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लार्ज-कैप फ़ंड जिन्होंने मिड और स्मॉल-कैप पर लगाए बड़े दांव, क्या आपने भी किया है निवेश?

चलिए उन लार्ज-कैप फ़ंड के बारे में जानते हैं जिनका मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में सबसे ज़्यादा एलोकेशन है

चलिए उन लार्ज-कैप फ़ंड के बारे में जानते हैं जिनका मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स में सबसे ज़्यादा एलोकेशन हैNitin Yadav/AI-Generated Image

सारांशः ज़्यादातर निवेशक लार्ज-कैप फ़ंड से सुरक्षा की उम्मीद रखते हैं. लेकिन अगर लार्ज-कैप फ़ंड असल में मिड और स्मॉल-कैप स्टॉक्स पर बड़ा दांव लगा रहा हो तो क्या हो? इस लेख में पता करेंगे: 1) किन लार्ज-कैप फ़ंड का मिड और स्मॉल-कैप में सबसे ज़्यादा निवेश है, 2) कौन से फ़ंड सबसे सुरक्षित दांव लगा रहे हैं, और 3) पिछले एक और पांच साल में इन दांवों का क्या नतीजा निकला.

ज़्यादातर निवेशक लार्ज-कैप फ़ंड को एक ही उम्मीद से चुनते हैं: सुरक्षा. आप अपना पैसा Reliance, TCS और HDFC Bank जैसी सबसे बड़ी और मज़बूत कंपनियों में लगाना चाहते हैं. आख़िर यही तो लार्ज-कैप फ़ंड का मक़सद है, है ना?

एक हद तक, हां!

कई निवेशकों को ये बात समझ नहीं आती कि SEBI के नियमों के अनुसार लार्ज-कैप म्यूचुअल फ़ंड अपनी एसेट का 20% तक हिस्सा लार्ज-कैप से बाहर, यानी मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश कर सकते हैं.

और कई फ़ंड मैनेजर इस लचीलेपन का फ़ायदा उठाते हैं.

कुछ लोग इसका इस्तेमाल रिटर्न बढ़ाने के लिए करते हैं, तो कुछ लोग इसका इस्तेमाल ऐसे मज़बूत भरोसे वाले आइडियाज में लगाने में करते हैं जो मार्केट कैप के टॉप 100 में भी नहीं आते. लेकिन इसका नतीजा ये होता कि ‘लार्ज-कैप फ़ंड’ के अंदर भी मिड और स्मॉल-कैप का तड़का हो सकता है.

चलिए देखते हैं अलग-अलग लार्ज-कैप फ़ंड इस लचीलापन का कैसे इस्तेमाल कर रहे हैं और कौन से सिर्फ़ लार्ज-कैप तक ही सीमित हैं.

5 लार्ज-कैप फ़ंड जिनका मिड-कैप एलोकेशन सबसे ज़्यादा है

फ़ंड  मिड-कैप एलोकेशन
Bandhan 11.54%
Mirae Asset 11.30%
Invesco 9.66%
ITI 9.53%
Quant 8.16%

औसतन लार्ज-कैप फ़ंड अपने पोर्टफ़ोलियो का लगभग 2.95% हिस्सा मिड-कैप शेयरों में लगाते हैं. लेकिन कुछ फ़ंड हाउस इससे भी आगे निकल जाते हैं. मिसाल के तौर पर, बंधन, मिराए एसेट और इन्वेस्को इंडिया जैसे लार्ज-कैप फ़ंड ने मिड-कैप शेयरों में 9.66% से 11.54% तक निवेश किया है, जो उनके कैटेगरी एवरेज से तीन गुना ज़्यादा है.

ये बात क्यों मायने रखती है? असल में, मिड-कैप शेयरों में तेज़ी के दौरान मिड-कैप निवेश इन फ़ंड्स के प्रदर्शन को मज़बूती दे सकता है. लेकिन इसके साथ उतार-चढ़ाव भी आता है. अगर आप कम जोखिम वाले, लार्ज-कैप-ओरिएन्टेड प्रोडक्ट की उम्मीद कर रहे हैं तो आपके लिए इस पर विचार करना ज़रूरी है.

तो क्या इस ज़्यादा मिडकैप एलोकेशन का फ़ायदा हुआ है? पिछले 12 महीनों में बंधन, मिराए एसेट और इन्वेस्को इंडिया जैसी स्कीमों ने पॉज़िटिव रिटर्न दिए हैं, लेकिन ITI और क्वांट के लार्ज-कैप फ़ंड, जिनमें भी काफ़ी मिडकैप हिस्सा था - ने नेगेटिव रिटर्न दिए. यानी इस बात का कोई ठोस सबूत नहीं है कि ज़्यादा मिडकैप एलोकेशन से लगातार फ़ायदा हुआ.

और 5 साल में? नतीजा अभी भी साफ़ नहीं है. कुछ फ़ंड ने अच्छा किया, कुछ ने नहीं. ऊपर से मिडकैप एलोकेशन समय के साथ बदल भी सकता है. इसलिए पक्का नहीं कहा जा सकता कि ज़्यादा मिडकैप का मतलब है-बेहतर नतीजे.

ये भी पढ़ेंः स्मॉल-कैप फ़ंड में ज़्यादा रिटर्न पाने का सबसे स्मार्ट तरीक़ा कौन सा है?

5 लार्ज-कैप फ़ंड जिनमें सबसे ज़्यादा स्मॉल-कैप एलोकेशन है

Motilal Oswal
9.53%
LIC 6.47%
Bank of India 6.04%
ITI 4.54%
Bandhan 3.90%

औसतन लार्ज-कैप फ़ंड में स्मॉल-कैप शेयरों का 2.46% एलोकेशन होता है. लेकिन कुछ फ़ंड इससे बिल्कुल अलग हैं. उदाहरण के लिए, मोतीलाल ओसवाल के लार्ज-कैप फ़ंड का लगभग 10% स्मॉल-कैप हैं  - यानी कैटेगरी एवरेज से चार गुना ज़्यादा. LIC और बैंक ऑफ़ इंडिया में भी ये एलोकेशन काफ़ी ज़्यादा है.

इस तरह के एग्रेसिव फ़ंड उन निवेशकों के लिए हो सकते हैं जो ख़ासकर स्मॉल-कैप शेयरों में तेज़ी के दौरान ज़्यादा रिस्क लेकर ज़्यादा रिटर्न की उम्मीद करते हैं. लेकिन हमेशा की तरह, इसका नुक़सान ज़्यादा उतार-चढ़ाव के रूप में सामने आता है.

हालांकि, गहराई से देखने पर कोई साफ़ पैटर्न नहीं दिखता. मोतीलाल ओसवाल की स्कीम पिछले 12 महीनों में टॉप परफ़ॉर्मर रही, लेकिन बैंक ऑफ़ इंडिया और ITI ने ज़्यादा स्मॉल-कैप एलोकेशन के बावजूद नेगेटिव रिटर्न दिए. शायद स्मॉल-कैप सेगमेंट का प्रदर्शन पिछले एक साल में अच्छा नहीं रहा.

5 साल के नतीजों में भी कोई स्थायी बढ़त नहीं है. मोतीलाल और ITI की स्कीम इतने लंबे समय से नहीं हैं और बाक़ी फ़ंड ने भी ऐसा कोई प्रदर्शन नहीं दिखाया जिसका श्रेय सीधे तौर पर स्मॉल-कैप निवेश को दिया जा सके.

तो असल में बात क्या है? ये मिड या स्मॉल-कैप एलोकेशन के साइज़ का खेल नहीं है. असल बात है कि कौन से स्टॉक्स चुने गए हैं.

तो, इस सब से हमें क्या पता चलता है? ये इस बारे में नहीं है कि कोई लार्ज-कैप फ़ंड मिड-कैप या स्मॉल-कैप में कितना निवेश करता है. ज़रूरी ये है कि वो कौन से शेयर चुनते हैं.

ये भी पढ़ेंः दूसरा फ़ंड जो हर लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टर के पास होना ही चाहिए!

4 लार्ज-कैप फ़ंड जिनमें मिड और स्मॉल-कैप का कोई एलोकेशन नहीं है

ये फ़ंड सबसे ज़्यादा सुरक्षित हैं:

  • Axis
  • Bajaj Finserv (अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है)
  • PGIM India
  • Samco (अभी एक साल पूरा नहीं हुआ है)

अगर सिर्फ़ Pure लार्ज-कैप एक्सपोज़र चाहिए तो ये फ़ंड सबसे साफ़-सुथरे विकल्प हैं. एक्सिस और PGIM India के लार्ज-कैप फ़ंड के फ़ंड मैनेजर ने टॉप 100 कंपनियों के अंदर ही निवेश किया है, जिससे कम उतार-चढ़ाव और ज़्यादा अनुमानित रिटर्न मिले हैं. मौजूदा मार्केट में इस कंज़र्वेटिव स्ट्रैटेजी से फ़ायदा हुआ है और दोनों स्कीमों ने पिछले 12 महीनों में पॉज़िटिव सिंगल-डिजिट रिटर्न दिए हैं  - जो लार्ज-कैप कैटेगरी एवरेज -0.71% से काफ़ी बेहतर है.

लेकिन 5 साल के नज़रिए से देखें तो तस्वीर अलग है. एक्सिस और PGIM इंडिया के लार्ज-कैप फ़ंड सबसे निचले पायदान पर हैं, अपने समकक्ष समूह में सबसे निचले और दूसरे सबसे निचले पायदान पर हैं. हालांकि, पिछले कुछ सालों में कुछ बदलाव हुए होंगे. लेकिन लॉन्ग-टर्म में ये कंज़र्वेटिव रुख उनके पक्ष में काम नहीं आया है.

तो अगर लार्ज-कैप फ़ंड कम उतार-चढ़ाव और स्थिर रिटर्न के लिए चुना गया है, तो उसका पोर्टफ़ोलियो देखना ज़रूरी है. कुछ फ़ंड 20% की लचीलेपन की उम्मीद में कुछ फ़ायदा उठाते हैं. कुछ नहीं.

दोनों ही तरीक़े ग़लत नहीं हैं  - बस पता होना चाहिए कि आप किसमें निवेश कर रहे हैं.

अपने लार्ज-कैप फ़ंड की हालिया होल्डिंग देखने के लिए वैल्यू रिसर्च के फ़ंड पेज पर जाएं, फ़ंड के नाम पर क्लिक करना और ‘पोर्टफ़ोलियो’ सेक्शन में देखना. वहां लार्ज- मिड और स्मॉल-कैप एलोकेशन की पूरी जानकारी मिलेगी.

और अगर म्यूचुअल फ़ंड को बेहतर समझना है, तो म्यूचुअल फ़ंड इनसाइट मैगज़ीन सब्सक्राइब करें, जो फ़ंड इन्वेस्टिंग को आसान बनाती है, परफ़ॉर्मेंस को गहराई से समझाती है और निवेश के फ़ैसले बेहतर करने में मदद करती है.

ये भी पढ़ें: क्या मिड-कैप फ़ंड अच्छा लार्ज-कैप एक्सपोज़र दे सकते हैं?

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