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SEBI के निशाने पर फ़िनफ़्लुएंसर

Finfluencers: मार्केट रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी करके फ़िनफ़्लुएंसरों पर शिकंजा कसने के संकेत दिए

Finfluencers: मार्केट रेगुलेटर ने एक कंसल्टेशन पेपर जारी करके फ़िनफ़्लुएंसरों पर शिकंजा कसने के संकेत दिए

इक्विटी मार्केट में भारी भरकम रिटर्न के दावे करने वाले फ़ाइनेंशियल इंफ़्लुएंसर अब मार्केट रेगुलेटर सिक्योरिटीज़ एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ़ इंडिया (SEBI) के निशाने पर आ गए हैं. SEBI ने इन पर कार्रवाई के लिए एक कंसल्टेशन पेपर जारी किया है. इन फ़ाइनेंशियल इंफ़्लुएंसरों को फ़िनफ़्लुएंसर्स (finfluencers) के रूप में भी जाना जाता है.

फ़िनफ्लुएंसर आमतौर पर फ़ाइनेंस से जुड़े विभिन्न विषयों पर सलाह और जानकारियां उपलब्ध कराने के लिए इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और X (पूर्व में ट्विटर) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म का इस्तेमाल करते हैं. हाल के महीनों में वे अपने फ़ॉलोअर के बीच भारी प्रभाव और गुमराह करने के संभावित दुष्परिणामों के लिए SEBI की जांच के दायरे में आ गए हैं.

SEBI द्वारा निर्धारित कुछ प्रस्तावित क़दम इस प्रकार हैं:

  • फ़िनफ़्लुएंसर्स को अपना SEBI रजिस्ट्रेशन डिटेल प्रदर्शित करनी होगी.
  • SEBI रजिस्टर्ड संस्थाओं और गैर रजिस्टर्ड फ़िनफ़्लुएंसर्स के बीच किसी भी प्रकार के जुड़ाव को रोकना.
  • गैर रजिस्टर्ड फ़िनफ़्लुएंसर्स को रेफरल-आधारित कमीशन का भुगतान रोकना.
  • रजिस्टर्ड संस्थाओं को अपने नाम का उपयोग करने वाली किसी भी गैर रजिस्टर्ड इकाई से ख़ुद को अलग करने के लिए सक्रिय उपाय करने चाहिए.

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गैर रजिस्टर्ड फ़िनफ़्लुएंसर्स से जुड़ी समस्या
SEBI की चिंता इस फ़ैक्ट से जुड़ी है कि इनमें से कई फ़िनफ़्लुएंसर्स रजिस्टर्ड या रेगुलेटेड नहीं हैं, फिर भी वे अपने फ़ॉलोअर्स के वित्तीय फ़ैसलों पर ख़ासा असर डालते हैं.

कंसल्टेंशन पेपर में कहा गया है कि भले ही कुछ फ़िनफ़्लुएंसर्स हकीकत में फ़ाइनेंशियल एजुकेटर हों, लेकिन उनमें से कई रजिस्टर्ड नहीं हैं और अनधिकृत रूप से इन्वेस्टमेंट एडवाइज़र या रिसर्च एनालिस्ट के रूप में काम करते हैं.

ये अनरेगुलेटेड फ़िनफ़्लुएंसर्स भ्रामक हो सकते हैं और उन्हें कुछ फ़ाइनेंशियल प्रोडक्ट्स या सर्विस को बढ़ावा देने के लिए अघोषित रूप से कम्पंसेशन मिलता होगा. इससे संभावित रूप से उनके फ़ॉलोअर्स का पैसा ख़तरे में पड़ सकता है.

बिज़नस मॉडल
फ़िनफ़्लुएंसर आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आकर्षक सामग्री के जरिये फ़ॉलोअर्स को आकर्षित करते हैं. SEBI के पेपर में कहा गया है कि ये फ़िनफ़्लुएंसर कई तरीक़ों से कमाई कर सकते हैं, जिसमें रेफरल फीस, गैर-नकद लाभ, या उन प्लेटफार्मों से सीधे कम्पंसेशन शामिल है जहां वे अपना कंटेंट साझा करते हैं.

SEBI को चिंता है कि रजिस्टर्ड संस्थाएं अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज को बढ़ावा देने के लिए इन अनरेगुलेटेड फ़िनफ़्लुएंसर्स का फ़ायदा उठा सकती हैं.

आगे क्या?
इस कंसल्टेशन पेपर को जारी करके, SEBI ने फ़ाइनेंशियल इंफ़्लुएंसर्स के तेजी से बढ़ते क्षेत्र में पारदर्शिता और जवाबदेही लाने की दिशा में एक शुरुआती कदम उठाया है.

पब्लिक से इन प्रस्तावों पर प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं, और इस कंसल्टेशन के प्रोसेस के बाद बनने वाले नियमों को देखना दिलचस्प होगा.

इस कदम का उद्देश्य निवेशकों के हितों की रक्षा करना और फ़िनफ़्लुएंसर्स द्वारा दी गई फ़ाइनेंशियल एडवाइज की नैतिक प्रमाणिकता या ईमानदारी सुनिश्चित करना है.

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