फ़र्स्ट पेज

जटिलता की धुंध

अगर आप फ़ाइनांस की बातचीत में कोई ऐसा शब्द देखते हैं जिसे समझना मुश्किल लगे, तो हो सकता है कि ये कोई बेकार चीज़ बेचने के लिए गढ़ा गया जार्गन है

अगर आप फ़ाइनांस की बातचीत में कोई ऐसा शब्द देखते हैं जिसे समझना मुश्किल लगे, तो हो सकता है कि ये कोई बेकार चीज़ बेचने के लिए गढ़ा गया जार्गन हैAI-generated image

वॉरेन बफ़े की इस बात को कम ही लोगों ने सुना है, "अगर बड़ा निवेशक बनने के लिए कैलकुलस और अलजेब्रा की ज़रूरत होती, तो मुझे वापस न्यूज़पेपर बेचना शुरू करना पड़ता." एक सफल निवेशक बनने के लिए उन्हें गणित के साधारण जोड़, घटा, गुणा और भाग से ज़्यादा करने की ज़रूरत नहीं पड़ी. हालांकि, ये बात उन पेशेवरों को कहने की ज़रूरत नहीं जिनकी बातें जटिल होती हैं और लोगों को निवेश के लिए लुभाने के धंधे में लगे रहते हैं. हाल ही में, मुझे एक विज्ञापन मिला जिसमें ये सीखा जा सकता था कि फ़ाइनेंशियल प्लानिंग के लिए 'गामा' का इस्तेमाल कैसे किया जा सकता है, जिसमें ज़ाहिर तौर पर म्यूचुअल फ़ंड निवेश भी शामिल है.

इसमें, जहां गामा का विवरण सांप का तेल जैसा संदेहास्पद लगा, वहीं इसके नाम ने तो संदेह की पुष्टि ही कर दी. 'गामा' क्यों? ये शब्द पहले से ही स्टॉक मार्केट में सांप के तेल रूपी विकल्प, ऑप्शंस ट्रेडिंग के लिए इस्तेमाल होता है. इसमें फ़ाइनेंशियल कैलकुलेशन करने वाले निवेश में ग्रीक अक्षरों का ही इस्तेमाल क्यों करते हैं? एक बहाना तो ये होता है कि पहले से ही ऐसा हो रहा है और हमेशा से ऐसा ही किया जाता रहा है. और सभी निवेश के पेशेवर अल्फ़ा और बीटा जैसे शब्दों का इस्तेमाल इसलिए करते हैं, तो क्यों न कुछ और ग्रीक अक्षरों को इसमें शामिल करें?

ये भी पढ़िए - समझो और क़ाबू करो

इसे समझें कि अकादमिक इस्तेमाल के अलावा ये महज़ मार्केटिंग टेक्नीक है. क़रीब-क़रीब सभी ग़ैर-पेशेवर निवेशक ग्रीक अक्षरों को ‘साइंस’ से जुड़ा समझते हैं. वो समझते हैं कि ये एक जार्गन (शब्दजाल) है मगर ये मान लेते हैं कि ये कोई मुश्किल आइडिया के लिए होगा या एक मुश्किल प्रोसेस जो आम दिमाग़ की समझ या इस्तेमाल करने के बूते से बाहर की बात होगी.

डिक्शनरी में जार्गन का मतलब है ऐसा ख़ास शब्द या अभिव्यक्ति जिसे कोई पेशेवर या समूह इस्तेमाल करे और जिसे दूसरों के लिए समझना मुश्किल हो', जार्गन का इस्तेमाल किसी को दायरे से बाहर रखने के लिए, या फिर प्रभावित करने के लिए होता है. और आज के दौर में जब सब कुछ विज्ञापन के ज़रिए बेचा जा रहा है, तो ग्रीक अक्षरों से मिलने वाले साइंस के मुखौटे का एक बड़ा फ़ायदा है. आख़िरकार, अगर 'गामा' शब्द की जगह 'केला' जैसा ज़्यादा उपयुक्त शब्द का इस्तेमाल करेंगे, तो ग्राहकों को प्रभावित करना एक समस्या बन जाएगा.

कुछ साल पहले, एक युवा जो किसी ‘रिलेशनशिप मैनेजर’ जैसी नौकरी में था उसने मुझसे पूछा कि एसेट एलोकेशन का फ़ॉर्मूला क्या है. वो अपने ग्राहकों को एक फ़ॉर्मूले में डालना चाहता था और ये तय करना चाहता था कि उन्हें उनके पैसे का कितना हिस्सा अलग-अलग तरह के एसेट्स में लगाना चाहिए. मैंने उसे सच बताया, जो ये था कि किसी व्यक्ति के आदर्श एसेट एलोकेशन का फ़ैसला करना कुछ सिद्धांतों के एक सेट की तरह होता है, और फिर ये पता लगाना पड़ता है कि निवेशक के जीवन की परिस्थितियों के आधार पर किस सिद्धांत या नियम को लागू किया जाए और किसे नहीं. बहुत से घटाने-बढ़ाने वाले इनपुट होते हैं, साथ ही नॉन-क्वांटिफ़ाइबल (गैर-मात्रात्मक) फ़ैक्टर भी होते हैं, इसलिए किसी एक फ़ॉर्मूला का ख़याल काफ़ी ग़लत है.

मेरा दोस्त काफ़ी निराश हुआ. उसे कम-से-कम अल्फ़ा, गामा, सिग्मा, पाई और टाओ जैसी किसी चीज़ की उम्मीद थी. अगर उसमें कुछ कैलकुलस भी शामिल होता, तो और भी अच्छा होता. ये उसके ग्राहकों के सामने पेश करने में ज़रा ज़्यादा असरदार लगता. उसने दिखाया कि मेरी बातें सुन कर वो निराश हुआ है. दरअसल, या तो ऐसा फ़ॉर्मूला मौजूद था जिसका मुझे नहीं पता था, या फिर ये ऐसी बात थी जो मुझे पता तो थी मगर मैं उसके साथ नहीं बांटना चाहता था.

ये भी पढ़िए - आसान सवालों के मुश्किल जवाब

बेशक़, जार्गन के जादू पर सिर्फ़ फ़ाइनांस सेल्स का ही ठेका नहीं है. ये हमेशा से इलेक्ट्रॉनिक्स, गैजेट्स और ऑटोमोबाइल जैसे तकनीकी प्रोडक्ट्स में मौजूदा रहा है, लेकिन अब ये खाने-पीने और कपड़ों जैसी चीज़ों में भी फैल गया है. महंगे आधुनिक स्पोर्ट्स के कपड़ों की पसीने से निजात पाने की ख़ूबियों का ब्यौरा ग्राहकों को उतना ही बेवकूफ़ बनाता है जितना फ़ाइनांस के गामा और टाओ. असल बात ग्राहक को ये बताना है कि हमने ग़ज़ब का तकनीकी जादू ईजाद किया है जिसे आप समझ नहीं पाएंगे, इसलिए बस चुप रहें और पैसे दे दें.

बेशक़, ये धुंध से भरा तकनीकी जादू फ़ोक्सवैगन की कारों में लगे धोखाधड़ी वाले सॉफ़्टवेयर की तरह है जिसका आविष्कार कार्बन उत्सर्जन को ढंकने के लिए किया गया था. मगर फिर, लगता है कि ये शायद कुछ ऐसा है जिसपर फ़ाइनांस की सर्विस इंडस्ट्री ने ऑटो इंडस्ट्री की तुलना में कहीं ज़्यादा महारथ हासिल कर ली है.

ये भी पढ़िए परफेक्‍ट होने की चाहत कितनी सही

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

UPI फ़ीस नहीं, आपकी समस्या एक्सपेंस रेशियो है

पढ़ने का समय 3 मिनटआकार रस्तोगी

NSE IPO: ऐसा बिज़नेस जिसमें कोई कमी निकालना मुश्किल है

पढ़ने का समय 6 मिनटLekisha Katyal

Hero Motors IPO: EV कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन क्या इतनी क़ीमत चुकाना सही है?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

वही 100 स्टॉक, एक फ़ंड ने 53% और चार ने दिया 30% रिटर्न

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

बिड़ला की एंट्री से केबल कंपनियों के शेयर दहल गए हैं?

पढ़ने का समय 6 मिनटLekisha Katyal

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गिरावट का मतलब नुक़सान नहीं होता

आपकी स्क्रीन पर लाल रंग का नंबर कोई नुक़सान नहीं है, आप उस पर कोई कदम उठाकर ही उसे पक्का करते हैं

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी