स्टॉक वायर

जब फ़ंडामेंटल अलग कहानी बयान करते हैं

यहां बात कुछ ऐसी कंपनियों की, जिनके स्टॉक की क़ीमतें उनकी ग्रोथ से मेल नहीं खातीं

यहां बात कुछ ऐसी कंपनियों की, जिनके स्टॉक की क़ीमतें उनकी ग्रोथ से मेल नहीं खातीं


Fundamentals: हम यहां बात कर रहे हैं कि मार्केट की चाल कैसे तय होनी चाहिए. तो इसका जवाब है; कोई बिज़नस लगातार अच्छा प्रदर्शन करता है. वो फंडामेंटल के लिहाज़ से मजबूत है. लोग इस पर ध्यान देते हैं और उसके स्टॉक ख़रीदना चाहते हैं. इससे डिमांड पैदा होती है, और इस तरह स्टॉक की कीमतें ऊपर चढ़ती हैं.

हम चाहते हैं कि स्टॉक की वैल्यू इस हिसाब से बदले. लेकिन क्या ऐसा होता है?

सभी बातों को ध्यान में रखें, तो बाज़ारों को लोग चलाते हैं, और लोग भावुक होते हैं. अगर आप एक दमदार कहानी गढ़ते हैं, तो आप लोगों को किसी भी बात का भरोसा आसानी से दिला सकते हैं.

इसलिए, बाज़ारों के अस्तित्व में आने के बाद से ही हम देखते रहे हैं कि बेहद ज़्यादा प्रचार, कमाई के उम्मीदों से भरे अनुमानों और कभी-कभार तो मूर्खता से भरी बातों के चलते स्टॉक की क़ीमतें बढ़ जाती हैं. और, फ़ंडामेंटल्स और परफ़ॉर्मेंस को दरकिनार हो जाते हैं.

हमने ऐसी कंपनियों के नमूने खोजने के लिए एक सामान्य सा अभ्यास किया है, जिनके फ़ंडामेंटल्स स्टॉक की क़ीमत से मेल नहीं खाते हैं. हमने बीते पांच साल के दौरान औसत से कमज़ोर फ़ाइनेंशियल ग्रोथ वाली, लेकिन स्टॉक मार्केट में शानदार परफ़ॉर्मेंस करने वाली कंपनियों पर ग़ौर किया.

इस काम के लिए, हम अपने स्टॉक स्क्रीनर पर गए और नीचे दिए फ़िल्टर्स को लगायाः

1. ₹1,000 करोड़ से ज़्यादा मार्केट कैप

2. 5 साल का औसत ROE 10 फ़ीसदी से कम

3. 5 साल का औसत ROCE 10 फ़ीसदी से कम

4. 5 साल की औसत रेवेन्यू ग्रोथ 10 फ़ीसदी से कम

5. 5 साल में स्टॉक का औसत रिटर्न 20 फ़ीसदी से ज़्यादा

हमने क्या पाया?
किन वजहों से इन कंपनियों के शेयरों में तेज़ी आई, इस पर बहस हो सकती है. लेकिन ऐसा उनके परफ़ॉर्मेंस की वजह से तो नहीं हुआ.
कुल मिलाकर, धनक की राय में फंडामेंटल्स में मजबूती नहीं होने के बावजूद अगर किसी स्टॉक में तेजी दिख रही है तो लॉन्ग टर्म इन्वेस्टर्स को उनसे दूर ही रहना चाहिए या फिर बेहद ज़्यादा सतर्कता बरतनी चाहिए.

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