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महंगी EMI से बचाएगा रिवर्स EMI फ़ंड

क़िश्त नहीं सिर्फ़ निवेश ही दिलाएगी महंगी EMI के जंजाल से छुटकारा

क़िश्त नहीं सिर्फ़ निवेश ही दिलाएगी महंगी EMI के जंजाल से छुटकारा

मेरे ज़्यादातर दोस्‍त नौकरी करते हैं. यानी हर महीने सैलरी पाते हैं. एक बात सब दोस्‍तों में एक जैसी है. वो अक्‍सर कहते हैं यार सैलरी अकाउंट में आने के बाद EMI चुकाने में पूरी सैलरी कैसे ग़ायब हो जाती है पता ही नहीं चलता. अक्‍सर वे इसे हल्‍के में लेते हैं. फिर मेट्रो शहर में रहते हैं तो ये तर्क होता है कि मेट्रो शहर में रहना है तो ये क़ीमत चुकानी ही होगी. अब त्‍योहारों का मौसम शुरू होने वाला है. दीवाली भी आने वाली है. दिवाली पर कुछ बड़ी ख़रीदारी करने का दबाव लगभग हर मिडिल क्‍लास परिवार पर होता है. हमारे देश में दिवाली पर ख़रीदारी करना शुभ भी माना जाता है.

आजकल EMI पर ख़रीदारी करना बहुत आसान है. एक समय था जब क़िश्‍त पर कुछ ख़रीदने के लिए बहुत ज़्यादा पेपरवर्क करना पड़ता था. अब तो आप मिनटों में क़िश्‍त पर ख़रीदारी कर सकते हैं. ज़्यादा से ज़्यादा आपको एक वैध ID देनी होती है. इसके अलावा आप क्रेडिट कार्ड से ख़रीदारी करके बिल को आप एक मिनट से भी कम समय में EMI में कन्‍वर्ट करा सकते हैं. जब ख़रीदारी का मौक़ा भी हो और दस्‍तूर भी तो ख़ुद को रोक पाना आसान नहीं होता है.

EMI की सुविधा के साथ ख़रीदारी करना तो बहुत अच्‍छा लगता है. लेकिन सालों तक इसकी EMI चुकाना शायद ही किसी को अच्‍छा लगता है. हर बार जब आपको EMI चुकानी होती है या क्रेडिट कार्ड के बिल में ये EMI जुड़ कर आती है तो ये चुभता है. इसके अलावा आपको EMI के साथ ब्‍याज भी चुकाना होता है, जो काफ़ी महंगा होता है. EMI लोन पर जब आप कोई चीज़ ख़रीदते हैं तो आपको सालाना 17-20 फ़ीसदी तक ब्‍याज चुकाना पड़ता है. और सेल्‍समेन की ट्रेनिंग ऐसी होती है कि वे इस ब्‍याज दर को बड़ी सफाई से छिपा लेते हैं. आप अगर पूछेंगे भी तो वे EMI की पूरी लागत जोड़ कर क़ीमत रुपए में बताएंगे. जैसे आपको 10 हज़ार रुपए डाउन पेमेंट देने होंगे फिर हर महीने ₹3000 की EMI. लोगों को अगर लगता है कि वे हर महीने EMI दे सकते हैं तो वे सामान ख़रीद लेते हैं. ब्‍याज जोड़ने की ज़हमत शायद ही कोई उठाता हो. इसी तरह क्रेडिट कार्ड से ख़रीदारी करके बिल को EMI में बदलवाने का मामला हो. बैंक का कर्मचारी आपको बताएगा कि वन टाइम प्रोसेसिंग फ़ीस के साथ आपकी मंथली EMI कितनी होगी. वो ब्‍याज दर बताता भी है तो मंथली ब्‍याज दर बताया है, जो 1.5 से 2 फ़ीसदी तक होती है. जो सुनने में तो कम लगती है लेकिन सालाना आधार पर जोड़ने पर काफ़ी ज़्यादा हो जाती है.

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ख़ैर ब्‍याज दर के बारे में शिकायत करने का कोई मतलब नहीं. बैंक या दूसरी कंपनियों के लिए छोटा लोन महंगा और जोख़िम भरा कारोबार होता है. कई बार इस तरह के लोन की ‍रिकवरी भी मुश्किल हो जाती है. इस तरह के बिज़नस में कड़ी प्रतिस्‍पर्धा है. अगर कम ब्‍याज दर पर लोन देना संभव होता तो कोई न कोई कंपनी ऐसा कर रही होती. कई बैंक या कंपनियां ज़ीरो ब्‍याज दर पर लोन की पेशकश करती हैं. लेकिन ऐसे मामलों में चेन में शामिल कोई न कोई पार्टी पैसा चुका रही होती है और ये पैसा आपको ही सामान की क़ीमत के तौर पर चुकाना होता है. यानी EMI कल्‍चर से बचने का कोई रास्‍ता नहीं है.

EMI कल्‍चर से बचने का सिर्फ एक ही रास्‍ता है. आप एक रिवर्स EMI फ़ंड बनाएं. इसके लिए पहले आप ऐसा फ़ंड चुने जो कम अ‍वधि के निवेश के लिए सही हो. इसके बाद इस फ़ंड में आप उतनी रक़म की SIP शुरू करें जितने रक़म की EMI आप आराम से चुका सकते हैं. जब भी आपको कुछ ख़रीदना हो, तो पहले चेक करें कि क्‍या आपके रिवर्स EMI फ़ंड में ज़रूरी रक़म है. अगर है, तो पैसा निकालें और ख़रीदारी करें. अगर नहीं है तो इंतज़ार करें. आपको इस फ़ंड को बचत के तौर पर न लें. ये फ़ंड आपके ख़र्च के लिए है. अगर आप ऐसा करते हैं तो आप को EMI पर 17-20 फ़ीसदी तक महंगा ब्‍याज नहीं देना होगा. इसके अलावा आपको रिवर्स EMI फ़ंड से 6-8 फ़ीसदी सालाना रिटर्न भी मिलेगा. अगर दोनों तो जोड़ लें, तो आप लगभग 25 फ़ीसदी ब्‍याज के फ़ायदे में हैं. ये रक़म अपने आप में ही इतनी हो सकती है कि जिससे आप ऐसा कुछ ख़रीद लें जो पहले आप शायद न ख़रीद पाते.

ख़ासकर अगर कोई युवा छोटे पैमाने पर रिवर्स EMI फ़ंड का इस्तेमाल करता है तो उसे पैसों के लिहाज़ से काफ़ी फ़ायदा नज़र आएगा. जैसे अगर किसी को महंगा फ़ोन ख़रीदना है तो वो इस फ़ंड का इस्‍तेमाल कर सकता है.

याद रखें कि अगर आप ख़र्च को टालते हैं तो आप पैसा बनाते हैं और अगर समय से पहले ख़र्च करते हैं तो आप पैसा बरबाद करते हैं. बचत और निवेश की दुनिया में ये याद रखना बेहद ज़रूरी है. अगर आप इस पर अमल करते हैं तो पैसों के लिहाज़ से आपकी ज़िंदगी काफ़ी आसान हो जाएगी.

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