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धांधली वाले खेल का भ्रम

बाज़ार में हेरफेर मौजूद है, लेकिन इससे समझदार निवेशक को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं है

बाज़ार में हेरफेर मौजूद है, लेकिन इससे समझदार निवेशक को चिंतित होने की ज़रूरत नहीं हैAditya Roy/AI-Generated Image

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सेबी की जेन स्ट्रीट के ख़िलाफ़ हालिया कार्रवाई ने भारत के ट्रेडिंग समुदाय में हलचल मचा दी है. आरोप गंभीर हैं - कथित तौर पर बैंक निफ़्टी इंडेक्स में मिलीभगत से ख़रीद-बिक्री की हेराफेरी, जिससे अरबों का मुनाफ़ा कमाया गया जबकि रिटेल ट्रेडरों ने भारी नुक़सान उठाया. ग़ुस्सा जायज़ है. जब रेगुलेटर कहता है कि 91% व्यक्तिगत ट्रेडर डेरिवेटिव्स में पैसा गंवाते हैं और साथ ही विदेशी संस्थाएं सुनियोजित तरीक़े से बाज़ार को नचा रही हैं - तो ये सोच स्वाभाविक है कि पूरा खेल ही गड़बड़ है.

लेकिन मार्केट मैनिपुलेशन की बात ऐसी है - ये सच है, होता है - और जैसा कि हमने वैल्यू रिसर्च में पिछले 30 साल में बार-बार दिखाया है - ये लॉन्ग टर्म निवेशकों के लिए इसकी कोई अहमियत नहीं है. इसका मतलब ये नहीं कि जेन स्ट्रीट के आरोपों की गंभीरता को कम करके आंकें या रेगुलेशन की चूक को नज़रअंदाज़ करें. बल्कि बात सिर्फ़ इतनी है कि हेराफेरी वहीं फलती-फूलती है जहां शॉर्ट-टर्म, सट्टेबाज़ी वाली ट्रेडिंग होता है - जिससे समझदार निवेशकों को वैसे भी दूर रहना चाहिए.

सोचिए जेन स्ट्रीट पर आरोप क्या है. उन्होंने दिन की शुरुआत में बैंक निफ़्टी स्टॉक ख़रीदे जिससे इंडेक्स ऊपर गया और साथ ही इंडेक्स ऑप्शन्स में शॉर्ट पोज़िशन बनाई. इस तरह उन्होंने अपने ही द्वारा किए गए दामों के हेरफेर से मुनाफ़ा कमाया. ये क्लासिक 'पंप-एंड-डंप' का हाई-टेक और बड़ी पूंजी वाला अवतार है, जो एल्गोरिदम आधारित ट्रेडिंग और भारी फ़ंडिंग से चलता है.

एक ज़रूरी बात नोट कीजिए - ये जोड़-तोड़ सिर्फ़ बेहद कम समय में काम करती है. जेन स्ट्रीट के मुनाफ़े घंटों या दिनों में किए गए दामों के उतार-चढ़ाव से बने, महीनों या सालों में नहीं. यह वही हाई-स्पीड डेरिवेटिव ट्रेडिंग है जो आजकल रिटेल निवेशकों के बीच लोकप्रिय हो रही है - और जिससे हमारे स्टॉक एडवाइज़र और फ़ंड एडवाइज़र लगातार दूर रहने की सलाह देते हैं.

सेबी के अपने आंकड़े बताते हैं कि वित्त-वर्ष 22 से 25 के बीच 91 से 93% रिटेल डेरिवेटिव ट्रेडर ने पैसा गंवाया. अक्टूबर 2024 के सुधारों के बाद भी नुक़सान का आंकड़ा 91% ही बना रहा. हमारी टीम रोज़ देखती है कि कैसे नए निवेशक तुंरत मुनाफ़े की उम्मीद में ऑप्शन में कूदते हैं और हारते हैं.

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असल सवाल ये नहीं है कि मार्केट में हेरफेर होता है या नहीं - कभी-कभी होता है. सवाल ये है कि क्या इससे आपकी निवेश रणनीति प्रभावित होनी चाहिए? अगर आप किसी रिसर्च किए गए बिज़नस में लंबे समय के लिए निवेश कर रहे हैं, तो क्या फ़र्क पड़ता है अगर कोई एल्गोरिदम कुछ घंटों के लिए इंडेक्स को घुमा रही है? अगर आप सालों के लिए बढ़िया स्टॉक्स या फ़ंड्स में निवेश कर चुके हैं, तो क्या रोज़ के दामों के उतार-चढ़ाव की परवाह करनी चाहिए? हमारा मानना है - नहीं.

क्यों? क्योंकि हेरफेर थोड़े समय के दामों की गड़बड़ी पर आधारित होता है. हेराफेरी करने वालों की स्कीम तब ही चलती है जब दूसरा ट्रेडर उनके नकली सिग्नल पर तुरंत प्रतिक्रिया करे. लेकिन अगर आप इन सिग्नलों पर ट्रेडिंग ही नहीं कर रहे, तो आप उस खेल का हिस्सा ही नहीं हैं.

इसीलिए वैल्थ इनसाइट और वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन के हर लेख में हम एक ही मूलमंत्र दोहराते हैं: वो बिज़नस ख़रीदिए जिसे आप समझते हैं, उसे लंबे समय तक होल्ड करिए और हर रोज़ की सुर्ख़ियों के शोर को अनदेखा करिए.

जेन स्ट्रीट का मामला हमें एक और बात सिखाता है: सबसे ज़्यादा नुक़सान उन्हीं को हुआ जो डेरिवेटिव्स में जल्दी कमाने की होड़ में थे. वित्त-वर्ष 25 में ऐसे निवेशकों ने ₹1.05 लाख करोड़ गंवाए. बिना हेरफेर के भी ये खेल उनके ख़िलाफ़ था - हेराफेरी से हालात और बिगड़े.

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लेकिन हेराफेरी करने वाले एक काम नहीं कर सकते - वो अच्छे बिज़नस की वैल्यू नहीं बदल सकते. वो एक अच्छी, मुनाफ़े वाली कंपनी को बेकार नहीं बना सकते. न ही किसी कमज़ोर कंपनी को स्थायी विजेता बना सकते हैं. हेराफेरी सिर्फ़ शोर करती है, वैल्यू में कोई स्थायी बदलाव नहीं लाती.

इसीलिए असली सुरक्षा कड़े रेगुलेशन से ज़्यादा, बेहतर निवेश के तरीक़े अपनाने से आती है. स्टॉक्स नहीं, बिज़नस पर ध्यान दीजिए. घंटों नहीं, सालों में सोचिए. ऐसा पोर्टफ़ोलियो बनाइए जिसे आप हर तूफ़ान में थाम सकें. यही सरल सिद्धांत - वैल्यू रिसर्च फ़ंड सलेक्टर के हर स्क्रीन और हर बैकटेस्ट में बार-बार साबित होते हैं - आपको हेराफेरी से बचाते हैं, क्योंकि आप उस खेल का हिस्सा ही नहीं हैं.

जेन स्ट्रीट का मामला कोर्ट में तय होगा. लेकिन निवेशकों के लिए सबक़ सीधा है: बुनियादी बातों से जुड़े रहिए, डेरिवेटिव्स के जुए से दूर रहिए, और याद रखिए कि लंबी अवधि में हमेशा बुनियादी वैल्यू की जीत होती है. फिर चाहे खेल कभी-कभी गड़बड़ हो, लेकिन ज़रूरी नहीं कि आप वही खेल खेलें.

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