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क्‍या मेरा निवेश सुरक्षित है ?

का‍र्वी घपले के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्‍वाभाविक है। म्‍युचुअल फंड इसका सही जवाब है

का‍र्वी घपले के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्‍वाभाविक है। म्‍युचुअल फंड इसका सही जवाब है

क्‍या मेरा निवेश सुरक्षित है ? यह पहला सवाल है जो कोई भी निवेशक निवेश के बारे में पूछता है। अगर आप यह सवाल किसी एक्‍सपर्ट से पूंछ रहे हैं तो सही मायने में इस सवाल का जवाब देने से पहले आपसे एक काउंटर सवाल पूछा जाना चाहिए सुरक्षित किससे ?
जब आप निवेश करते हैं तो उसकी सुरक्षा के लिहाज से कई तरह के खतरे होते हैं। मोटे तौर पर देखें तो इन खतरों को दो कैटेगरी में रखा जा सकता है। पहला खतरा तो यह होता है कि निवेश की कीमत तो नहीं कम हो जाएगी। और दूसरा खतरा यह होता है कि दूसरा कोई जो आपके निवेश को बेचने के लिए अधिकृत नहीं है निवेश बेच कर रकम लेकर भाग जाए। इक्विटी या इक्विटी म्‍युचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशक पहले वाले खतरे के बारे में कुछ हद तक जानते हैं। इक्विटी में कम अवधि में तेज उतार चढ़ाव का जोखित होता है और ऊंचा रिटर्न हासिल करने के लिए निवेशक यह जोखिम उठाते हैं।
दूसरी तरह का खतरा अलग तरह का है। यह साफ तौर पर अपराध है। यह कुछ ऐसा है कि कोई आपका पैसा लूट कर भाग जाए। लोग यह उम्‍मीद करते हैं कि उनको इस तरह के खतरे का सामना शायद कभी नहीं करना पड़ेगा या इस तरह के खतरे की गुंजाइश बहुत कम है। लेकिन हाल में कार्वी स्‍टॉक होल्डिंग का अनुभव यह दिखाता है कि इस तरह की उम्‍मीदें पालना खतरनाक भी हो सकता है।
सेबी की जांच में जो बातें सामने आईं हैं उससे ऐसा लगता है कि स्‍टॉकब्रो‍किंग फर्म या इस फर्म के किसी व्‍यक्ति ने एक बड़ी डकैती को अंजाम दिया है। इस धोखाधड़ी को अप्रत्‍याशित कहा जा सकता है और इस तरह की धोखाधड़ी इतने बड़े पैमाने पर कभी नहीं हुई है। छोटे स्‍टॉक ब्रोकर्स पहले भी इसी तरह की धोखाधड़ी कर चुके हैं।
हालांकि हम सब यह बात जानते हैं कि डिजिटल ट्रांजैक्‍शन से जुड़े धोखाधड़ी के मामले बढ़ते जा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर हम सब जानते हैं कि ऑनलाइन बैकिंग धोखाधड़ी बड़े पैमाने पर हो रही है। हर व्‍यक्ति के जानपहचान में कोई न कोई ऐसा जरूर होगा जो इस तरह की धोखाधड़ी का शिकार हो चुका है। पेटीएम केवाईसी घोटाला भी बड़े पैमाने पर हुआ और कंपनी को लोगों को जागरूक करके के लिए बड़े पैमाने पर प्रयास करना पड़ा कि वे इस तरह की धोखाधड़ी से सतर्क रहें।
बहुत से लोग मानते हैं कि वे कई तरह की धोखाधड़ी को ठीक से नहीं समझते हैं। ऐसे में वे इससे खुद को सुरक्षित नहीं रख सकते हैं। असल जीवन में तो लोग जानते हैं कि कैसे खरीदें और मजबूत ताले का इस्‍तेमाल करें। लेकिन डिजिटल ट्रांजैक्‍शन की दुनिया में आप हर खतरे से खुद को बचा लें यह इतना आसान नहीं है।
बचत करने वाले और एक निवेशक के नजरिए से एक सवाल स्‍वाभाविक है कि क्‍या म्‍युचुअल फंड निवेश भी कार्वी घपले जैसे खतरे की जद में है। कार्वी घपले से पता चलता है कि आपकी स्‍टॉक होल्डिंग को लेकर आपका ब्रोकर जो भी बताता है कि वह भी गलत हो सकता है। कार्वी स्‍टॉक होल्डिंग में जिस तरह से हुआ है तो क्‍या इसका मतलब है कि आपकी म्‍युचुअल फंड होल्डिंग के साथ भी ऐसा हो सकता है ? क्‍या आपको इस बात‍ की चिंता करनी चाहिए कि कोई ब्रोकर आपके फंड को अपने कब्‍जे में ले लेगा और फंड को बेच कर रकम अपने अकाउंट में डाल लेगा ?
सेबी की जांच से पता चलता है कि कार्वी स्‍टॉक होल्डिंग ने अपने ग्राहकों के सैकड़ो करोड़ रुपए के शेयरों के साथ यही किया है। ग्राहकों के डिपॉजिटिरी अकाउंट से शेयर ट्रांसफर किए गए। उनको बेचा गया और मिली रकम को कार्वी के रियल एस्‍टेट बिजनेस में ट्रांसफर कर दिया गया।
मैं यह नहीं कह रहा हूं कि म्‍युचुअल फंड के साथ किसी तरह की धोखाधड़ी संभव नहीं है। लेकिन कार्वी घपले जैसी धोखाधड़ी तो कम से कम म्‍युचुअल फंड के साथ नहीं की जा सकती है।
शेयरों में जब निवेश करते हैं तो शेयर ब्रोकर वास्‍तविक इंटरमीडियरी होता है। आप ब्रोकर से डील करते हैं और ब्रोकर ट्रांजैक्‍शन करता है। वहीं म्‍युचुअल फंड में सेल्‍स इंटरमीडियरी हो सकता है लेकिन फाइनेंशियल ट्रांजैक्‍सन आपके और म्‍युचुअल फंड के बीच होता है। इसमें फंड कंपनी भी शामिल नहीं होती है ट्रांजैक्‍शन आपके और म्‍युचुअल फंड स्‍कीम के बीच होता है। यही नहीं जिस बैंक अकाउंट से फंड को पैसा जाता है और जिस अकाउंट में पैसा वापस आता है वह भी एक ही होना चाहिए। बैंक अकाउंट में जो नाम है फंड होल्डिंग भी उसी नाम पर होनी चाहिए। एक तरह से आप कह सकते हैं कि म्‍युचुअल फंड के साथ ट्रांजैक्‍शन में कोई इंटरमीडियरी नहीं होता है।
म्‍युचुअल फंड का स्‍ट्रक्‍चर भी शेयरों की तुलना में काफी सरल होता है। इसीलिए ऐसे निवेशक जो 24 घंटे सतर्क नहीं रह सकते हैं उनके लिए म्‍युचुअल फंड ज्‍यादा बेहतर है बजाए निवेश के दूसरे विकल्‍पों के जिसमें निवेशक को हर समय चौकन्‍ना रहने की जरूरत होती है।

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