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भविष्‍य के बारे में अनुमान को लेकर एक ही बात तय है कि यह सच साबित नहीं होगा


भविष्‍य के बारे में अनुमान को लेकर एक ही बात तय है कि यह सच साबित नहीं होगा

“अमेरिका सप्लाई चेन बाधाओं और तमाम चीजों की किल्लत का सामना कर रहा है”। “जिपर्स से लेकर ग्लास तक अमेरिका की अर्थव्यवस्था बुनियादी जरूरतों से जुड़े सामान की कमी से जूझ रहा है”। “ऐसा लग रहा है कि अमेरिका में सभी चीजों की किल्लत पैदा हो गई है”।

पिछले कुछ सप्ताह के दौरान आपने इस तरह की खबरें पढ़ी होंगी। अगर आप इन खबरों पर गौर करें तो पता चलेगा कि खरीदार घरेलू जरूरतों की चीजें एक स्टोर से दूसरे स्टोर तक तलाश रहे हैं। ई कॉमर्स साइट पर जो चीजें एक दिन की शिपिंग पर उपलब्ध थीं अब उनके लिए वेटिंग पीरियड एक सप्ताह या उससे अधिक हो गया है। ये सब चीजें सुन कर आपको भारत में 1970 के दशक का दौर याद आ जाता है।
निश्चित तौर पर पूरी दुनिया में चीजों की कमी देखी जा रही है खास कर सेमीकंडक्टर्स की। लेकिन अमेरिका में जिस तरह से चीजों की किल्लत है वैसा कहीं नहीं है। अब सवाल है क्या हुआ है ? इस समस्या का स्रोत कहां है ? इसका जवाब है काम करने में कुशलता। इस समस्या की जड़ है कार्यकुशलता। क्या यह आपको चौंकाता है। क्षमता या कार्यकुशलता न सिर्फ एक समस्या है बल्कि यह आपके पर्सनल फाइनेंस के मामलों में भी एक समस्या हो सकती है। मुझे इस बात को और स्पष्ट करने दीजिए।

क्षमता या कार्यकुशलता क्या है ? आम तौर पर इसका मतलब है कि कम से कम लागत के साथ अधिकतम उत्पादन हासिल किया जाए। यह सुनने में काफी अच्छा लगता है। हालांकि कोविड ने कार्यकुशलता के नकारात्मक पहलू को उजागर किया है। ऐसा इसलिए है क्योंकि कार्यकुश्ाल होने का मतलब है कि अब और क्षमता नहीं बची है और आप पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। पिछले 18 माह में हमने अक्षमता की कीमत जानी है। इस महामारी के दौर में अक्षम बहुत ज्यादा सक्षम लोगों की तुलना में ज्यादा बेहतर तरीके से सामने आ रहे हैं। हम अक्षमता को एक नकरात्मक चीज के तौर देखने इतने आदी हो चुके हैं कि हम यह सोचते ही नहीं हैं कि बिजनेस या किसी सिस्टम के लिए इसका क्या मतलब है। मुझे याद है कि फरवरी 2020 में, जब वायरस चीन तक ही सीमित था तो मेरे एक दोस्त ने बताया था कि जब भारत में वायरस फैलना शुरू करेगा तो प्राइवेट हास्पिटल में अतिरिक्त आईसीयू बेड बहुत कम होंगे। मेरा दोस्त प्राइवेट हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स के काम करने के तौर तरीकों से परिचित था।

ऐसा क्यों है ? बहुत ज्यादा आईसीयू बेड खाली होनी अक्षमता है ? बेड, रूम, इक्विपमेंट और लोगों पर किया गया निवेश राजस्व नहीं हासिल कर रहा है। बिजनेस के लिहाज से यह निश्चित तौर पर सही है। खाली बेड होना उसी तरह है जैसे फैक्ट्री में कैपेसिटी है लेकिन यह कैपेसिटी कोई उत्पादन नहीं कर रही है। अगर आप एक कंपनी में निवेशक हैं जो हास्पिटल चलाती है तो वित्तीय तौर पर आपके हित में होगा कि खाली आईसीयू बेड कम से कम हों। जब महामारी फैल जाए तो क्या होगा ? हालांकि यह यह उदाहरण भयावह स्थिति को दिखाता है। बहुत सी कंपनियां इस तरह से चलाए जा रहे हैं कि राजस्व या सप्लाई चेन में छोटी सी बाधा को भी सहन करना मुश्किल है। लागत, मार्जिन, डेट सब कुछ इस तरह से सटीक है कि ये कोई भी झटका बदार्श्त नहीं कर सकते।

दुर्भाग्य से बहुत से इंडीविजुअल्स इसी तरह के हालात में हैं। बहुत से लोग हैं जिनकी पूरी इनकम खर्च और ईएमआई में चली जाती है। उनके पास कुछ नहीं बचता है। ऐसे में इनकम में थोड़ी सी भी बाधा या अप्रत्याशित तौर पर बड़ा खर्च आने पर उनका पूरा पर्सनल फाइनेंस तहस नहस हो जाता है। मैं यहां किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप नहीं लगा रहा हूं। बहुत से लोगों के पास इससे बेहतर करने की गुंजाइश ही नहीं है।
हालांकि, बचत करने वाले बहुत से लोग क्षमता के इस मंत्र को अपने निवेश और भविष्य की वित्तीय जरूरतों को लेकर अनुमान में भी लागू करते हैं। मैंने देखा है कि बहुत से लोग ऑनलाइन कैलकुलेटर्स पर जाते हैं और यह डालते हैं कि उनको कितनी रकम की जरूरत है और इसके लिए कितना निवेश करना होगा। बचत करने वाला एक व्यक्ति एंटर करता है कि उसे 10 साल में 1 करोड़ रुपए की रकम बनानी है और कैलकुलेटर बताता है कि इसके लिए उसको 44,500 रुपए बचाने की जरूरत है। आम तौर पर इस तरह के कैलकुलेटर्स रिटर्न को लेकर बहुत ज्यादा आशावादी होते हैं। आपकी जरूरतें बदल सकतीं हैं कुछ बहुत बुरा हो सकता है। एक माह में 44,500 रुपए बहुत सक्षम अनुमान हैं। लेकिन यह बहुत खतरनाक तरह की कार्यकुशलता है।

सिर्फ एक स्प्रेडशीट एक सटीक नंबर दिखा रही है तो इसका कोई मतलब नहीं है। भविष्य अनिश्चित है और यह हमेशा ऐसा ही रहेगा। अगर महामारी बचत करने वालों को इतना भी सिखाती है तो इसका कुछ अच्छा नतीजा सामने आएगा।

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