फ़र्स्ट पेज

समझो और क़ाबू करो

कैसे समझ आपको पैसों से जुड़े अपने भविष्य को नियंत्रित करने के क़ाबिल बनाती है

understand-and-controlAnand Kumar

back back back
5:57

जाने-माने निवेशक वॉरेन बफ़े ने एक बार कहा था कि अगर एक बढ़िया निवेशक बनने के लिए कैलकुलस या एलजेब्रा की ज़रूरत होती, तो मुझे वापस न्यूज़पेपर बांटने का काम करना पड़ता. एक सफल निवेशक बनने के लिए, किसी को पुराने जोड़, घटा, गुणा और भाग के अलावा किसी और गणित की ज़रूरत नहीं है. हालांकि, ये बात उन जटिलाओं से भरे पेशेवर निवेश बेचने वालों को बताने की ज़रूरत नहीं जो निवेश की दुनिया में भरे पड़े हैं.

कुछ साल पहले, एक बैंक के युवा 'रिलेशनशिप मैनेजर' ने मुझसे संपर्क किया और एसेट एलोकेशन (परिसंपत्ति आवंटन) का फ़ॉर्मूला पूछा. उन्होंने अपने ग्राहकों को आंकड़े के तौर पर एक फॉर्मूले में डालने की योजना बनाई थी जो जादू से इन ग्राहकों के लिए अलग-अलग एसेट क्लास में फ़ंड्स का सबसे सही डिस्ट्रीब्यूशन तय कर देगा. मुझे उन्हें ये ख़बर देनी पड़ी कि ऐसा कोई फ़ॉर्मूला नहीं है. मैंने समझाया कि सही एसेट एलोकेशन का फ़ैसला कुछ माने हुए नियमों पर निर्भर करता है, जिन्हें बाद में किसी व्यक्ति के जीवन की ख़ास परिस्थितियों के मुताबिक़ ढाल दिया जाता है. इस पूरी क़वायद में कई गुणात्मक (क्वालिटेटिव) और ग़ैर-मात्रात्मक (ग़ैर-क्वांटिटेटिव) पहलुओं पर विचार करना शामिल है जिन्हें सिर्फ़ गणित तक ही सीमित नहीं किया जा सकता.

उस युवा पेशेवर शख़्स के चेहरे पर निराशा के भाव देख कर मुझे कुछ अचरज हुआ. उसे अल्फ़ा, गामा, सिग्मा, पाई और टौस जैसे टर्म में ग्रीक अक्षरों से सजा एक प्रभावित करने वाला फ़ॉर्मूला पाने की उम्मीद थी. जितना ज़्यादा कैलकुलस शामिल होता, उतना बेहतर होता, क्योंकि ये उसके ग्राहकों को प्रभावित करता. उसने स्पष्ट किया कि वो निराशा हुआ है, क्योंकि या तो मैं ऐसे किसी फ़ॉर्मूले के बारे में जानता नहीं था या मैं उसके साथ साझा नहीं करना चाहता था. उसके लिए ये बात स्वीकार करने लायक़ ही नहीं थी कि ऐसा कोई फ़ॉर्मूला ही नहीं था.

ये युवक तो फिर भी झूठ-मूठ की जटिलता बेचने के पेशे में था, मगर कई निवेशक तो ख़ुद ये बात स्वीकार नहीं कर पाते कि निवेश सरल भी हो सकता है. मेरे ख़याल से, ये अंतर, सवालों और उनके जवाबों को देखने की कोशिश में और जवाबों के पीछे का तर्क समझने की कोशिश का है. अब आप एसेट एलोकेशन की बात को ही लें. आप या तो इसे दी गई किसी इंस्ट्रक्शन या निर्देश के तौर पर स्वीकार कर सकते हैं, या आप इसके कारण को समझ सकते हैं. एसेट एलोकेशन की बात डाइवर्सिफ़िकेशन पर आधारित है - सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने हैं. अपने निवेश का एसेट एलोकेशन अलग तरह के निवेशों जैसे इक्विटी, फ़िक्स्ड इनकम और कुछ दूसरी तरह के निवेशों में फैलाकर, आप अपने पैसे को सुरक्षित करते हैं. जब किसी एक तरह के निवेश पर ख़राब असर होता है, तो दूसरे स्थिरता दे सकते हैं या फिर बढ़ भी सकते हैं, और ये बात आपके पूरे पोर्टफ़ोलियो में संतुलन बनाए रखती है.

एक बार जब आप इस तर्क समझ जाते हैं, तो अगला क़दम आप ख़ुद उठा सकते हैं. आप पहले से ही जानते हैं कि इक्विटी में कमाई ज़्यादा होती है लेकिन इसमें उतार-चढ़ाव भी ज़्यादा होता है. फ़िक्स्ड इनकम इसके उलट है. हमें एसेट एलोकेशन क्यों करना चाहिए, इसके बारे में समझ आने के साथ, आपको ये पता चल जाता है कि जीवन के अलग-अलग दौर में आपका असली एसेट एलोकेशन क्या होना चाहिए? हालांकि, मेरा विषय एसेट एलोकेशन नहीं है; ये तो सिर्फ़ एक मिसाल है. ये बात, निवेश रणनीतियों और अवधारणाओं के पीछे छुपे तर्क को समझने की अहमियत के बारे में है. जब आप बुनियादी सिद्धांतों को समझ लेते हैं, तो आप सोचे-समझे फ़ैसले लेने और ज़रूरत के मुताबिक़ अपना नज़रिया अपनाने का आत्मविश्वास हासिल कर लेते हैं. कोई भी आपको मनगढ़ंत फ़ॉर्मूलों पर विश्वास करने के लिए मजबूर नहीं कर सकता.

अक्सर, निवेशक जटिल फ़ॉर्मूले और चिकनी-चुपड़ी बातों के आकर्षण में फंस जाते हैं, ये सोचकर कि निवेश में सफल होने की चाभी यही है. वो गणित में महारथ की कमी से डरे हुए महसूस कर सकते हैं या किसी फ़ाइनेंस प्रोफ़ेशनल की असरदार बयानबाज़ी से प्रभावित हो जाते हैं. हालांकि, वॉरेन बफ़े जैसे दिग्गज निवेशक भी मुश्किल कैलकुलेशन की तुलना में सरलता और सामान्य ज्ञान (कॉमन सेंस) की अहमियत पर ज़ोर देते हैं. निवेश की बुनियादी बातें, जैसे रिस्क और रिटर्न के बीच संबंध, डाइवर्सिफ़िकेशन की ताक़त और निवेश की अवधि के असर को समझने पर ध्यान दे कर, निवेशक ठोस फ़ैसले लेने के लिए एक मज़बूत आधार विकसित कर सकते हैं. वे जटिलता की धुंध के पार देख सकते हैं और उन बातों पर फ़ोकस कर सकते हैं जो लंबे समय की सफलता के लिए असल में मायने रखती हैं.

ये समझ आत्मविश्वास पैदा करती है. जब आप 'क्या' के पीछे के 'क्यों' को जानते हैं. तब शॉर्ट-टर्म मार्केट के शोर या निवेश की नई-नई सनक से आपके प्रभावित होने की संभावना कम होती है. आप बाज़ार में उथल-पुथल या परस्पर विरोधी सलाह के बावजूद दृढ़ विश्वास के साथ अपनी रणनीति पर क़ायम रह सकते हैं.

ये भी पढ़िए - निवेश की शुरुआत के लिए बेस्ट फ़ंड्स!

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

स्मॉल कैप के लिए मुश्क़िल रहा साल, फिर कैसे इस फ़ंड ने दिया 20% का रिटर्न?

पढ़ने का समय 4 मिनटचिराग मदिया

आपके पास ₹50 लाख हैं. यह ग़लती बिल्कुल नहीं करना

पढ़ने का समय 6 मिनटउज्ज्वल दास

IEX का शेयर अपने पीक से 65% गिरा, क्या सबसे बुरा दौर बीत गया है?

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

साल भर में 252% रिटर्न, लेकिन नए निवेशक नहीं लगा सकते पैसा, क्यों?

पढ़ने का समय 5 मिनटउज्ज्वल दास

एक एलॉय बनाने वाली कंपनी जो मेटल से ज़्यादा मार्केट से कमाती है

पढ़ने का समय 5 मिनटसत्यजीत सेन

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी