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डिजिटल फ़ाइनेंशियल घोटालों की महामारी

तकनीक में तेज़ी से एडवांस हो रहे घोटालेबाज़ों से एक क़दम आगे रहना ज़रूरी है

तकनीक में तेज़ी से एडवांस हो रहे घोटालेबाज़ों से एक क़दम आगे रहना ज़रूरी हैAnand Kumar

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6:04

भले ही, मैं आमतौर पर निवेश के विषयों पर ही ध्यान केंद्रित करता हूं, पर आज मैं फ़ाइनांस के एक अलग पहलू पर चर्चा करने के लिए गियर बदल रहा हूं: डिजिटल फ़ाइनेंशियल सिक्योरिटी. ऐसी कहानियां अब आम होती जा रही हैं जहां डिजिटल चोरी में ख़ासतौर पर सीनियर सिटिज़न को निशाना बनाया जाता है. क्या फ़ाइनेंशियल धोखाधड़ी की बाढ़ ही आ गई है? ऐसी धोखाधड़ी जहां कोई आपको कॉल करके एक कहानी सुनाता है, और इस कहानी का अंत, अगर आप भोले-भाले हैं, तो किसी को डिजिटली पैसे देने में होता है.

सुनने में आया है कि पिछले कुछ महीनों में हमारे यहां धोखाधड़ी की करोड़ों कोशिशें हुई हैं. मैं इस बात पर विश्वास करता हूं क्योंकि मैं किसी भी ऐसे व्यक्ति को नहीं जानता जिसके परिवार में, दोस्तों में या साथ में काम करने वाले ने हाल के महीनों में इसका सामना नहीं किया हो. अगर हमारे पास असल में इस तरह के फ़्रॉड की ख़बरों का पूरा कवरेज है, अगर फ़ोन रखने वाला हरेक व्यक्ति ऐसी कोशिशों का सामना कर रहा है, तो ये पक्का है कि पिछले कुछ महीनों में ऐसी करोड़ों-करोड़ों कोशिशें हुई होंगी. कहीं कोई वास्तविक डेटा नहीं है, लेकिन जिनसे भी मैंने बात की है उन सभी ने मुझे यही कहा है.

बड़े पैमाने पर होने वाले ये फ़्रॉड किस तरह के हैं इसके कुछ दूसरे सुराग भी मौजूद हैं. कुछ लोगों ने रिकॉर्ड किए गए मैसेज मिलने के बारे में बताया है जो ऑटोमेटेड रिस्पॉन्स चाहते हैं. फ़ोन पर एक आवाज़ कुछ इस तरह कहती है, “आपके भेजे कूरियर पैकेज में एक क़ानूनी समस्या है. कृपया ज़्यादा विस्तार से जानने के लिए 1 दबाएं.” अपराधियों के लिए अपने फ़्रॉड का दायरा बढ़ाने का ये एक शातिराना तरीक़ा है. जिन लोगों ने इस तरह के घोटाले के बारे में सुना है, वो फ़ोन काट देंगे, जबकि भोलेभाले शिकार 1 दबा देंगे. ऐसा लगता है कि धोखाधड़ी की सफलता का रेट बढ़ाने के लिए ऑटोमेशन एक फ़िल्टर के तौर पर काम करता है. इससे पता चलता है कि इन घोटालों को चलाने वाले लोग कितने संगठित हैं और एक आम बिज़नस की तरह IVR सिस्टम जैसी टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं.

ऐसे अनगिनत तरीक़े हैं जिनका इस्तेमाल ये घोटालेबाज़ कर रहे हैं. 'क्लासिक' तरीक़ा है कि एक बुज़ुर्ग शख़्स को कुछ कॉल आती हैं और OTP मांगा जाता है और फिर पता चलता है कि उनके अकाउंट से नेट बैंकिंग के कुछ ट्रांज़ैक्शन हुए हैं. आम तौर पर ये लेन-देन किसी ऐसी चीज़ के लिए होता है जिसे आसानी से कैश कराया जा सकता है या बेचा जा सकता है. हाल के दिनों में, कई घोटालेबाज़ों ने डर को एक ट्रिगर के रूप में इस्तेमाल किया गया है. आपको बताया जाता है कि उनके बच्चे को गिरफ़्तार कर लिया गया है या उनके नाम से या उनको भेजे गए किसी कूरियर में ड्रग्स मिली है. ये बातें कुछ ऐसी होती हैं कि लोगों के लिए शांत हो कर सोचना-समझना मुश्किल हो जाता है. फ़ोन पर धोखाधड़ी करने वालों के पास शिकार को मूर्ख बनाने का लंबा अनुभव होता है, लेकिन आम लोगों के पास उनसे निपटने का कोई अनुभव नहीं होता.

आख़िर इन चीज़ों को कैसे रोका जाए? इसे रोकने का स्पष्ट तरीक़ा है बैंकिंग सिस्टम. डिजिटल धोखाधड़ी, बैंकों के बीच डिजिटल ट्रांज़ैक्शन के ज़रिए ही लूट को अंजाम देती है. यही वो चीज़ है जो इस तरह के अपराध को संभव बनाती है; और यहीं इन्हें रोका भी जा सकता है, मगर यही इसकी कमज़ोरी भी है. जहां कुछ ख़बरें दिखी हैं जो बैंकों को गृह मंत्रालय की साइबर क्राइम सिस्टम या इस जैसी किसी चीज़ से जुड़ने को लेकर हैं, पर ये भी साफ़ है कि अभी बहुत कुछ किए जाने की ज़रूरत है, और असल में, ये संभव भी है.

पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक, पूरी तरह से केवाईसी वाले सिस्टम में, पैसे का पता न चल पाने का कोई कारण नहीं हो सकता. भले ही कोई घोटालेबाज़ लूट को कितने ही बैंक खातों में कितनी ही तेज़ी से क्यों न बांट दें और कैश निकाल लें. इसके पता न चलने का कोई कारण ही नहीं है. दरअसल, इनके पता लगाने के रास्ते में जो चीज़ आड़े आ रही है वो पुराने और धीमे सिस्टम हैं जो इस तरह के अपराध को संभाल नहीं पा रहे हैं. इस सिलसिले में मैं कुछ हलचल देख रहा हूं और लगता है कि अंततोगत्वा एक नया सिस्टम खड़ा हो जाएगा, लेकिन इसे लेकर मैं अपनी सांस नहीं रोकूंगा.

जब तक एक बेहतर सिस्टम विकसित होता है, हमें ख़ुद को और अपने परिवार के बुज़ुर्गों को इन घोटालों का शिकार होने से बचाना चाहिए. घोटालेबाज़ों की आम रणनीति के बारे में ख़ुद को शिक्षित करना, फ़ोन या ईमेल पर संवेदनशील जानकारी साझा न करना, संदिग्ध कॉलों को तुरंत काट देना, टू-फ़ैक्टर ऑथेंटीफ़िकेशन का इस्तेमाल करना और नियमित रूप से अपने फ़ाइनेंशियल स्टेटमेंट की निगरानी इन अपराधों को रोकने में काफ़ी मदद कर सकता है. जब तक सिस्टम में ये बड़े बदलाव लागू नहीं हो जाते, सतर्कता और सावधानी इन टेक्निकली तेज़ी से एडवांस होते घोटालों के ख़िलाफ़ हमारा सबसे अच्छा बचाव होगा. ये वो काम हैं जो किए जाने चाहिए, लेकिन दिलचस्प बात ये है कि बस इतना ही करने की ज़रूरत है. अगर आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसके साथ ऐसा घोटाला हुआ है, तो इन स्पष्ट और सरल उपायों ने उन्हें बचा लिया होता.

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