
अगर कोई लंबे समय से निवेश कर रहा है तो यह आम बात है कि उसके पोर्टफ़ोलियो में बहुत सारे फ़ंड हो जाएं। डायवर्सीफिकेशन अच्छी चीज है लेकिन इसे ज़रूरत से ज़्यादा न करें। इसके अपने नुक़सान हैं। यह पोर्टफ़ोलियो के प्रदर्शन को कमजोर करेगा और आपके लिए अपने निवेश को ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में, हम चार-पांच से अधिक फ़ंड में निवेश की सलाह नहीं देते हैं, क्योंकि इनको मैनेज करना आसान है। इसके बारे में ज़्यादा जानने के लिए आप डायवर्सीफिकेशन पर हमारी और स्टोरी चेक कर सकते हैं।
अगर निवेशक के पास ब्रॉड पोर्टफ़ोलियो हैं जिसमें तमाम फ़ंड में अलॉकेशन कम है, तो कुल रिटर्न पर इसका ख़ास असर नहीं पड़ेगा। अगर फ़ंड अच्छा प्रदर्शन भी करता है, तो यह मायने नहीं रखता है। मान लेत हैं आपने ₹1 लाख 20 फ़ंड में बराबर- बराबर बांट कर निवेश किए हैं। इस तरह से प्रत्येक फ़ंड को सिर्फ ₹ 5,000 अलॉट होगा। अब, अगर कोई खास फ़ंड अच्छा प्रदर्शन नहीं करता है या कुछ गलत हो जाता है, तो आप ज्यादा चिंता नहीं करेंगे। यह बात हमारे दिमाग में रहती है कि फ़ंड में एलोकेशन सिर्फ 5% है। हम उनको यह मानकर नज़रअंदाज करते हैं कि ये नुक़सान हमको ज़्यादा चुभेगा नहीं। लेकिन अगर अगर ₹1लाख को सिर्फ चार फ़ंड में निवेश किया जाए तो एलोकेशन 25% होगा और आप प्रयास करके इसे मॉनिटर करेंगे। अगर प्रदर्शन अच्छी नहीं होगा तो ज़रूर आप ज़रूरी कदम उठाएंगे। ऐसे में बेहतर है कि अच्छा प्रदर्शन करने वाले फ़ंड के लिए एलोकेशन बढ़ाया जाए। हम, यहां कुछ स्टेप बता रहे हैं जिससे आप अपने पोर्टफ़ोलियो का पुनर्गठन कर सकते हैं।
· 1. ऐसे फ़ंड बेच दें जिनका दायरा बहुत छोटा हो जैसे सेक्टरोल फ़ंड या थीमेटिक फ़ंड। ये फ़ंड बहुत थोड़ा मकसद पूरा करते हैं और इन पर दांव लगाना जोखिम भरा है।
· 2.राब प्रदर्शन कर रहे फ़ंड को अलग करें। हम इनके हिस्टोरिकल रिटर्न को देख सकते हैं और अगर इनका प्रदर्शन खराब रहा है तो इनको हटा सकते हैं।
· 3.सिर्फ 4-5 फ़ंड पर फोकस करें और जिनका इन्वेस्टमेंट मैंडेट व्यापक हो।
एक बार बदलाव को लेकर स्पष्ट हो जाने के बाद, हम गोल की तरफ बढ़ने के लिए समय ले सकते हैं। इसे एक दिन में करने की ज़रूरत नहीं है। इसे कई फाइनेंशियल ईयर में कर सकते हैं जिससे आप टैक्स हार्वेस्टिंग का फ़ायदा उठा सकें। अगर एक फाइनेंशियल ईयर में आपका गेन ₹1 लाख है तो आप अपना निवेश बेच कर मुनाफा निकान सकते हैं और फिर टैक्स देनदारी के बिना वापस इसे निवेश कर सकते हैं।
टैक्स की परवाह किए बिना आगे बढ़ें
टैक्स से बचने के लिए, हम खराब प्रदर्शन कर रहे फ़ंड बनाए नहीं रख सकते हैं। हालांकि, हम टैक्स घटाते हैं, कभी कभी लंबी अवधि के फ़ायदों के लिए एक बार कैपिटल गेन्स टैक्स देना बेहतर रहता है। अगर हम अच्छा प्रदर्शन कर रहे ओर खराब प्रदर्शन कर रहे फ़ंड के बीच रिटर्न के अंतर की बात करें तो यह काफ़ी अधिक हो सकता है। एक औसत फ्लेक्सी-कैप फ़ंड का 10 साल का रिटर्न (CAGR) 14.5% से थोड़ा अधिक आता है, वहीं सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले फ़ंड का रिटर्न लगभग 11% है। खराब प्रदर्शन भी एक लागत है और निवेश के लंबे वर्षों में यह आपकी कुल वेल्थ को प्रभावित करेगा। ऐसे में टैक्स की चिंता करने के बजाए बेहतर है कि बदलाव करें।
करेक्शन में बेचें फ़ंड
जब मार्केट करेक्शन के फेज में हो उस समय इस तरह के बदलाव करना कम खलता है। मार्केट में गिरावट से कुछ मुनाफ़ा गायब हो जाता है और ऐसे में खराब प्रदर्शन करने वाले फंड को बेचने की लागत कम हो जाती है। कैपिटल गेन्स टैक्स से परहेज करना संभव नहीं है। कभी न कभी आपको यह चुकाना ही है। ऐसे में इससे भागने का कोई मतलब नहीं। इसका यह भी मतलब नहीं है कि आप बिना सोचे समझे कैपिटल गेन्स टैक्स चुकाएं। अगर आपके पास फ़ंड बेचने की सही वजह है, तो आपको पीछे नहीं हटना चाहिए।
ये लेख पहली बार जून 03, 2022 को पब्लिश हुआ.



