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सारांशः म्यूचुअल फ़ंड्स ने पिछले महीने चुपचाप कई मिड-कैप कंपनियों में निवेश किया. इनमें एक लोकप्रिय कंज़्यूमर ऐप से लेकर एक इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी तक शामिल रही, जो China+1 का फ़ायदा उठा रही है. तो, उनकी लिस्ट में कौन से 6 नाम सबसे ऊपर रहे? आइए जानें...
नामों पर जाने से पहले, ये समझना ज़रूरी है कि भारत में मिड-कैप स्टॉक किसे कहते हैं. ये परिभाषा मनमानी नहीं है, बल्कि एसोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा तय की जाती है, जो समय-समय पर मार्केट कैपिटलाइज़ेशन रैंकिंग के आधार पर एक लिस्ट जारी करता है. नियम साफ़ है:
- मार्केट वैल्यू के टॉप 100 कंपनियां लार्ज-कैप कहलाती हैं.
- अगली 150 कंपनियां, जिनकी रैंकिंग 101 से 250 के बीच है, वो मिड-कैप कैटेगरी का हिस्सा होती हैं.
- अगली 250 कंपनियां, जिनकी रैंकिंग 251 से 500 के बीच है, स्मॉल-कैप कैटेगरी में आती हैं.
ये स्ट्रक्चर इसलिए अहम है क्योंकि फ़ंड मैनेजरों को लार्ज-कैप, मिड-कैप या स्मॉल-कैप फ़ंड जैसी स्कीमें चलाते समय इसका पालन करना ज़रूरी होता है.
अब असल बात पर आते हैं और देखते हैं कि वो 6 मिड-कैप कंपनियां कौन-सी हैं जिन पर फ़ंड हाउसों का सबसे ज़्यादा जोर रहा.
1. Laurus Labs
लॉरस लैब्स फ़ार्मा सेक्टर की कंपनी है, जिसकी APIs और फ़ॉर्मुलेशन्स में अच्छी पैठ है.
2. Voltas
वोल्टास भारत की एयर-कंडीशनिंग और कूलिंग सॉल्यूशंस की लीडर कंपनी है.
3. Swiggy
स्विगी फ़ूड-डिलीवरी प्लेटफ़ॉर्म है, जो हाल ही में लिस्टेड कंपनियों में शामिल हुई और मिड-कैप कैटेगरी में आ गई.
4. Dixon Technologies (1.15)
भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफ़ैक्चरिंग इंडस्ट्री का बड़ा नाम Dixon, China+1 की ओर कदम बढ़ा रहे म्यूचुअल फ़ंड्स के लिए पसंदीदा बनी हुई है. कंपनी की क्षमता बढ़ाने की तेज़ रफ़्तार और मोबाइल, कंज़्यूमर ड्यूरेबल्स और वियरेबल्स में नए कॉन्ट्रैक्ट जीतने की वजह से संस्थागत निवेशक लगातार इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
5. FSN E-Commerce Ventures (Nykaa)
शेयर बाज़ार में उतार-चढ़ाव वाले साल के बाद Nykaa की रिकवरी फ़ंड मैनेजरों को रास आ रही है. इस मिड-कैप ई-कॉमर्स कंपनी ने मार्जिन और ग्रोथ में सुधार दिखाया है, जिसकी वजह से फिर से ख़रीदारी में दिलचस्पी बढ़ी है.
6. Mphasis
IT सर्विसेज़ में, Mphasis बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं में मजबूत प्रदर्शन के साथ एक फ़ुर्तीली मिड-कैप कंपनी के रूप में उभर कर सामने आई है.
ये जानना क्यों है अहम
निवेशकों के लिए, ये जानना कि म्यूचुअल फ़ंड्स मिड-कैप सेक्टर में क्या ख़रीद रहे हैं, इसे ट्रैक करना संस्थागत भरोसे का शुरुआती संकेत होता है.
क्या इनमें से कोई कंपनी हमारी रेकमेंडेशन लिस्ट में है?
जब आप पढ़ते हैं कि “म्यूचुअल फ़ंड्स ने पिछले महीने ये स्टॉक्स ख़रीदे”, तब तक डेटा पुराना हो चुका होता है. असल में,म्यूचुअल फ़ंड्स को अपने पोर्टफ़ोलियो की होल्डिंग्स का खुलासा महीने में केवल एक बार करना होता है, इसलिए इसमें देरी होती है. इसका मतलब ये है कि जब तक लिस्ट सामने आती है, तब तक ख़रीद हो चुकी होती है और कई बार फ़ंड्स अपनी हिस्सेदारी घटा भी चुके होते हैं.
इसलिए अगर कोई निवेशक सिर्फ़ म्यूचुअल फ़ंड्स की ख़रीद को नक़ल करता है, तो वो हमेशा पीछे ही रह जाता है. आपको ये नहीं पता कि फ़ंड ने कब, किस क़ीमत पर निवेश किया, या वो अभी भी निवेश कर रहा है या पहले ही मुनाफ़ा कमा चुका है.
लेकिन वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र के साथ, निवेशकों को समय पर रिसर्च की हुई buy/sell/hold रेकमेंडेशन मिलती हैं, जो गहरे एनालेसिस और लॉन्ग-टर्म भरोसे पर आधारित होती हैं.
Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.
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