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HDFC Nifty Realty Index Fund NFO: एक समीक्षा जो निवेश के फ़ैसले में मदद करेगी

NFO के डिटेल, इंडेक्स परफ़ॉर्मेंस और आप इसमें निवेश करें या नहीं, इस बारे में बता रहे हैं

NFO के डिटेल, इंडेक्स परफ़ॉर्मेंस और आप इसमें निवेश करें या नहीं, इस बारे में बता रहे हैं

एक दशक की आर्थिक मज़बूती से भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर दोबारा वापसी करता दिख रहा है. इसके लिए ज़िम्मेदार फ़ैक्टर कुछ इस तरह के रहे हैं, जैसे - बढ़ती हुई प्रति व्यक्ति आय, लोगों की बेहतर आर्थिक स्थिति, तेज़ होता शहरीकरण, और सुधार करने की सरकारी पहल, आदि.

इस मौक़े का फ़ायदा उठाने के लिए, HDFC एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) ने एक नया फ़ंड लॉन्च किया है, जो भारत के रियल एस्टेट इंडेक्स (निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स (TRI)) को ट्रैक करेगा.

HDFC निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स फ़ंड, एक पेसिव फ़ंड है और रियल एस्टेट इंडेक्स के प्रदर्शन को दोहराने वाला अपनी तरह का पहला फ़ंड होगा.

ये नया फ़ंड 7 मार्च, 2024 से निवेशकों के लिए खुल गया है और इसके बंद होने की तारीख़ 21 मार्च, 2024 है.

यहां हम कुछ डिटेल दे रहे हैं, जो HDFC निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स फ़ंड के NFO (न्यू फ़ंड ऑफ़र) के बारे में आपके जानने के लिए ज़रूरी है:

एक नज़र में

फ़ंड का नाम HDFC निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स फ़ंड
SBI कैटेगरी इंडेक्स फ़ंड
NFO अवधि 7 मार्च से 21 मार्च 2024
निवेश उद्देश्य ट्रैकिंग एरर को ध्यान में रखते हुए, निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स (TRI) के समान रिटर्न प्राप्त करने के लिए
फ़ंड कहां निवेश करेगा निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स (TRI) में न्यूनतम 95% निवेश
बेंचमार्क निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स (TRI)
फ़ंड मैनेजर निर्माण मोरखिया और अरुण अग्रवाल
एग्ज़िट लोड कोई नहीं
कितना टैक्स लगेगा अगर यूनिट्स एक साल अंदर बेची जाती हैं, तो कैपिटल गेन्स पर 15% टैक्स लगेगा. अगर यूनिट्स एक साल के बाद बेची जाती हैं, तो कैपिटल गेन्स पर 10% टैक्स लगाया जाता है. ₹1 लाख तक का मुनाफ़ा टैक्स फ़्री है.

निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स के बारे में

निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स के बारे में आपको जानना ज़रूरी है क्योंकि ये HDFC फ़ंड, इसी के प्रदर्शन की नकल करेगा. इसको देखते हुए, आइए इंडेक्स के स्ट्रक्चर और परफ़ॉर्मेंस को समझें.

अगस्त 2007 में लॉन्च किए गए इस इंडेक्स में 33 फ़ीसदी वेट (भार) सीमा के साथ निफ़्टी 500 से सिर्फ़ 10 रियल एस्टेट कंपनियों को शामिल करना अनिवार्य है. मतलब, किसी भी कंपनी को इंडेक्स में 33 फ़ीसदी से ज़्यादा हिस्सेदारी हासिल करने की इजाज़त नहीं है.

अभी भी, डीएलएफ़ , मैक्रोटेक डेवलपर्स और गोदरेज प्रॉपर्टीज़ बड़े हिटर हैं, जिनका इंडेक्स में 62 फ़ीसदी हिस्सा है. जैसा कि कहा गया है, संख्याएं हर छह महीने में बदल सकती हैं, क्योंकि हर कंपनी के मौजूदा फ़्री फ़्लोट मार्केट कैपिटलाइज़ेशन को प्रतिबिंबित करने के लिए इंडेक्स को साल में दो बार रिबैलेंस किया जाता है.

प्रदर्शन के मामले में, क़रीब 17 साल पुराना ये इंडेक्स काफ़ी उतार-चढ़ाव वाला रहा है, जिसकी खासियत बड़ी तेज़ी और गिरावट हैं, यही बात नीचे देखी जा सकता है.

जबकि इसका 132 फ़ीसदी का एक साल का प्रदर्शन निफ़्टी 500 TRI के 39.7 फ़ीसदी से कहीं ज़्यादा है, इसका लॉन्ग टर्म परफ़ॉर्मेंस डरावना रहा है. साल 2007 के बाद से 10 साल के मासिक रोलिंग रिटर्न के आधार पर रियल एस्टेट इंडेक्स ने निफ़्टी 50 और 500 को सिर्फ़ 9 फ़ीसदी बार हराया है! उसे अंदर डूबने दो.

फ़ंड मैनेजरों के बारे में

निर्माण मोराखिया और अरुण अग्रवाल संयुक्त रूप से निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स फ़ंड मैनेज करेंगे.

मोराखिया के पास HDFC AMC में अलग अलग एसेट क्लास में पेस्सिव फ़ंड्स मैनेज करने का 14 साल से ज़्यादा का तजुर्बा है, पहले वो मिराए एसेट ग्लोबल इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के साथ काम कर चुके हैं.

इस बीच, अग्रवाल अगस्त 2020 में HDFC AMC में शामिल हो गए. उन्होंने पहले SBI फ़ंड्स मैनेजमेंट, ICICI बैंक और UTI एसेट मैनेजमेंट के साथ काम किया है.

हमारी सलाह

HDFC AMC एक मशहूर फ़ंड हाउस है. लेकिन रियल एस्टेट इंडेक्स, जिन्हें ये फ़ंड कॉपी करने की कोशिश करेगा उसे लेकर हमारी तीन चिंताएं हैं .
1) इंडेक्स में सिर्फ़ 10 कंपनियां हैं. इसमें भवन निर्माण सामग्री और आवास के लिए फ़ाइनेंस जैसे सेक्टरों की फ़र्में शामिल नहीं हैं. दूसरे शब्दों में, इसकी सीमित चौड़ाई इसे बहुत ज़्यादा जोख़िम वाला बनाती हैं.
2) प्रदर्शन बहुत ज़्यादा बदलता रहता है. एक सेक्टर के रूप में रियल एस्टेट स्वाभाविक रूप से साक्लिकल (चक्रीय) है. इंडेक्स भी इससे अलग नहीं है. आप सेक्टर के लॉन्ग टर्म प्रदर्शन की जांच करने के लिए ऊपर स्क्रॉल कर सकते हैं. इससे आपको पूरी कहानी पता चल जाएगी.
3) HDFC निफ़्टी रियल्टी इंडेक्स फ़ंड एक सेक्टोरल फ़ंड है. और हम आमतौर पर सेक्टोरल फ़ंड्स से दूर रहते हैं क्योंकि वे ज़्यादा जोख़िम भरे होते हैं. इस सेक्टर का परफ़ॉर्मेंस भी यही दिखाता है.

आपको क्या करना चाहिए

इनसे बचना चाहिए.

इसके बजाय ज़्यादा डाइवर्सिफ़ाई इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड को चुनना चाहिए. फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड एक डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड की अच्छी मिसाल है. असलियत तो ये है कि इस हाइब्रिड कैटेगरी के कई फ़ंड्स का पहले से ही रियल एस्टेट कंपनियों में निवेश होगा.

ये भी पढ़िए: NFO में निवेश से पहले खुद से पूछें ये 3 सवाल

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