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सारांश: आपके पास एक ही AMC का फ़्लेक्सी-कैप और लार्ज एंड मिड-कैप फ़ंड है. आप सोचते हैं डाइवर्सिफ़िकेशन मिल गया. हमने 31 फ़ंड जोड़ियां जांचीं, जिनमें से 16 में आधे से ज़्यादा पोर्टफ़ोलियो एक जैसा था. डाइवर्सिफ़िकेशन शायद है ही नहीं.
ज़्यादातर मामलों में एक ही AMC के फ़्लेक्सी-कैप और लार्ज & मिड-कैप फ़ंड में कई एक जैसे स्टॉक होते हैं. अगर आप दोनों रखे हुए हैं और सोच रहे हैं कि डाइवर्सिफ़िकेशन हो रहा है, तो यक़ीन मानिए कि शायद आप बस एक ही चीज़ दोगुनी ख़रीद रहे हैं.
ओवरलैप की गहराई जानने के लिए, हमने आंकड़े खंगाले. लेकिन पहले एक नज़र इन दोनों कैटेगरी की बनावट पर, क्योंकि इसी से आगे की पूरी बात समझ आती है.
दोनों कैटेगरी कैसे बनती हैं
SEBI दोनों के नियम तय करता है. और दोनों के नियम काफ़ी अलग हैं.
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स को कम से कम 65 प्रतिशत इक्विटी में लगाना होता है, और लार्ज, मिड, स्मॉल-कैप में कितना लगाना है, इसकी पूरी छूट होती है. लार्ज एंड मिड-कैप फ़ंड्स, जिन्हें L&M फ़ंड भी कहते हैं, को कम से कम 35-35 प्रतिशत लार्ज-कैप और मिड-कैप में लगाना होता है. बाकी 30 प्रतिशत फ़ंड मैनेजर की मर्ज़ी पर होता है.
45 फ़ंड और 31 मार्च 2026 तक ₹5,07,090 करोड़ के AUM के साथ, आकार के लिहाज़ से फ़्लेक्सी-कैप बड़ी कैटेगरी है. 33 फ़ंड और ₹2,99,876 करोड़ के कुल AUM के साथ, L&M फ़ंड्स छोटी कैटेगरी है.
अलग नियमों के बावजूद दोनों कैटेगरी आख़िरकार एक जैसे स्टॉक्स में भारी निवेश करती हैं. पिछले तीन साल में दोनों का औसत पोर्टफ़ोलियो एलोकेशन कुछ ऐसा रहा है:
पोर्टफ़ोलियो का बंटवारा: फ़्लेक्सी-कैप बनाम लार्ज एंज मिड-कैप फ़ंड
फ़्लेक्सी-कैप लार्ज-कैप की तरफ़ झुके हैं, जबकि L&M फ़ंड्स ज़्यादा संतुलित हैं
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कैटेगरी
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फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड (%) | लार्ज & मिड-कैप फ़ंड (%) |
|---|---|---|
| लार्ज-कैप | 63.9 | 48.8 |
| मिड-कैप | 19.4 | 38.8 |
| स्मॉल-कैप | 16.8 | 12.4 |
| 31 मार्च 2026 तक तीन साल के औसत एलोकेशन पर आधारित. केवल कम से कम तीन साल की हिस्ट्री वाले फ़ंड्स शामिल. SEBI के वर्गीकरण के अनुसार. | ||
फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स अपनी क़रीब दो-तिहाई रक़म लार्ज-कैप में लगाते हैं. L&M फ़ंड्स अपने नियम के चलते मिड-कैप में काफ़ी ज़्यादा, औसतन क़रीब 39 प्रतिशत लगाते हैं. दोनों कैटेगरी अपनी ज़्यादातर रक़म लार्ज और मिड-कैप में लगाती हैं, फ़्लेक्सी-कैप के लिए क़रीब 83 प्रतिशत और L&M के लिए 88 प्रतिशत.
यही मिलती-जुलती बनावट ओवरलैप की समस्या खड़ी करती है.
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ओवरलैप की समस्या
हमने कम से कम एक साल की हिस्ट्री वाले L&M फ़ंड्स की तुलना उनके उसी फ़ंड हाउस के फ़्लेक्सी-कैप साथी से की. कुल 31 ऐसी जोड़ियां बनीं.
पोर्टफ़ोलियो में कितना ओवरलैप है?
एक ही फ़ंड हाउस के फ़्लेक्सी-कैप और L&M फ़ंड्स के बीच अलग-अलग ओवरलैप दायरों में फ़ंड्स की संख्या
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ओवरलैप (दायरा)
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फ़ंड्स की संख्या |
|---|---|
| कम (20 प्रतिशत से कम) | 1 |
| मध्यम (20 से 40 प्रतिशत) | 14 |
| ज़्यादा (40 से 60 प्रतिशत) | 12 |
| बहुत ज़्यादा (60 से 80 प्रतिशत) | 4 |
| 31 मार्च 2026 तक का डेटा. | |
सिर्फ़ एक जोड़ी में ओवरलैप 20 प्रतिशत से कम था. 31 में से 16 जोड़ियों में ओवरलैप ज़्यादा से बहुत ज़्यादा था, यानी आधे से ज़्यादा जोड़ियों में पोर्टफ़ोलियो का बड़ा हिस्सा एक जैसा था.
ओवरलैप आप पर कैसे असर डालता है?
सीधी बात: अगर आप एक ही फ़ंड हाउस के फ़्लेक्सी-कैप और L&M फ़ंड दोनों रखे हुए हैं, तो काफ़ी संभावना है कि आप एक ही स्टॉक दो बार पकड़े हुए हैं, बिना वो डाइवर्सिफ़िकेशन के जो आपको लगती है.
लेकिन ओवरलैप पूरी कहानी नहीं है. रिटर्न और जोख़िम के मामले में दोनों कैटेगरी अलग तरह से काम करती हैं. और यह फ़र्क़ दोनों में से एक चुनने से पहले समझना ज़रूरी है.
हमने 2021 से 2026 तक कैलेंडर साल के हिसाब से एक ही फ़ंड हाउस की फ़्लेक्सी-कैप और L&M जोड़ियों की तुलना की. 2021 से 2024 तक L&M फ़ंड्स आगे रहे, हर साल ज़्यादातर ने अपने फ़्लेक्सी-कैप साथी को पीछे छोड़ा. 2021 सबसे दमदार रहा, 19 में से 15 L&M फ़ंड्स जीते, औसत आउटपरफ़ॉर्मेंस 7.6 प्रतिशत. उन सालों में ज़्यादा मिड-कैप एक्सपोज़र काम आया.
साल-दर-साल मुक़ाबला
हर साल फ़्लेक्सी-कैप से आगे रहने वाले L&M फ़ंड्स की संख्या
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कैलेंडर ईयर
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फ़्लेक्सी-L&M जोड़ियां | L&M फ़ंड्स जो फ़्लेक्सी-कैप से आगे रहे | औसत आउटपरफ़ॉर्मेंस (%) |
|---|---|---|---|
| 2021 | 19 | 15 | 7.6 |
| 2022 | 22 | 15 | 5 |
| 2023 | 25 | 18 | 3.6 |
| 2024 | 27 | 20 | 6 |
| 2025 | 31 | 13 | 3.6 |
| 2026 (YTD) | 33 | 22 | 2 |
| SEBI के वर्गीकरण के अनुसार. 2026 के YTD रिटर्न 17 अप्रैल 2026 तक. | |||
फिर 2025 आया. 31 में से 18 फ़ंड्स के L&M साथियों को पीछे छोड़ने के साथ, फ़्लेक्सी-कैप आगे निकले. मिड-कैप की तुलना में लार्ज-कैप बेहतर रहे, तो फ़्लेक्सी-कैप का लार्ज-कैप की तरफ़ झुकाव काम आया.
कोई एक कैटेगरी हर हाल में नहीं जीतती. कौन आगे रहेगा यह काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि उस वक़्त लार्ज-कैप बेहतर कर रहे हैं या मिड-कैप.
गिरावट में फ़र्क़ बहुत कम है. हमने देखा कि 2016 से अब तक निफ़्टी 500 TRI की पांच सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में दोनों कैटेगरी ने कैसा किया.
गिरावट में दोनों कैटेगरी का व्यवहार
2016 से अब तक निफ़्टी 500 TRI की पांच सबसे बड़ी मासिक गिरावटों में कैटेगरी रिटर्न
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महीना
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फ़्लेक्सी-कैप (%) | लार्ज & मिड-कैप (%) |
|---|---|---|
| मार्च-20 | -23.4 | -24.8 |
| मार्च-26 | -10.8 | -11.2 |
| सितंबर-18 | -8.6 | -9.4 |
| फ़रवरी-16 | -8.6 | -8.8 |
| फ़रवरी-25 | -7.8 | -8.7 |
| कैटेगरी का औसत फ़ंड लिया गया. SEBI के वर्गीकरण के अनुसार. | ||
हर गिरावट में L&M फ़ंड्स थोड़ा ज़्यादा गिरे. यह हैरानी की बात नहीं, ज़्यादा मिड-कैप एक्सपोज़र होता ही ज़्यादा उतार-चढ़ाव वाला है. लेकिन फ़र्क़ बहुत कम है. L&M फ़ंड्स फ़्लेक्सी-कैप के मुक़ाबले कोई बड़ा अतिरिक्त जोख़िम नहीं रखते.
कौन सा चुनें?
फ़ैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आप डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड से क्या चाहते हैं. अगर ऐसा फ़ंड चाहिए जो लार्ज-कैप पर ज़्यादा टिका हो और मौक़े मिलने पर कहीं भी जा सके, तो फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड सही रहेगा. अगर पोर्टफ़ोलियो की बनावट में ही ज़्यादा मिड-कैप एक्सपोज़र चाहिए, तो L&M फ़ंड वो देते हैं.
जो भी चुनें, बुनियादी बातें एक ही हैं. हाल के आउटपरफ़ॉर्मर की जगह लंबे समय का स्थिर रिकॉर्ड देखें. और अगर दोनों कैटेगरी रखनी हों, तो अलग-अलग फ़ंड हाउस से लें. वरना आप उस डाइवर्सिफ़िकेशन के लिए पैसे दे रहे हैं जो असल में है ही नहीं.
आपके पास जो फ़ंड्स हैं वो सच में डाइवर्सिफ़ाइड हैं या नहीं, और कौन से फ़ंड्स चुनने चाहिए, यह जानना ठीक वही है जिसके लिए वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र बना है. निजी, रिसर्च पर आधारित सलाह, ताकि आपका पोर्टफ़ोलियो उतना ही काम करे जितना आप सोचते हैं कि कर रहा है.
आज ही फ़ंड एडवाइज़र से जुड़ें!यह भी पढ़ें: मल्टी-कैप और फ़्लेक्सी-कैप में क्या अंतर है?




