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AMCs से दो हाई-प्रोफ़ाइल एग्ज़िट: क्या आपको चिंता करनी चाहिए?

कोटक म्यूचुअल फ़ंड के पंकज टिबरेवाल और फ़्रैंकलिन टेंपलटन के आनंद राधाकृष्णन का इस्तीफ़ा

कोटक म्यूचुअल फ़ंड के पंकज टिबरेवाल और फ़्रैंकलिन टेंपलटन के आनंद राधाकृष्णन का इस्तीफ़ा

कोटक और फ़्रैंकलिन टेंपलटन बदलाव के दौर से गुज़र रही हैं. क़रीब 14 साल तक कोटक स्मॉल कैप फ़ंड और कोटक इमर्जिंग इक्विटी फ़ंड की अगुआई करने के बाद, पंकज टिबरेवाल ने आगे बढ़ने का फ़ैसला किया है. फ़्रैंकलिन टेंपलटन में, इमर्जिंग मार्केट इक्विटीज़ - इंडिया के CIO आनंद राधाकृष्णन ने भी पद छोड़ दिया है. वो लंबे समय तक फ़्रैंकलिन इंडिया फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के फ़ंड मैनेजर रहे. उनकी जगह आर जानकीरमन ने नए CIO का पद संभाला है. ये भले ही बड़े घटनाक्रम हों, लेकिन हम मानते हैं कि AMCs से इन बड़े लोगों का जाना चिंता की बड़ी वजह नहीं है. कम-से-कम अभी के लिए तो ऐसा ही है. लेकिन इससे पहले कि हम इन पर बात करें, आइए एक बड़े सवाल पर ग़ौर करते हैं - क्या सामान्य तौर पर, फ़ंड मैनेजर के बदलने से फ़ंड के प्रदर्शन में गिरावट दिखाई देती है और क्या ये बड़ी चिंता का विषय होना चाहिए? मैनेजर बदलने का फ़ंड पर असर फ़ंड मैनेजर के बदलने से पड़ने वाले असर का पता करने के लिए, हमने अपनी कवरेज में शामिल इक्विटी कैटेगरी के पिछले 10 साल में होने वाले ऐसे बदलावों की स्टडी की. नए फ़ंड मैनेजर की कम से कम तीन साल की हिस्ट्री जैसी कुछ शर्तों को लागू करने के साथ, 18 AMC और 32 फ़ंड मैनेजरों से जुड़ी 41 स्कीमें हमारे सामने थीं. संबंधित कैटेगरी के एवरेज रिटर्न के साथ इन फ़ंड्स के एग्ज़िट से पहले और बाद के तीन साल के प्रदर्शन की तुलना से एक स्पष्ट नतीजा सामने आता है, जिससे पता चलता है कि आपको फ़ंड मैनेजर बदलने के बारे में ज़्यादा चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है. कुछ ख़ास आंकड़ों पर ग़ौर करें ('हर लहर तूफ़ान नहीं होती' टेबल देखें), तो मोटे तौर पर 58 फ़ीसदी मामलों में प्रदर्शन पर असर नहीं पड़ा. 32 फ़ीसदी मामले ऐसे थे जब बदलाव का होना एक छिपा हुआ वरदान साबित हुआ, जबकि केवल 10 फ़ीसदी मामलों में फ़ंड के प्रदर्शन में गिरावट देखने को मिली. हर लहर तूफान नहीं होती

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