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आज़ादी और पैसा

वित्‍तीय आजादी हासिल करना मुश्किल है लेकिन ऐसा तभी है जब आप इसे ऐसा बनाते हैं

वित्‍तीय आजादी हासिल करना मुश्किल है लेकिन ऐसा तभी है जब आप इसे ऐसा बनाते हैं

आज़ादी के 75वें साल में हर तरफ आज़ादी का खुमार है, ऐसे में मेरा भी मन किया कि मुझे भी इसी थीम पर, यानि फाइनें‍शियल फ्रीडम या वित्‍तीय आज़ादी पर बात करनी चाहिए, क्‍योंकि आज़ादी और पर्सनल फाइनेंस के बीच बड़ा गहरा रिश्‍ता है।

वित्‍तीय आजादी हासिल करना हम सबके लिए एक अहम गोल है, और ऐसा समझना एकदम सही भी है। क्‍योंकि वित्‍तीय आजादी का न होना हर किसी के लिए बड़ी परेशानी का सबब होता है। हर तरह की आजादी की तरह ही, वित्‍तीय आजादी को लेकर जागरूकता तभी पैदा होती है, जब इसका अभाव होता है। यानि वित्‍तीय दासता वो है जिसे महसूस किया जाता है मगर वित्‍तीय आजादी इससे अलग है।

आज़ादी कई तरीके की हो सकती है जैसे कि राजनीतिक आजादी, या फिर खराब सेहत से आज़ादी, इसी तरह, वित्‍तीय आजादी के भी कई स्‍तर हैं। ...और इसका सबसे ऊंचा दर्जा वो है, जब आपको अपनी बाकी जिंदगी, कमाने के लिए कुछ न करना पड़े। इस दर्जे को हासिल करने के लिए हममें से ज़्यादातर लोगों को अपनी पूरी ज़िंदगी खपानी पड़ती है सिवाय उन चंद लोगों के जो जिन्हें विरासत में प्रॉपर्टी मिलती है या फिर वो, जिन्हें हम जैसे टैक्सपेयर के पैसों से कोई पेंशन या सामाजिक सुरक्षा हासिल हो जाती है।

चीनी वायरस के कहर के बीच, एक अच्‍छी बात भी उभर कर सामने आई। वो ये कि, इस मुश्किल दौर में, बहुत से लोगों ने ये एहसास किया कि, थोड़ी सी भी वित्‍तीय आजादी हो तो, ये बड़े काम आती है। अप्रैल 2002 के बाद, बड़े पैमाने पर लोगों ने नौकरी और काम-धंधे को ले कर काफ़ी मुश्किलों का सामना किया। जिन लोगों ने करियर की शुरूआत में ही बचत शुरू कर दी थी, वे दिमागी तौर पर थोड़ा कम परेशान रहे। ...और जिन लोगों ने बचत और निवेश को लेकर बुनियादी बातों पर अमल किया था, उन्‍होंने इस दौर का सामना बेहतर तरीके से किया। यहां बेसिक से मेरा मतलब है, जरूरतें पूरी करने लायक - हेल्‍थ-कवर, टर्म-इन्‍श्‍योरेंस-कवर... आसानी से दी जाने वाली ईएमआई, और एक या दो साल के खर्च के लिए जरूरी रकम को बचाकर रखना जैसी बातें। जिन लोगों ने अपने लिए कम से कम इतना किया है वो जीवन में किसी भी परेशानी का सामना कर सकते हैं। चाहे वह वायरस हो या रोज़गार की कोई समस्‍या हो या फिर किसी और तरह की मुश्किल ही क्यों न हो।

आपके पास अच्‍छी बचत हो इसके लिए पहला कदम है कि, आप बचत करें। और दूसरा कदम है, कि आपकी बचत जरूरतों को पूरी करने में सक्षम हों। हम लोगों में से बहुत से लोग, कमाने के बाद कई साल बाद तक भी बचत शुरू ही नहीं करते हैं। ...और खाओ-पिओ - मौज करो, के इस दौर में वित्‍तीय आज़ादी के लिए बचत शुरू करना आसान भी नहीं है। लेकिन अगर वित्‍तीय आजादी आपका गोल है, तो आपके पास, इसके अलावा कोई और रास्‍ता भी नहीं है। इसके लिए जितनी जल्दी हो सके, आपको बचत शुरू करनी ही होगी और ये बचत, आपकी जरूरतों के हिसाब से होनी चाहिए।

जब आप वित्‍तीय आजादी की ओर कदम बढ़ाते हैं, तो इसका एक नकारात्‍मक पहलू भी है। नहीं, मैं ये बिल्कुल नहीं कह रहा हूं कि वित्‍तीय आजादी में कुछ भी खराब है, मैं यहां ये कह रहा हूं, कि वित्‍तीय आजादी के इस सफ़र में कुछ ऐसे काम हैं, जो आपको नहीं करने हैं और ये बातें उन बातों से ज्‍यादा अहम हैं जो आपको करनी हैं।

आपको क्‍या करना है, और क्या नहीं, इसकी एक लंबी लिस्ट है - हालांकि इसे किसी खास ऑर्डर में मैंने तैयार नहीं किया है... और ये लिस्ट कुछ इस तरह है -

-शार्ट टर्म इक्विटी ट्रेडिंग
-उधार लेकर निवेश करना
-टर्म प्‍लान के अलावा कोई और लाइफ इन्‍श्‍योरेंस खरीदना
-बिटकॉइन और क्रिप्‍टो से जुड़ी कोई भी चीज़ खरीदना
-नए फंड या नए इक्विटी शेयर इश्‍यू में निवेश
-म्‍युचुअल फंड और इक्विटी प्रोडक्‍ट के अलावा किसी और चीज में निवेश
-बाजार में तेजी है इसलिए इक्विटी या इक्विटी फंड में निवेश करना
-बाजार गिर रहा है इसलिए निवेश बेचना
-केवल अग्रेसिव असेट जैसे कि इक्विटी में ही निवेश करना
-अग्रेसिव असेट जैसे इक्विटी में बिल्कुल भी निवेश न करना

कुछ लोगों को महसूस होगा कि हां ऐसा तो होना ही चाहिए, और कुछ लोगों के लिए ये बातें चौंकाने वाली हो सकती हैं। इन सभी बातों को जानने का तब तक कोई खास मतलब नहीं है, जब तक आप इसे अपना नहीं लेते और जीवन भर इस पर अमल नहीं करते। अगर आप कम उम्र में बचत करना शुरू कर देते हैं तो वित्‍तीय आजादी का गोल, ज़रा आसानी या ज़रा-मुश्किल से आप हासिल कर सकते हैं, लेकिन आपको इसे हासिल करना है या नहीं, इसका फैसला तो आपको ही करना है।

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