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काफ़ी समय पहले एक दिलचस्प ईमेल आया था. लिखने वाले को चिंता थी कि कोई बड़ी आपदा उनके पोर्टफ़ोलियो को बर्बाद न कर दे. उन्हें मेरी निवेश सलाह का मूल सूत्र पता था - धीरे-धीरे और लंबे समय के लिए निवेश करते रहो. लेकिन उनकी परेशानी यह थी कि अगर कोई वैश्विक मंदी आ जाए या युद्ध छिड़ जाए, तो उनकी सारी दौलत साफ़ हो सकती है. वे जानना चाहते थे कि ऐसे हालात में अपनी रक़म कैसे बचाएं.
यह चिंता बेबुनियाद नहीं है. दुनिया में शायद ही कोई ऐसा हिस्सा हो जो 20वीं सदी में किसी बड़े आर्थिक, राजनीतिक या सामाजिक उथल-पुथल से बचा रहा हो. हम यह मानकर नहीं चल सकते कि हमारी ज़िंदगी बिना किसी ऐसे झटके के गुज़र जाएगी. असल में इस वक़्त दुनिया कई तरफ़ से ख़तरों से घिरी नज़र आती है. नव-साम्राज्यवाद हो, तेल संकट हो या जलवायु परिवर्तन की तबाही - हर तरफ़ कोई न कोई आफ़त मुंह उठाए खड़ी है.
वैसे, 'A Choice of Catastrophes' (विपत्तियों का चुनाव) एक दिलचस्प किताब का नाम है जो Isaac Asimov ने इससे मिलते-जुलते विषय पर लिखी थी.
तो सवाल यह है कि क्या सच में ऐसे हालात में अपनी आर्थिक सेहत को बचाया जा सकता है? इसका ख़ास तरीक़ा है डाइवर्सिफ़िकेशन और समझदारी भरी एसेट एलोकेशन - और यही वो चीज़ है जो हर निवेशक को वैसे भी करनी चाहिए.
डाइवर्सिफ़िकेशन की बुनियादी सोच यह है कि हर तरह का निवेश एक साथ नहीं डूबता. इसलिए अपनी रक़म को अलग-अलग तरह की एसेट्स - शेयर, फ़िक्स्ड इनकम, सोना, रियल एस्टेट, बैंक डिपॉज़िट वगैरह - में लगाएं और अलग-अलग सेक्टर व दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में भी. इसी के साथ जुड़ी है प्रॉफ़िट बुक करने और निवेश को दोबारा बांटने की समझ.
एसेट रिएलोकेशन का मतलब है कि जैसे-जैसे ज़्यादा जोख़िम वाले (और संभवतः ज़्यादा रिटर्न देने वाले) निवेश रिटर्न दिलाता है, उनमें से मुनाफ़ा निकालते रहें और उसे सुरक्षित निवेश में डालते रहें - ताकि कभी भी बहुत ज़्यादा जोख़िम न उठाना पड़े.
एसेट रिएलोकेशन दरअसल डाइवर्सिफ़िकेशन को बनाए रखने का तरीक़ा है. मिसाल के तौर पर, मान लीजिए कोई शख़्स अपनी 70 प्रतिशत रक़म शेयरों में और 30 प्रतिशत बैंक FD में रखता है. जब शेयर अच्छा कमाते हैं और उनका हिस्सा 70 प्रतिशत से बढ़ जाता है, तो वो कुछ पैसे FD में शिफ़्ट करके पुराना रेशियो बहाल कर लेता है.
क्या इतने सीधे तरीक़े से सच में तबाही से बचा जा सकता है? मेरा मानना है कि ज़्यादातर आपदाओं से बचाव हो सकता है. हालांकि यहां 'बचाव' शब्द तुलनात्मक रूप से लागू है. अगर दुनिया की अर्थव्यवस्था गहरी मंदी में चली जाए, तो आपके निवेश की वैल्यू गिरेगी ज़रूर. लेकिन सही डाइवर्सिफ़िकेशन से यह गिरावट कम होगी - उम्मीद है, काफ़ी कम. अगर आपने धीरे-धीरे और सोच-समझकर निवेश किया है, तो शायद आप पहले ही काफ़ी कमा चुके होंगे और गिरावट सिर्फ़ रिटर्न को कम करेगी, मूलधन को नहीं खाएगी.
लेकिन कोई गारंटी नहीं होती. निवेश में होने वाले नुकसान से पूरी तरह बचने का एकमात्र तरीक़ा है - निवेश ही न करना. अगर आप फ़ायदा उठाना चाहते हैं, तो जोख़िम भी उठाना होगा. यह तो तय है.
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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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