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सारांशः क्या आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि इस साल कौन-से स्मॉल-कैप फ़ंड्स सबसे तेज़ी से बढ़े हैं? शायद नहीं. क्योंकि बड़े नाम नहीं, बल्कि कुछ ‘डार्क हॉर्सेज़’ आगे निकले हैं. 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2025 के बीच इन फ़ंड्स ने अपने एसेट्स को तेज़ रफ़्तार से बढ़ाया है. हमने न सिर्फ़ इन्हें सूचीबद्ध किया, बल्कि ये भी समझा कि आख़िर क्यों ये अचानक हर निवेशक की नज़र में आ गए हैं.
स्मॉल-कैप फ़ंड्स के लिए ये साल आसान नहीं रहा. बतौर कैटेगरी, FY25 में अब तक इनका साइज़ 1.8 % घटा है. इसके बावजूद निवेशकों का भरोसा कम नहीं हुआ. 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2025 के बीच उन्होंने इन फ़ंड्स में लगभग ₹27,000 करोड़ का नया निवेश किया है.
ये बात हौसला देती है क्योंकि ये दिखाता है कि निवेशक अब अनुशासित रहना सीख रहे हैं और उतार-चढ़ाव के दौर में भी टिके रहने को तैयार हैं. हालांकि ये चिंता की बात भी है क्योंकि स्मॉल-कैप्स उतार-चढ़ाव वाले होते हैं और जिन निवेशकों ने अब तक इस सेगमेंट में गहरी गिरावट नहीं देखी, उन्हें इसकी तीव्रता का अंदाज़ा नहीं है. (हमने हाल ही में पिछले 15 साल के दौरान सबसे बड़ी स्मॉल-कैप गिरावटों पर एक स्टोरी की थी ताकि निवेशकों को इस कैटेगरी के जोखिम के पक्ष की याद दिलाई जा सके.)
इतना नया पैसा आने के बाद हमने देखा कि इस साल किन स्मॉल-कैप फ़ंड्स ने AUM (Assets Under Management) के लिहाज़ से सबसे तेज़ ग्रोथ की है. यानी, किसी म्यूचुअल फ़ंड के पास कुल कितना पैसा निवेशकों का है. किसी फ़ंड का AUM दो वजहों से बढ़ता है - या तो उसके पोर्टफ़ोलियो का प्रदर्शन अच्छा होता है या फिर निवेशक उसमें ज़्यादा पैसा डालते हैं.
1) बंधन स्मॉल-कैप फ़ंड (रेगुलर)
इसका AUM 1 अप्रैल को ₹10,244 करोड़ था जो 30 सितंबर तक बढ़कर ₹15,737 करोड़ हो गया - यानी 53 % की बढ़त.
सिर्फ़ छह महीने में इतनी ग्रोथ वाक़ई काबिल-ए-तारीफ़ है. इसका कारण साफ़ है. बंधन स्मॉल-कैप फ़ंड वैल्यू रिसर्च रेटिंग्स में फ़ाइव-स्टार स्कीम है और पिछले तीन सालों में ये कैटेगरी का टॉप-परफ़ॉर्मर रहा है, जिसने 33.1% वार्षिक रिटर्न दिया है.
SIP निवेशकों को भी शानदार रिटर्न मिला है - पिछले तीन सालों में औसतन 30% से ज़्यादा का रिटर्न. पांच सालों में इसका SIP रिटर्न 28.6 % रहा, जो पूरी कैटेगरी में सबसे ऊंचा है.
अब जोखिम की बात करें. तीन साल का स्टैंडर्ड डेविएशन (SD) 17.9% है, जो BSE 250 स्मॉल-कैप TRI के 18.9 % से कम है. SD बताता है कि फ़ंड के रिटर्न कितने उतार-चढ़ाव वाले हैं. कम SD का मतलब है स्थिर प्रदर्शन. यानी बंधन फ़ंड ने बेहतर रिटर्न दिए हैं, वो भी कम उतार-चढ़ाव के साथ.
सॉर्टिनो रेशियो (Sortino Ratio), जो सिर्फ़ नकारात्मक गिरावट को मापता है, इसके लिए और मज़बूत संकेत देता है. इसका तीन साल का सॉर्टिनो रेशियो 1.8 है, जो स्मॉल-कैप इंडेक्स और कैटेगरी औसत (1.2) दोनों से ऊंचा है. इसका मतलब, बंधन फ़ंड ने बेहतर रिटर्न के साथ स्मार्ट रिस्क-मैनेजमेंट भी किया है.
इसके अलावा, पांच साल का डाउनसाइड रेशियो 86 % है - यानी जब मार्केट 10 % गिरा, तो ये फ़ंड केवल 8.6 % गिरा. ये दिखाता है कि बाज़ार की गिरावटों में भी इस फ़ंड ने निवेशकों की पूंजी को बेहतर तरीके से संभाला है.
2) एडेलवाइस स्मॉल-कैप फ़ंड (रेगुलर)
इस फ़ंड का कॉर्पस फ़ाइनेंशियल ईयर 25 की शुरुआत में ₹4,237 करोड़ था, जो 30 सितंबर तक बढ़कर ₹5,057 करोड़ हो गया - यानी 19.4 % की बढ़त.
ये 4-स्टार रेटेड फ़ंड निवेशकों के बीच लगातार लोकप्रिय हो रहा है. हाल का प्रदर्शन भले बंधन फ़ंड जितना नहीं रहा, लेकिन फिर भी मज़बूत है. तीन साल का रिटर्न 22.5% और पांच साल का 30.8%. वहीं, BSE 250 स्मॉल-कैप TRI ने इन्हीं अवधियों में क्रमशः 22.6 और 28.6 % रिटर्न दिया.
उतार-चढ़ाव के मामले में भी एडेलवाइस का प्रदर्शन बेहतर रहा. तीन साल का SD 15.9% है, जो बंधन फ़ंड (17.9%) और कैटेगरी औसत (17.1%) दोनों से कम है.
इसका सॉर्टिनो रेशियो 1.26 है, जो इंडेक्स और औसत दोनों (1.2) से बेहतर है. पांच साल का डाउनसाइड रेशियो 76.3% रहा, यानी ये फ़ंड मार्केट गिरावट में भी निवेशकों को ज़्यादा सुरक्षा देता है.
3) HDFC स्मॉल-कैप फ़ंड (रेगुलर)
पहले से ही इस कैटेगरी के सबसे बड़े फ़ंड्स में से एक, HDFC स्मॉल-कैप फ़ंड ने सिर्फ़ छह महीनों में ₹6,000 करोड़ जोड़े. इसका AUM ₹30,880 करोड़ से बढ़कर ₹36,828 करोड़ हो गया - यानी 19.3 % की बढ़त.
यह 4-स्टार रेटेड स्कीम समय के साथ लगातार प्रदर्शन करती रही है और लगभग हर अवधि में BSE 250 स्मॉल-कैप TRI से बेहतर रिटर्न दिया है.
- तीन साल: 24.6% बनाम 22.6%
- पांच साल: 32.1% बनाम 28.6%
- सात साल: 20.8% बनाम 19.9%
- 10 साल: 19.9% बनाम 15.8%
इसका तीन साल का SD 15.3% है, जो एडेलवाइस से भी कम है. यानी ये कैटेगरी के सबसे स्थिर फ़ंड्स में से एक है.
सॉर्टिनो रेशियो 1.5 है, जो इंडेक्स और साथियों (1.2) दोनों से ऊंचा है. पांच साल का डाउनसाइड रेशियो 75.2% है, जो इन तीनों में सबसे कम है - यानी इसने मार्केट गिरावट में निवेशकों की पूंजी को सबसे ज़्यादा बचाया.
निष्कर्ष
स्पष्ट है कि इन फ़ंड्स के AUM में हुए भारी बढ़ोतरी सिर्फ़ निवेशकों के उत्साह की वजह से नहीं, बल्कि मज़बूत और स्थायी प्रदर्शन के कारण है.
लेकिन सवाल है, क्या इनमें निवेश किया जाना चाहिए? क्या ये वैल्यू रिसर्च की रेकमेंडेशन में शामिल हैं?
इसका जवाब है वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र जो एक पर्सनलाइज़्ड, डेटा-आधारित सर्विस जो आपको बेहतरीन म्यूचुअल फ़ंड पोर्टफ़ोलियो बनाने में मदद करती है.
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