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सारांशः PSU शेयरों में हाल के वर्षों में आई शानदार रैली ने निवेशकों का ध्यान खींचा है. लेकिन हालिया तेज़ी के बाद PSU फ़ोकस्ड इक्विटी फ़ंड, इंडेक्स फ़ंड्स या ETFs में पैसा लगाना कितना सही है? लंबी अवधि के आंकड़े कुछ अलग कहानी बताते हैं.
सरकारी कंपनियों यानी PSU शेयरों ने पिछले कुछ सालों में निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है. ख़ासकर 2021 के बाद PSU से जुड़े इक्विटी फ़ंड, इंडेक्स और ETF बाज़ार के दूसरे हिस्सों से काफ़ी आगे निकल गए. ऐसे में निवेशकों के मन में सवाल है-क्या PSU की तेज़ी अभी जारी रह सकती है या अब इसमें निवेश करने में देर हो चुकी है?
इसका जवाब सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर नहीं मिल सकता.
5 साल का रिटर्न बेहद शानदार
कुछ प्रमुख PSU फ़ोकस्ड फ़ंड्स या ETFs के आंकड़े देखें तो पिछले पांच साल में इनका प्रदर्शन काफी मजबूत रहा है.
| फंड/ETF | 3 साल CAGR | 5 साल CAGR | 10 साल CAGR |
|---|---|---|---|
| Nippon India ETF Nifty PSU Bank BeES | 24.64% | 30.41% | 10.76% |
| Kotak Nifty PSU Bank ETF | 24.65% | 30.38% | 10.70% |
| Nippon India ETF CPSE | 24.69% | 28.93% | 14.65% |
| ABSL PSU Equity* | 23.55% | 24.56% | - |
| 31 अगस्त 2026 के रिटर्न. *डायरेक्ट प्लान के रिटर्न 28 अगस्त 2026 के हैं. | |||
टेबल से साफ है कि Nippon India ETF Nifty PSU Bank BeES ने पांच साल में 30.41% CAGR दिया है, जो इस लिस्ट में सबसे ज़्यादा है. यानी पांच साल पहले लगाए गए ₹1 लाख की वैल्यू करीब ₹3.77 लाख हो गई होती. इसके बेहद करीब Kotak Nifty PSU Bank ETF ने 30.38% CAGR दिया, जबकि Nippon India ETF CPSE ने 28.93% CAGR दिया.
लेकिन यहीं निवेशकों को सावधान होने की ज़रूरत है.
10 साल का आंकड़ा क्यों जरूरी है?
हालिया पांच साल का प्रदर्शन असाधारण है, लेकिन PSU शेयरों का इससे पहले का रिकॉर्ड इतना शानदार नहीं रहा. Value Research के एनालिसिस में 2011 से 2026 तक के पांच साल के रोलिंग रिटर्न (rolling returns) देखने पर Nifty CPSE का औसत एनुलाइज़्ड रिटर्न 8.1% रहा, जबकि Nifty 500 का 11.5% रहा. Nifty PSE और BSE PSU का औसत क्रमशः 5.7% और 4.7% रहा.
यानी PSU थीम में रिटर्न सीधे-सीधे और लगातार नहीं आते. इसमें लंबे समय तक कमज़ोर प्रदर्शन के बाद तेज़ रैली देखने को मिल सकती है.
इसका एक उदाहरण PSU Bank ETF भी है. Nippon India ETF Nifty PSU Bank BeES ने पांच साल में 30.41% CAGR दिया, लेकिन 10 साल का CAGR सिर्फ 10.76% रहा - यानी लंबी अवधि में यह रफ्तार आधे से भी कम रह जाती है.
एक और बात-चार फ़ंड, कई समान शेयर
PSU Index Funds नाम से अलग-अलग लग सकते हैं, लेकिन इनके पोर्टफ़ोलियो में काफी समानता है. Value Research के विश्लेषण के मुताबिक Nifty CPSE और Nifty PSE के बीच औसत overlap 54.5% था, जबकि Nifty PSE और BSE PSU के बीच यह 59.4% तक रहा.
इसलिए केवल डाइवर्सिफ़िकेशन के नाम पर एक से ज़्यादा PSU Index Fund ख़रीदना जरूरी नहीं है. इससे कई बार एक ही कंपनियों में दोबारा निवेश हो जाता है.
क्या PSU Index Fund में निवेश करना चाहिए?
अगर आपको PSU थीम पर भरोसा है, तो पोर्टफ़ोलियो के छोटे हिस्से के लिए PSU Index Fund या ETF पर विचार किया जा सकता है. लेकिन इसे डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड का विकल्प नहीं मानना चाहिए.
PSU कंपनियों पर सरकारी नीतियों, डिसइन्वेस्टमेंट, रेगुलेशन और इकोनॉमिक साइकिल का असर ज़्यादा हो सकता है. यही वजह है कि इनका प्रदर्शन ब्रॉड-मार्केट फ़ंड्स की तुलना में ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाला हो सकता है.
इसलिए निवेश का फैसला केवल यह देखकर न करें कि "PSU ने पिछले पांच साल में 31% के आसपास रिटर्न दिया है." असली सवाल यह है कि क्या आप उस समय भी निवेश बनाए रख पाएंगे, जब PSU शेयर फिर से कई साल तक बाज़ार से पीछे रह जाएं.
आखिर में
PSU थीम में हाल की रैली दिलचस्प ज़रूर है, लेकिन किसी फ़ंड में सिर्फ़ इसलिए निवेश शुरू न करें कि उसने पिछले एक-दो साल में शानदार रिटर्न दिया है या इसलिए कि आजकल हर जगह इसकी चर्चा हो रही है. ये दोनों बातें बस शोर हैं. असली सवाल यह है कि क्या यह फ़ंड आपके पोर्टफ़ोलियो में फ़िट बैठता है, यानी यह कितना जोख़िम जोड़ता है, इससे कितना रिटर्न मिलने की उम्मीद रखी जा सकती है और यह आपके मौजूदा निवेश के साथ कैसा तालमेल बिठाता है. अगर यह इस कसौटी पर खरा उतरता है, तो हालिया तेज़ी की वजह से जल्दबाज़ी करने की ज़रूरत नहीं. Value Research Fund Advisor आपको ठीक इसी बात को परखने में मदद करने के लिए बना है.
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