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डिवीडेंड प्‍लान को दूर से करें नमस्‍ते

बजट में चाहे जो बदलाव हुए हैं इक्विटी म्‍युचुअल फंड के डिवीडेंड प्‍लान निवेश के लिए कभी भी फायदेमंद विकल्‍प नहीं रहे

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हाल में आए आम बजट 2020 में सरकार ने डिवीडेंड डिस्‍ट्रीब्‍यूशन टैक्‍स यानी डीडीटी खत्‍म कर दिया है। इसके अलावा इक्विटी और इक्विटी म्‍युचुअल फंड के डिवीडेंड को निवेशक की टैक्‍सेबल इनकम में डाल दिया है। निवेश पर लगने वाले टैक्‍स के लिहाज से यह बड़ा सुधार है और इसका इंतजार भी लंबे समय से था। अगर डिवीडेंड पर टैक्‍स वसूला जाना है तो यह टैक्‍सपेयर की इनकम का पार्ट होना चाहिए। डीडीटी वाली व्‍यवस्‍था में कंपनी या म्‍युचुअल फंड निवेशक को दिए गए जाने वाले डिवीडेंड पर टैक्‍स काट लेते थे। इसकी वजह से छोटे निवेशक और रिटायर हो चुके लोगों को डिवीडेंड के तौर पर बहुत छोटी रकम मिलती है जबकि उनको अमीर इंडीविजुअल और कंपनियों के बराबर ही टैक्‍स चुकाना पड़ता है। जबकि अमीर इंडीविजुअल और कंपनियां ऐसे लोगों की तुलना में बहुत ज्‍यादा डिवीडेंड इनकम हासिल करती हैं।
1 अप्रैल से लागू हो रही नई व्‍यवस्‍था में डिवीडेंड देने वाले को कोई टैक्‍स नहीं काटना है। इसमें टीडीएस तो कटेगा लेकिन किसी भी अन्‍य टीडीएस की तरह अगर आपकी टैक्‍स देनदारी से ज्‍यादा है तो रिफंडेबल होगा। इसका मतलब है कि डिवीडेंड टैक्‍सपेयर की इनकम में जुड़ेगा और वह जिस टैक्‍स ब्रैकेट में आता होगा उसके हिसाब से टैक्‍स लगेगा।
हालांकि इस बदलाव ने कुछ इक्विटी म्‍युचुअल फंड निवेशकों को परेशान कर‍ दिया है। ये ऐसे निवेशक हैं जिन्‍होंने म्‍युचुअल फंड के डिवीडेंड प्‍लान में बड़े पैमाने पर निवेश कर रखा है और ऊंचे टैक्‍स ब्रैकेट में आते हैं। अब तक ये लोग 10 फीसदी डीडीटी और सरचार्ज का भुगतान कर रहे थे। यह कुल मिला कर 11.648 फीसदी पड़ रहा था। ऊंचे टैक्‍स स्‍लैब में आने वाले इन निवेशकों को अब डिवीडेंड पर ज्‍यादा टैक्‍स देना होगा। क्‍योंकि अब टैक्‍स इनके टैक्‍स स्‍लैब के आधार लगेगा। इन निवेशकों को मेरा सीधा जवाब है कि आप किसी भी सूरत में गलत कर रहे हैं। डीडीटी हो या न हो। किसी को भी मतलब किसी को भी म्‍युचुअल फंड के डिवीडेंड प्‍लान में निवेश नहीं करना चाहिए। टैक्‍स के बारे में शिकायत करने के बजाए आप डिवीडेंड प्‍लान में अपना निवेश भुनाएं और ग्रोथ प्‍लान में शिफ्ट कर दें।

जो लोग मेरा कॉलम पढ़ते रहे हैं उसके लिए यह कोई नई बात नहीं है। डिक्‍शनरी में डिवीडेंड का मतलब है कि कंपनी अपने शेयर धारकों को मुनाफे से या रिजर्व से नियमित तौर पर कुछ रकम का भुगतान करती है। यही रकम डिवीडेंड है। इन्‍वेस्‍टोपीडिया में कहा गया है कि डिवीडेंड कंपनी की कमाई के एक हिस्‍से का वितरण है। डिवीडेंड की परिभाषा में एक ही बात कही गई है। जब कंपनी मुनाफा कमाती है तो उसका एक हिस्‍सा वापस बिजनेस में लगा देती है और बाकी हिस्‍सा शेयरधारकों में डिवीडेंड के तौर पर वितरित कर देती है। निश्चित तौर पर इस मामले में कंपनी के मैनेजमेंट के पास यह तय करने का अधिकार है कि उसे कितना डिवीडेंड देना है या देना भी या नहीं देना है। बहुत सी कंपनियां हैं जो बहुत कम डिवीडेंड देती है और बहुत से कारणों की वजह से डिवीडेंड देती ही नहीं है।
म्‍युचुअल फंड में ऐसा कुछ भी नहीं है। म्‍युचुअल फंड में मैनेजमेंट खर्च को छोड़ कर सारा मुनाफा निवेशक का होता है। मैनेजमेंट खर्च 3 फीसदी तक हो सकता है।
आपके पास रकम विद्ड्रॉअल के तौर पर आ रही है डिवीडेंड के तौर पर। इसमें कोई अंतर नहीं है। अंतर सिर्फ इस बात का है कि इस पर टैक्‍स कैसे लग रहा है। अगर म्‍युचुअल फंड के डिवीडेंड प्‍लान में आपके निवेश की वैल्‍यू 1 लाख रुपए है और आपको 5,000 रुपए डिवीडेंड मिलता है। अगर इस पर टैक्‍स न जोड़े तो आपके निवेश की कीमत घट कर 95,000 रुपए रह जाएगी। कुल मिला कर एक तरह से यह अपनी रकम निकालना है। यह डिवीडेंड कंपनी के डिवीडेंड जैसा नहीं है।
आपको डिवीडेंड प्‍लान में निवेश करना है या नहीं करना है इसका फैसला सिर्फ इस पर लगने वाले टैक्‍स के आधार पर होना चाहिए। और टैक्‍स के आधार पर आपको बजट से पहले भी ग्रोथ प्‍लान में निवेश करना चाहिए और बजट के बाद भी। अगर आपको अपने म्‍युचुअल फंड निवेश से नियमित इनकम चाहिए तो आप अपनी जरूरत भर की रकम नियमित तौर पर निकालते रहें। अगर आप ऐसा करेंगे तो आपको उतनी ही राशि के लिए कम टैक्‍स देना होगा। क्‍योंकि म्‍युचुअल फंड से रकम निकालने पर यह कैपिटल गेन्‍स टैक्‍स के दायरे में आएगी न कि इनकम टैक्‍स के।

आम बजट 2020 में हुए बदलाव को भूल जाइये। डिवीडेंड प्‍लान चुनने का एक ही मतलब है कि आपको जितना टैक्‍स चुकाना चाहिए आप उससे ज्‍यादा टैक्‍स चुकाना चाहते हैं। ऐसा न करें।

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