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सारांशः ₹14,746 करोड़ वाला यह पुराना स्मॉल-कैप फ़ंड 15 साल में अपने बेंचमार्क से काफ़ी आगे रहा है. पर पिछले 3 साल में 23 में से 19 एक्टिव फ़ंड इससे आगे निकल गए और इंडेक्स फ़ंड भी. इसका पैसा 90 शेयरों में बंटा है, यह दूसरे फ़ंड से छोटी कंपनियों में पैसा लगाता है और मिड-कैप में बहुत कम रखता है. निवेशक के लिए असली सवाल यही है कि यह सुस्ती कुछ समय की है या लंबी चलेगी.
Franklin India Small Cap Fund स्मॉल-कैप कैटेगरी का एक पुराना और बड़ा नाम है. यह 2006 में आया था, जुलाई 2025 तक इसका नाम Franklin India Smaller Companies Fund था और 31 अगस्त 2026 को इसमें निवेशकों के ₹14,746 करोड़ लगे थे. इसके फ़ंड मैनेजरों में R. Janakiraman 2008 से हैं और Akhil Kalluri सितंबर 2022 से जुड़े हैं.
इस फ़ंड ने लंबे समय में अपने निवेशकों को अच्छी कमाई कराई है. पर पिछले 3 साल की तस्वीर बिल्कुल अलग है. और जब कोई पुराना, भरोसेमंद फ़ंड पिछड़ने लगे, तो सबसे मुश्किल सवाल यही होता है: यह कुछ समय की सुस्ती है, या फ़ंड सच में कमज़ोर पड़ गया है?
लंबे समय का रिकॉर्ड: इंडेक्स से आगे
| अवधि | फ़ंड का रिटर्न (सालाना) | Nifty Smallcap 250 | फ़र्क़ |
|---|---|---|---|
| 15 साल | 19.03% | 15.75% | +3.28 पॉइंट |
| शुरुआत से | 15.02% | 14.67% | +0.35 पॉइंट |
| सोर्स: वैल्यू रिसर्च, 31 अगस्त 2026 तक. रेगुलर प्लान. | |||
15 साल में यह फ़ंड अपने बेंचमार्क, Nifty Smallcap 250, से हर साल क़रीब 3.3 पॉइंट आगे रहा. यानी लंबे समय में इसने अच्छा किया है. पर एक बात ध्यान रखिए. 2018 से पहले यह फ़ंड मिड-कैप और स्मॉल-कैप, दोनों में पैसा लगाता था और जून 2018 तक इसका बेंचमार्क भी मिड-कैप इंडेक्स था. यानी इसका पुराना रिकॉर्ड अलग नियमों वाले दौर का है.
हाल के सालों में: ज़्यादातर फ़ंड से पीछे
अब इसे दूसरे एक्टिव स्मॉल-कैप फ़ंड से मिलाते हैं, और उस सस्ते विकल्प से भी, जो हर निवेशक के पास है, यानी Nifty Smallcap 250 का इंडेक्स फ़ंड.
| अवधि | Franklin का सालाना रिटर्न | एक्टिव फ़ंड का मीडियन | कितने फ़ंड फ्रैंकलिन से आगे | Nifty Smallcap 250 इंडेक्स फ़ंड |
|---|---|---|---|---|
| 3 साल | 11.68% | 14.91% | 23 में से 19 | 13.02% से 13.57% |
| 5 साल | 14.85% | 15.98% | 22 में से 14 | 13.42% से 13.71% |
| 10 साल | 14.62% | 16.94% | 11 में से 10 | - |
| सोर्स: वैल्यू रिसर्च, 7 अक्टूबर 2026 तक. डायरेक्ट प्लान. मीडियन यानी बीच वाला रिटर्न: आधे फ़ंड इससे ऊपर हैं, आधे नीचे. | ||||
3 साल में फ्रैंकलिन, 24 एक्टिव फ़ंड में 20वें नंबर पर है और Nifty Smallcap 250 के इंडेक्स फ़ंड से भी पीछे. यानी इन 3 सालों में एक सस्ता इंडेक्स फ़ंड, जिसे कोई फ़ंड मैनेजर नहीं चलाता, इससे बेहतर रहता. 5 साल में यह इंडेक्स फ़ंड से हर साल 1 पॉइंट से ज़्यादा आगे है, पर बाक़ी एक्टिव फ़ंड के मीडियन से पीछे. और 10 साल में 11 में से 10 फ़ंड इससे आगे हैं. यानी इसकी ज़्यादातर बढ़त पुराने सालों में बनी थी.
अब 10 साल का फ़र्क़ रुपयों में समझिए. अगर ₹1 लाख, 14.62% सालाना की दर से बढ़ें, तो 10 साल में क़रीब ₹3.91 लाख बनते हैं. और मीडियन वाले 16.94% से क़रीब ₹4.78 लाख. यानी हर ₹1 लाख पर क़रीब ₹87,000 का फ़र्क़.
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गिरावट में कम गिरा, पर तेज़ी में पीछे रहा
इस साल का डेटा एक और दिलचस्प बात दिखाता है. जनवरी से मार्च के आख़िर तक बाज़ार गिरा, तो फ्रैंकलिन क़रीब 12% नीचे गया, जबकि BSE 250 SmallCap TRI क़रीब 15% और स्मॉल-कैप कैटेगरी क़रीब 13%. यानी गिरावट में यह फ़ंड बाक़ियों से कम गिरा.
पर उसके बाद जब बाज़ार चढ़ा, तो तस्वीर पलट गई. अगस्त से कैटेगरी आगे निकलती गई. अक्टूबर की शुरुआत तक, इस साल फ्रैंकलिन और इंडेक्स, दोनों क़रीब 6% ऊपर हैं, जबकि कैटेगरी क़रीब 12% ऊपर.
पोर्टफ़ोलियो क्या कहता है
| पैरामीटर | Franklin | स्मॉल-कैप कैटेगरी |
|---|---|---|
| लार्ज-कैप शेयर | 8.81% | 6.68% |
| मिड-कैप शेयर | 4.47% | 11.12% |
| स्मॉल-कैप शेयर | 86.72% | 85.90% |
| कंपनियों का एवरेज मार्केट कैप | ₹19,870 करोड़ | ₹22,935 करोड़ |
| सोर्स: वैल्यू रिसर्च. लार्ज, मिड और स्मॉल-कैप का हिस्सा, फ़ंड के शेयरों में लगे पैसे में से है. | ||
सबसे बड़ा फ़र्क़ मिड-कैप में है. फ्रैंकलिन मिड-कैप में कैटेगरी के मुक़ाबले आधे से भी कम पैसा रखता है और इसकी कंपनियां एवरेजन क़रीब 13% छोटी हैं. यानी यह फ़ंड दूसरे स्मॉल-कैप फ़ंड से भी छोटी कंपनियों में पैसा लगाता है.
इसका पैसा बहुत सारे शेयरों में बंटा हुआ है. फ़ंड के पास 90 शेयर हैं और सबसे बड़े 10 शेयरों का हिस्सा सिर्फ़ 21.14% है. इसका 96.33% पैसा शेयरों में है और 3.29% कैश में. पर 90 शेयर होने से स्मॉल-कैप का रिस्क कम नहीं हो जाता. फ़ंड के कुल पैसे का क़रीब 83.5% स्मॉल-कैप शेयरों में है और जब पूरा स्मॉल-कैप बाज़ार गिरता है, तो ज़्यादा शेयर होने से नुक़सान से नहीं बचा जा सकता.
| सेक्टर | Franklin | कैटेगरी | फ़र्क़ |
|---|---|---|---|
| इंडस्ट्रियल्स | 21.81% | 18.04% | +3.77 पॉइंट |
| कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी | 20.84% | 17.10% | +3.74 पॉइंट |
| फ़ाइनेंशियल | 17.08% | 19.54% | -2.46 पॉइंट |
| हेल्थकेयर | 9.80% | 12.92% | -3.12 पॉइंट |
| मटीरियल्स | 8.99% | 13.43% | -4.44 पॉइंट |
| टेक्नोलॉजी | 8.03% | 6.62% | +1.41 पॉइंट |
| रियल एस्टेट | 3.65% | 1.30% | +2.35 पॉइंट |
| सोर्स: वैल्यू रिसर्च. जिन सेक्टर में फ़र्क़ 1 पॉइंट से कम है, उन्हें नहीं दिखाया. | |||
यह फ़ंड इंडस्ट्रियल्स और कंज़्यूमर डिस्क्रेशनरी में कैटेगरी से ज़्यादा पैसा लगाता है और रियल एस्टेट में तो क़रीब 2.8 गुना. वहीं मटीरियल्स, हेल्थकेयर और फ़ाइनेंशियल में कम. ये फ़ंड मैनेजर के सोचे-समझे फ़ैसले हैं और इन्हीं से यह फ़ंड बाक़ियों से अलग बनता है. पर ध्यान रहे, आज का पोर्टफ़ोलियो देखकर पिछले 3 या 10 साल के रिटर्न की पूरी वजह नहीं समझी जा सकती, क्योंकि उस दौरान पोर्टफ़ोलियो बदलता रहा होगा.
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तो निवेशक क्या करें?
- अगर आपके पास पहले से यह फ़ंड है, तो हड़बड़ी में मत बेचिए. इसका 15 साल का रिकॉर्ड मज़बूत है और इस साल की गिरावट में यह कम गिरा. पर 3 साल की सुस्ती को नज़रअंदाज़ भी मत कीजिए. अगली कुछ तिमाहियों में देखिए कि बेंचमार्क और दूसरे फ़ंड से इसका फ़र्क़ घटता है या नहीं. और बदलने का फ़ैसला करें, तो पहले टैक्स और एग्ज़िट लोड का हिसाब लगा लीजिए.
- अगर आप नया निवेश सोच रहे हैं, तो सिर्फ़ पुराने नाम या बड़े साइज़ पर मत जाइए. ख़ुद से पूछिए कि इस फ़ंड से आपको ऐसा क्या मिलेगा, जो एक सस्ता इंडेक्स फ़ंड या कोई दूसरा लगातार अच्छा चलने वाला स्मॉल-कैप फ़ंड नहीं देगा.
किसी फ़ंड को उसके नाम और रिटर्न से आगे परखना हो, तो वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र हर फ़ंड पर रिसर्च के साथ ख़रीदने, रखने या बेचने की राय देता है, ताकि आप अपने गोल और मौजूदा निवेश के हिसाब से फ़ैसला कर सकें.
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