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दो आयरन-ओर कंपनियों ने $10 अरब के कैपेक्स प्लान का किया ऐलान. क्या निवेश का है मौक़ा?

Metal Stocks: हम भारत की दो प्रमुख आयरन-ओर कंपनियों और उनमें निवेश की संभावनाओं के बारे में चर्चा कर रहे हैं

Metal Stocks: हम भारत की दो प्रमुख आयरन-ओर कंपनियों और उनमें निवेश की संभावनाओं के बारे में चर्चा कर रहे हैं

Which metal stock is best: ये दौर साइक्लिकल निवेशकों के लिए बेहतरीन समय हो सकता है! आयरन-ओर की प्रमुख उत्पादक कंपनियों NMDC और लॉयड्स मेटल्स ने हाल ही में स्टील इंडस्ट्री में मौजूदा तेज़ी का फ़ायदा उठाने के लिए बड़े कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान का ऐलान किया है.

आयरन ओर का उत्पादन करने वाली PSU NMDC अपनी उत्पादन क्षमता को दोगुना करने के लिए अगले पांच वर्षों में ₹50,000 करोड़ का निवेश करेगी. लॉयड्स मेटल्स ने इसी उद्देश्य के लिए ₹33,000 करोड़ अलग रखे हैं.

10 अरब डॉलर का प्लान

दो दिग्गज कंपनियां किस प्लान से आगे बढ़ने की तैयारी में

NMDC लॉयड्स
मौजूदा क्षमता (MTPA) 50 10
5 साल का अनुमानित कैपेक्स (करोड़ ₹) 50,000 33,000
2030-31 तक अनुमानित क्षमता (MTPA) 100 25
नोट: क्षमता के आंकड़े आयरन ओर से संबंधित हैं

ध्यान रखें कि पिछले 10 वर्षों में इन दोनों कंपनियों का कुल कैपेक्स ₹20,000 करोड़ से थोड़ा ज़्यादा रहा था! लेकिन क्या ये योजनाएं निवेश के लिए काफ़ी हैं? इसका जवाब जानने के लिए, हमें ये पता लगाना होगा कि वे अब इतनी बड़ी मात्रा में निवेश क्यों कर रही हैं.

भारत की तेज़ी पर सवार

पिछले कुछ वर्षों में, भारत सरकार ने बुनियादी ढांचे में सुधार के लिए पूंजीगत व्यय (कैपिटल एक्सपेंडिचर) में बढ़ोतरी की है, जिससे इस्पात की घरेलू मांग अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है. वास्तव में, पिछले पांच वर्षों में भारत में इस्पात की खपत में 30 फ़ीसदी बढ़ी है, जबकि ज़्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में गिरावट देखी गई है.

ये ट्रेंड निकट भविष्य में रुकने की संभावना नहीं है, इसे देखते हुए कि राष्ट्रीय इस्पात नीति (National Steel Policy) का लक्ष्य भारत की स्टील उत्पादन क्षमता को वर्तमान 160 MTPA से बढ़ाकर 2031 तक 300 MTPA करना है. बताते चलें कि 1 टन स्टील बनाने के लिए आपको 1.5-1.6 टन आयरन की ज़रूरत होती है. आंकड़ों पर नज़र डालें, तो आपको पता चलेगा कि भारत को अपना लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रति वर्ष 450 मिलियन टन आयरन ओर का उत्पादन करने की ज़रूरत है.

इसका मतलब है कि आयरन ओर उत्पादकों के लिए मांग चिंता का विषय नहीं हो सकती है. हाल में, NMDC के चेयरमैन ने कहा था, "हम उत्पादन करने में असमर्थ हैं… हम अपने कस्टमर्स को उनकी मांग पूरा करने असमर्थ हैं, चाहे वह JSW हो, चाहे वह JSPL हो, चाहे वो आर्सेलर मित्तल हो, चाहे वह RINL हो, सभी ग्राहक हमसे बहुत ज़्यादा मांग कर रहे हैं, इसलिए मुझे नहीं लगता कि मांग कभी कोई समस्या है."

लेकिन क्या उनके पास इस मांग में उछाल का लाभ उठाने के लिए पर्याप्त पूंजी है, या क्या इन निवेश योजनाओं से उन पर भारी क़र्ज़ तो नहीं हो जाएगा?

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फ़ंड की तलाश

  • NMDC:  सरकारी कंपनी के लिए पूंजी कोई चुनौती नहीं है. महामारी के दौरान मज़बूत घरेलू मांग और आयरन-ओर की क़ीमतों में उछाल के कारण कंपनी की कमाई में पिछले पांच वर्षों में अच्छी बढ़ोतरी हुई है. इसके अलावा, NMDC ने ऐतिहासिक रूप से भारी भरकम कैश जेनरेट करने क्षमता प्रदर्शित की है. FY24 में इसका वार्षिक CFO (ऑपरेशन से कैश फ़्लो) रन रेट ₹7,000 करोड़ रहा है. ये देखते हुए कि भविष्य में किसी दिए गए वर्ष में इसका अधिकतम कैपेक्स लगभग 8,000 से 9,000 करोड़ रुपये होगा, इसलिए संभवतः कंपनी को बाहरी फंडिंग की ज़रूरत नहीं होगी. इसके अलावा, NMDC ने सुरक्षित रहने के लिए अपने एवरेज डिविडेंड पेमेंट रेशियो को मौजूदा 45 फ़ीसदी से घटाकर 38 फ़ीसदी करने की योजना बनाई है. इसमें ₹12,000 करोड़ के कैश रिज़र्व और 0.13 गुना के कम डेट टू इक्विटी रेशियो के साथ एक मजबूत बैलेंस शीट भी है.
  • भारत की ग्रोथ पर भरोसा

    मजबूत घरेलू मांग से दोनों कंपनियों को दमदार ग्रोथ हासिल करने में मिली मदद

    FY20-24 NMDC लॉयड्स
    रेवेन्यू ग्रोथ (% सालाना) 15 101
    प्रॉफ़िट आफ्टर टैक्स में ग्रोथ (% सालाना) 12 150
    5 साल का मीडियन ROCE (%) 22 24
  • लॉयड्स मेटल्स ( Lloyds Metals) : NMDC के विपरीत, लॉयड्स मेटल्स को अपनी कैपेक्स प्लान के लिए पूंजी जुटाने की ज़रूरत हो सकती है. हालांकि, इसके पास भी मामूल क़र्ज़ के साथ एक मजबूत बैलेंस शीट है, लेकिन फ़ाइनेंशियल ईयर 24 में इसका CFO रन रेट सिर्फ ₹1,700 करोड़ था. नतीजतन, कंपनी ने घोषणा की है कि वह QIP (क्वालिफ़ाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट) के माध्यम से ₹1,200 करोड़ और कैपेक्स के लिए प्रेफ़र्ड वारंट के माध्यम से ₹700 करोड़ जुटाएगी. इसके अलावा, कंपनी CFO रन रेट को बढ़ावा देने के लिए लागत कम करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है. इसने 2018 में अपनी मौजूदा खदानों के लिए अपनी लीज 2057 तक बढ़ा दी है. 2020 के बाद रॉयल्टी फ़ीस में बढ़ोतरी को देखते हुए, लॉयड की तुलना में उसके कॉम्पिटीटर्स को आगे ज़्यादा फ़ीस देनी होगी.

ख़ुद को थोड़ा संभालिए!

हालांकि ये सच है कि बढ़ती मांग और मज़बूत बैलेंस शीट इन दो आयरन ओर दिग्गजों की बड़ी ताक़त है, लेकिन कुछ ऐसी अनिश्चितताएं भी हैं जिन्हें आपको नज़रअंदाज नहीं करना चाहिए.

  • अपसाइकिल अचानक ख़त्म हो सकता है. ज़्यादातर कमोडिटी सेक्टर्स में, अपसाइकिल तब ख़त्म हो जाता है जब सप्लाई मांग से ज़्यादा हो जाती है. ये देखते हुए कि ज़्यादातर आयरन ओर प्रोड्यूसर कंपनियां अपने उत्पादन में वृद्धि कर रही हैं, आगे डिमांड-सप्लाई के बेमेल होने से इनकार नहीं किया जा सकता है.
  • स्टील कंपनियां अपना आयरन ओर ख़ुद बना रही हैं. स्टील की बढ़ती मांग ने प्रमुख भारतीय स्टील कंपनियों को अपनी इन-हाउस आयरन ओर उत्पादन क्षमता में निवेश करने के लिए भी प्रेरित किया है. टाटा स्टील अपनी लौह अयस्क क्षमता को दोगुना करके 60 MTPA करने का लक्ष्य लेकर चल रही है. साथ ही, JSW स्टील की भारत में 24 आयरन ओर की खदानें हैं, जिनमें से फ़ाइनेंशियल ईयर 24 तक केवल 13 का संचालन किया गया है, जो इसकी खपत का लगभग 33 फ़ीसदी पूरा करती हैं. सेल ( SAIL ) अपनी सभी आयरन ओर की ज़रूरतों को इन-हाउस पूरा करता है. इसका मतलब है कि बढ़ती मांग का ट्रेंड लगातार बरक़रार नहीं रह सकता.

कुल मिलाकर, मौजूदा बाज़ार का माहौल आयरन ओर कंपनियों के लिए वास्तव में उम्मीदों से भरा है, और NMDC और लॉयड मेटल्स के कैपेक्स प्लान लक्ष्य पर पहुंच सकते हैं. लेकिन उपरोक्त अनिश्चितताओं को ध्यान में रखे बिना, उनमें निवेश करना अंधेरे में तीर चलाने जैसा होगा.

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