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4 महीने की मंदी के बाद नवंबर में इक्विटी फ़ंड में निवेश बढ़ा

फ़्लेक्सी-कैप, लार्ज एंड मिडकैप और मिड-कैप फ़ंड्स ने बाज़ार के मिले-जुले माहौल में बढ़त दिलाई

फ़्लेक्सी-कैप, लार्ज एंड मिडकैप और मिड-कैप फ़ंड्स ने बाज़ार के मिले-जुले माहौल में बढ़त दिलाईAman Singhal/AI-Generated Image

सारांशः चार महीने की नरमी के बाद नवंबर में इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड में इनफ़्लो बढ़ा और ये बढ़कर ₹29,911 करोड़ तक पहुंच गया. SIP का मोमेंटम स्थिर रहा और हाइब्रिड फ़ंड्स में लगातार स्थिर लोकेशन मिलता रहा, जबकि गोल्ड ETF इनफ़्लो में नरमी देखी गई.

नवंबर 2025 में म्यूचुअल फ़ंड इनफ़्लो में सुधार देखने को मिला. इक्विटी स्कीमों में चार महीनों की सुस्ती के बाद निवेश बढ़ा. इस सुधार के साथ हाइब्रिड स्कीमों में स्थिर निवेश जारी रहा जिन्हें मल्टी-एसेट और आर्बिट्राज़ स्ट्रेटेजी के ज़रिए निवेशकों से निरंतर समर्थन मिला.

एसोसिएशन ऑफ़ म्यूचुअल फ़ंड्स इन इंडिया यानी AMFI के आंकड़ों के अनुसार इक्विटी-ओरिएंटेड फ़ंड्स में नवंबर में ₹29,911 करोड़ का नेट इनफ़्लो आया. अक्तूबर में ये ₹24,690 करोड़ था. ये बढ़त जुलाई से चल रही सुस्ती को तोड़ती है और इक्विटी फ़ंड्स में पॉज़िटिव इनफ़्लो के सिलसिले को 57 महीनों तक बढ़ा देती है. इससे रिटेल निवेशकों की स्थिरता और निरंतर निवेश का नज़रिया साफ़ दिखाई देता है.

हालांकि नए जोश के बावजूद, महीने के दौरान मार्केट का परफ़ॉर्मेंस मिला-जुला रहा. BSE सेंसेक्स में 2 प्रतिशत की बढ़त देखी गई. BSE मिडकैप इंडेक्स 0.4 प्रतिशत ऊपर रहा, जबकि BSE स्मॉलकैप इंडेक्स 3.4 प्रतिशत गिरा. ये बताता है कि अलग-अलग हिस्सों में निवेशकों की भावना असमान रही.

इक्विटी में, फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड्स में सबसे ज़्यादा ₹8,135 करोड़ का इनफ़्लो आया. इसके बाद लार्ज-एंड-मिडकैप फ़ंड्स में ₹4,503 करोड़ और मिड-कैप फ़ंड्स में ₹4,487 करोड़ आए. ये संकेत देता है कि निवेशक लार्ज कैप के बाहर बेहतर ग्रोथ के मौक़ों की तलाश जारी रखे हुए हैं. स्मॉल-कैप फ़ंड्स में भी ₹4,406 करोड़ का अच्छा इनफ़्लो देखने को मिला.

SIP इनफ़्लोज़

नवंबर में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) में इनफ़्लो ₹29,445 करोड़ रहा, जो अक्तूबर के ₹29,529 करोड़ से थोड़ा कम था. AMFI के चीफ़ एग्ज़ीक्यूटिव वेंकट एन चलसानी के अनुसार ये गिरावट सिर्फ़ इसलिए दिखी क्योंकि 29 और 30 नवंबर वीकेंड पर पड़े और डेबिट अगले महीने यानी 1 दिसंबर को चला गया. उनके अनुसार ये निवेश व्यवहार में बदलाव नहीं है और SIP के ज़रिए निवेशकों की प्रतिबद्धता मज़बूत बनी हुई है.

कमोडिटी सेगमेंट में क़ीमती धातुओं में उल्टा ट्रेंड दिखा. गोल्ड ETF में नवंबर में ₹3,741 करोड़ आए, जबकि अक्तूबर में ये ₹7,743 करोड़ था. ये कई महीनों की तेज़ी के बाद कुछ मुनाफ़ा वसूली का संकेत देता है. वहीं सिल्वर ETF में ₹2,154 करोड़ का इनफ़्लो आया जिससे उनके कुल एसेट लगभग ₹49,000 करोड़ के आसपास पहुंच गए.

इसी दौरान डेट फ़ंड्स से लिक्विड और ओवरनाइट कैटेगरी में सबसे ज़्यादा ₹25,693 करोड़ का नेट आउटफ़्लो दर्ज किया.

स्पेशलाइज़्ड इन्वेस्टमेंट फ़ंड यानी SIF के एसेट नवंबर में बढ़कर ₹2,932 करोड़ हो गए. पिछली महीने ये ₹2,010 करोड़ थे.

ये भी पढ़ें: बाज़ार में तेज़ी के बावजूद अक्तूबर में इक्विटी फ़ंड के नेट इनफ़्लो में गिरावट

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