और एक X पोस्ट डाली - जिसमें दूसरी बातों के अलावा कहा गया, "हाल ही में हुए साइबर अटैक के जवाब में, जिसके कारण $230 मिलियन (यूज़र फ़ंड्स का 45%) की चोरी हुई, हम स्थिति को निष्पक्ष और पारदर्शी तरीक़े से संभालने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम सभी यूज़र्स के बीच एक जैसे असर को बांटने के लिए एक सामाजिक हानि की रणनीति लागू कर रहे हैं."

क्या आइडिया है, सर जी! जब 'एक्सचेंज' ट्रेडरों से पैसे कमाता है, तब पूंजीवाद होता है, और ये पैसा रख लेता है. जब एक्सचेंज की कस्टडी में पैसे चोरी हो जाते हैं, तो ये समाजवादी होने का समय होता है, और ट्रेडरों को आपस में नुक़सान बांटना पड़ता है.

कुछ दिन पहले, इस 'एक्सचेंज' ने घोषणा की कि उत्तर कोरियाई हैकरों ने इसके सिस्टम से क़रीब 230 मिलियन अमरीकी डॉलर चुरा लिए हैं. क्या आपने 'कुत्ते ने मेरा होमवर्क खा लिया' सुना है? उत्तर कोरियाई हैकर ऐसा कुत्ता बन गए हैं जो हैक होने वाली कंपनियों का होमवर्क खा जाता है. जैसे शिक्षक छात्र के घर जाकर नहीं पता लगा सकता कि कुत्ते ने वाक़ई होमवर्क खाया है या नहीं, वैसे ही कोई उत्तर कोरिया जाकर इन हैकरों की जांच नहीं की जा सकती. इसलिए एक बार जब उत्तर कोरियाई हैकर अपना काम कर लेते हैं, तो उत्तर कोरियाई समाजवाद काम में आता है.

बेशक़, मुझे उन लोगों से कोई हमदर्दी नहीं है जो इन क्रिप्टो 'एक्सचेंजों' पर ट्रेड करने की मूर्खता करते हैं. कम से कम पांच साल से, मैं यहां लिख रहा हूं कि क्रिप्टो की खूबियों के बावजूद, जो लोग इन स्वघोषित एक्सचेंजों पर भरोसा कर रहे हैं, वे बहुत बड़ा रिस्क उठा रहे हैं. 2021 में, मैंने लिखा था: जब मैं कोई स्टॉक ख़रीदता हूं, तो मैं स्टॉकब्रोकर के पास जाता हूं. मैं ब्रोकर को अपने बैंक अकाउंट से कुछ पैसे ट्रांसफ़र करता हूं, और बदले में, मैं स्क्रीन पर कुछ नंबर देखता हूँ जहां मैं ट्रेड कर रहा हूं. ये नंबर मुझे ये बताने का दावा करते हैं कि अब मेरे पास कुछ स्टॉक हैं. इन नंबरों का स्रोत क्या है? मुझे कैसे पता चलेगा कि इनसे जुड़ी कोई अंतर्निहित वास्तविकता है? मुझे ये इसलिए पता है क्योंकि शेयर बाज़ार और उनसे जुड़ी सभी संस्थाएं बारीक़ी से रेग्युलेटेड हैं. ब्रोकर एक एक्सचेंज के मेंबर हैं, और एक अलग संस्था मौजूद है, एक स्टॉक डिपॉज़िटरी, जो इन सभी को उस अस्तित्व और स्वामित्व की अंतर्निहित वास्तविकता से जोड़ती है जिसके लिए मैंने अपना पैसा दिया. मुझे कई स्वतंत्र संस्थाओं से इस बारे में लाइव जानकारी मिलती है कि मेरे पैसे के साथ क्या हो रहा है, जो गहरी रेग्युलेटरी जांच के तहत आती हैं. हालांकि, जो संस्थाएं ख़ुद को क्रिप्टो एक्सचेंज कहती हैं, वे किसी भी क़ानूनी मायने में ऐसी नहीं हैं. वे बिज़नस हैं जो आपका पैसा लेते हैं और आपकी स्क्रीन पर आपको कुछ आकंड़े और एक ग्राफ़ दिखाते हैं.

इन एक्सचेंजों का कथित तौर पर ऑडिट, निगरानी जैसी चीज़ें की जाती हैं, लेकिन ये सब एक्सचेंज द्वारा ही चुनी गई दूसरी कंपनियां करती हैं. ये एक बंद और अपने-आप को ही मज़बूत बनाने वाला लूप है जो ऐसे शब्दों का इस्तेमाल करता है जो आधिकारिक लगते हैं लेकिन असलियत में ऐसा कुछ नहीं है. ये ऐसा है जैसे कोई व्यक्ति 'बैंक' का साइनबोर्ड लगा देते और लोग अपना पैसा वहां जमा करने लगें. ये तथाकथित एक्सचेंज ऐसे ही हैं.

इस प्वाइंट पर, जो लोग क्रिप्टो में निवेश करना चाहते हैं, वे पूछ सकते हैं कि उन्हें ये काम कैसे करना चाहिए. मेरा जवाब होगा कि ऐसा मत कीजिए. हालांकि, अगर आप ज़िद करते हैं, तो अपने ख़ुद के पैसे की ख़ातिर, कम से कम कोई ऐसा साधन चुनें जो एक रेग्युलेटेड या विनियमित इकाई के तौर पर काम करता हो. उदाहरण के लिए, अमेरिकी बाज़ार में कई SEC-स्वीकृत ETF हैं, जिनमें बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी होल्डिंग्स हैं. इनमें से कई ETF फ़्रैंकलिन टेम्पलटन, फ़िडेलिटी और ब्लैकरॉक जैसी प्रसिद्ध पैरेंट कंपनियों द्वारा संचालित होते हैं. चूंकि भारतीय निवेशक विदेशी सिक्योरिटीज़ में सालाना 200,000 अमेरिकी डॉलर तक का निवेश कर सकते हैं, इसलिए ये रास्ता उन लोगों के लिए खुला है जो क्रिप्टो में निवेश करने पर अमादा हैं.

क्रिप्टो में पैसे लगाने का आइडिया चाहे कितना भी ख़राब क्यों न हो, कम से कम विदेशी ETF के वास्तविक होने का कुछ तो प्रमाण मौजूद है. इसके उलट, एक स्व-घोषित एक्सचेंज आपके पैसे के लिए एक ब्लैक होल हो सकता है.

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