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फ़िक्स्ड मैच्‍योरिटी प्‍लान: कितने काम का?

कई नए फ़िक्स्ड मैच्‍योरिटी प्‍लान शुरु होने वाले हैं? आख़िर इसकी वजह क्या है और क्या ये आपके मतलब के हैं?

कई नए फ़िक्स्ड मैच्‍योरिटी प्‍लान शुरु होने वाले हैं? आख़िर इसकी वजह क्या है और क्या ये आपके मतलब के हैं?


पिछले कुछ हफ़्तों के दौरान, एक छोटे से अर्से में बहुत से फ़ंड हाउस फ़िक्स्ड मेच्योरिटी प्लान या FMP की शुरुआत की है या शुरु करने की प्रक्रिया में हैं. इनमें आदित्‍य बिड़ला सन लाइफ़ म्‍यूचुअल फ़ंड, HDFC म्‍यूचुअल फ़ंड, ICICI प्रूडें‍शियल म्‍यूचुअल फ़ंड, कोटक म्‍यूचुअल फ़ंड, SBI म्‍यूचुअल फ़ंड, निप्‍पॉन इंडिया म्‍यूचुअल फ़ंड, एक्सिस म्‍यूचुअल फ़ंड और IIFL म्‍यूचुअल फ़ंड की अर्ज़ियां सेबी के पास हैं.
मौजूदा वित्‍त-वर्ष ख़त्म होने को है और जल्दी ही कई FMP,निवेशकों के लिए खुल जाएंगे.
 
क्या हैं FMP?
FMPया फ़िक्स्ड मैच्‍योरिटी प्‍लान एक तयशुदा समय की म्‍यूचुअल फ़ंड स्‍कीम है. ये स्‍कीम अपना पैसा डेट में निवेश करती है. निवेश FMPअपना निवेश उन्‍हीं इन्‍वेस्‍टमेंट में करते हैं जिनसे उनकी अवधि मेल खाती है।  अपने स्वभाव में ये क्‍लोज़्ड एंड (closed send) वाला निवेश माना जाता है. एक FMP की अवधि कुछ महीने से लेकर कुछ साल तक की हो सकती है.
 
अचानक इतने नए FMP क्‍यों?
पिछले कुछ महीनों में डेट सिक्‍योरिटीज़ का मुनाफ़ा बढ़ना इसकी एक वजह हो सकता है. महंगाई पर अंकुश लगाने के लिए रिज़र्व बैंक ने ब्‍याज दरों में इज़ाफ़ा किया है. इसीलिए डेट सिक्‍योरिटीज़ का मुनाफ़ा या yield बढ़ी है. म्‍यूचुअल फ़ंड्स ने नवंबर और दिसंबर में FMP से ₹3,703 और ₹1,532 करोड़ जुटाए हैं.

मार्केट के एक्सपर्ट इसकी एक वजह और बताते हैं, उनके मुताबिक़ फ़ंड हाउस, FMP में निवेश करने वाले निवेशकों को अपने साथ बनाए रखना चाहते हैं. आमतौर पर ये फ़ंड 3 साल से ज़्यादा समय के लिए होते हैं, ताकि निवेशकों को इंडेक्‍सेशन (indexation) के फ़ायदे मिल सकें. इन स्‍कीमों से मिलने वाले रिटर्न का अनुमान भी आसानी से लगाया जा सकता है.

हालांकि कुछ ऐसी स्कीमें भी लॉन्च की गई हैं जो 3 महीने से 1 साल के लिए हैं. इसका मक़सद, डेट सिक्‍योरिटीज़ पर ऊंची ब्याज दर से फ़ायदा पाना है. इंडस्‍ट्री के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा समय में बढ़ी हुई यील्‍ड के साथ 3 महीने में मैच्‍योर हो रही डेट सिक्‍योरिटीज़ तक़रीबन 7.60% की यील्‍ड दे रही हैं. वहीं 6 महीने के पेपर तक़रीबन 7.60% यील्‍ड दे रहे हैं.

एक सीनियर फ़ंड मैनेजर के मुताबिक़, “कम अवधि के नज़रिए से FMP लिक्विड फ़ंड या शॉर्ट ड्यूरेशन फ़ंड की तुलना में आकर्षक लगते हैं. FMP में यील्‍ड ज़्यादा है और आप ब्‍याज दरों को लॉक-इन कर सकते हैं क्‍योंकि हम आने वाले महीनों में ब्‍याज दरों में कटौती का दौर देख सकते हैं.” 

कुछ साल पहले FMP डेट फ़ंड की सबसे अहम कैटेगरी में से थे. लेकिन DHFL के डिफ़ॉल्‍ट और एस्‍सेल ग्रुप के लोन शेयर के मामले, इंडस्‍ट्री में FMP की गिरावट की वजह बने.

लेकिन फिर जल्‍द ही इंडस्‍ट्री को FMP का एक और विकल्‍प मिल गया. ये विकल्प था टारगेट मैच्‍योरिटी फ़ंड.
FMP की तरह टारगेट मैच्‍योरिटी फ़ंड भी स्‍कीम की अवधि के हिसाब से निवेश करते हैं. ये अपने स्वभाव में ओपन एंड के फ़ंड हैं और इनमें निवेशक, स्‍कीम के मैच्‍योर होने से पहले निवेश बेच कर बाहर हो है.
FMP क्‍लोज़्ड एंड थे इसलिए निवेशकों के लिए इन स्‍कीमों से निकलना मुश्किल था. हालांकि ये एक्‍सचेंजों पर लिस्‍टिड थे मगर इनके साथ लिक्विडिटी की दिक़्क़त रहती थी.

 
आपको क्या करना चाहिए?
वैसे तो FMP की ऊंची यील्‍ड अब भी उनको आकर्षक बना रही है, लेकिन निवेशकों को अब भी टारगेट मैच्‍यौरिटी फ़ंड को प्राथमिकता देनी चाहिए. क्‍यों? क्योंकि टारगेट मैच्‍योरिटी फ़ंड लिक्विड हैं. निवेशक ज़रूरत पड़ने पर अपना पैसा जल्दी निकाल सकते हैं जबकि FMP में हमेशा ऐसा नहीं हो सकता.

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