फ़र्स्ट पेज

भारत की पैसे से जुड़ी ख़राब आदतों को ठीक करना

ET Wealth के लिए 15 साल लिखने के अनुभव से निकले वे अहम सबक, जिन्होंने औसत भारतीय निवेशक के भविष्य को दिशा दी

ET Wealth के लिए 15 साल लिखने के अनुभव से निकले वे अहम सबक, जिन्होंने औसत भारतीय निवेशक के भविष्य को दिशा दीAditya Roy/AI-Generated Image

back back back
5:38

जब मैंने इस सीरीज़ में कई साल पहले अपना पहला कॉलम लिखा था, तब मैं एक बिल्कुल अलग भारत से बात कर रहा था. उस समय म्यूचुअल फ़ंड में निवेश करने वालों की संख्या आज के मुक़ाबले बहुत कम थी और ये कल्पना करना भी मुश्किल था कि आम बचतकर्ता एक दिन SIP के ज़रिये हर महीने ₹29,000 करोड़ निवेश करेंगे. तब ये किसी कल्पना जैसा लगता था. लेकिन आज यही हक़ीक़त है.

इस पब्लिकेशन के साथ मेरा जुड़ाव इन 15 सालों से भी काफ़ी पहले का है. ET Wealth, मूल ET Investor’s Guide के बाद शुरू हुआ कॉलम है. ET Investor’s Guide से मेरा रिश्ता 1993 से, यानी तीन दशक से भी ज़्यादा समय से रहा है. उन दिनों मैंने इसके पन्नों में म्यूचुअल फ़ंड कवरेज की शुरुआत की थी और कई साल तक Investor’s Guide में का डेटा और एनालेसिस Value Research से ही जाता था. जब ET Now टीवी चैनल शुरू हुआ, तो हमने इन्वेस्टर्स गाइड ऑन आइडियल पोर्टफ़ोलियोज नाम का साप्ताहिक शो भी लंबे समय तक चलाया. इन सभी रूपों में एक बात कभी नहीं बदली: आम बचतकर्ताओं को अपने पैसों के बारे में समझने में मदद करना.

उन शुरुआती कॉलम्स को पलटकर देखता हूं, तो ये साफ़ दिखता है कि सलाह का बड़ा हिस्सा आज भी वैसा ही है. चीज़ों को सरल रखें, सेल्सपर्सन पर भरोसा न करें, डेरिवेटिव्स से दूर रहें, एंडोमेंट या ULIP की जगह टर्म इंश्योरेंस लें और SIP को मेहनत करने दें. समझदारी भरे निवेश के सिद्धांत इसलिए नहीं बदले क्योंकि इंसानी स्वभाव नहीं बदला. जो चीज़ बदली है, वो है वह इंफ़्रास्ट्रक्चर, जिसने इन सिद्धांतों पर चलना आसान बना दिया है, और ऐसे लोगों की संख्या बदली है, जो सच में ऐसा कर रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः आपके पैसों का ब्लैक होल

2017 में मैंने लिखा था कि फ़ाइनेंशियल सर्विसेज़ इंडस्ट्री मूल रूप से एक ज़ीरो-सम गेम है, जहां प्रोवाइडर का फ़ायदा ग्राहक की जेब से आता है. ये बात आज भी सही है. मैंने इंश्योरेंस बेचने वालों की चालाकी और मैनिपुलेटिव तरीक़ों के बारे में लिखा था, जो ज़्यादा कमीशन के लिए महंगे प्रोडक्ट्स बेचते हैं. ये समस्या आज भी बनी हुई है. मैंने डेरिवेटिव ट्रेडिंग के ख़तरों को लेकर चेताया था और बताया था कि कैसे ब्रोकर्स अनजान निवेशकों को उस जाल में फंसा रहे हैं, जिसे मैंने “effendo” कहा था, यानी ऐसा जादू, जो पैसे को ग़ायब कर देता है. आज, जब F&O ट्रेडिंग वॉल्यूम कई गुना बढ़ चुका है, ये चेतावनी पहले से कहीं ज़्यादा प्रासंगिक हो गई है.

फिर भी, इन लगातार बनी रहने वाली समस्याओं के साथ-साथ कुछ बहुत अच्छा भी हुआ है. भारत में निवेश के तरीक़े में एक शांत क्रांति आई है. जो मासिक SIP आंकड़ा कभी नामुमकिन लगता था, वह अब सामान्य हो गया है. इससे भी ज़्यादा अहम बात ये है कि निवेशकों ने सबसे ज़रूरी सबक सीख लिया है: बाज़ार के उतार-चढ़ाव के दौरान भी SIP जारी रखना.

यही व्यवहार में आया बदलाव असली जीत है. अपने शुरुआती कॉलम्स में मैंने काफ़ी समय ये समझाने में लगाया कि SIP इसलिए काम करती है-रुपी-कॉस्ट एवरेजिंग की गणित, ऑटोमेटेड निवेश का मनोविज्ञान और बाज़ार गिरने पर भी निवेश बनाए रखने की ताक़त. मैंने Nassim Nicholas Taleb के विचार से प्रेरणा लेकर लिखा था कि SIP “antifragile” होती है, यानी वोलैटिलिटी से उसे फ़ायदा होता है. उस समय ये तर्क बार-बार देने पड़ते थे, क्योंकि निवेशक ज़रा-सी परेशानी में घबरा कर SIP रोक देते थे.

आज के प्रमाण बताते हैं कि निवेशकों की एक नई पीढ़ी ने ये सबक़ भीतर तक अपना लिया है. उन्होंने बाज़ार को गिरते और फिर संभलते देखा है. उन्होंने रास्ते पर टिके रहने का फ़ायदा ख़ुद महसूस किया है. 2017 में SIP शुरू करने वाला निवेशक अब कई मार्केट साइकल देख चुका है और ऐसे रिटर्न के साथ बाहर आया है, जो इस तरीक़े की पुष्टि करते हैं. ये अनुभव सिर्फ़ मेरे शब्द पढ़ने से कहीं ज़्यादा क़ीमती है.

ये भी पढ़ेंः मार्केट लड़खड़ाए तो SIP का क्या किया जाए?

भारतीय फ़ाइनेंस में डिजिटली बदलाव इसकी बड़ी वजह रही है. 2017 में SIP शुरू करने के लिए काग़ज़ी काम, आमने-सामने KYC और काफ़ी मेहनत लगती थी. आज ये काम स्मार्टफ़ोन पर कुछ मिनटों में हो जाता है. जो रुकावटें पहले अच्छे फ़ाइनेंशियल व्यवहार को मुश्किल बनाती थीं, वे काफ़ी हद तक ख़त्म हो चुकी हैं. बैंक अकाउंट, म्यूचुअल फ़ंड निवेश और ट्रैकिंग टूल्स, सब कुछ स्क्रीन पर एक टैप की दूरी पर है. इस इंफ़्रास्ट्रक्चर ने अच्छा व्यवहार पैदा नहीं किया, लेकिन उसके रास्ते की बाधाएं ज़रूर हटा दीं.

वैल्यू रिसर्च की स्थापना को तीन दशक से ज़्यादा हो चुके हैं और इस मैगज़ीन को शुरू किए 15 साल हो गए हैं. और भारतीय बचतकर्ता के भविष्य को लेकर मैं आज जितना आशावादी हूं, उतना पहले कभी नहीं रहा. हां, समस्याएं अब भी हैं. इंश्योरेंस की मिस-सेलिंग जारी है. डेरिवेटिव ट्रेडिंग एक दानव का रूप ले चुकी है. फ़ाइनेंशियल इंफ़्लुएंसर्स लाखों लोगों को ख़तरनाक सलाह बेच रहे हैं. इंडस्ट्री के प्रोत्साहन आज भी ग्राहकों के हितों से मेल नहीं खाते. लेकिन समझदारी भरे निवेश की बुनियाद, यानी लॉन्ग-टर्म के लिए डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड्स में नियमित निवेश, अब उस तरह जड़ जमा चुकी है, जो यहां लिखना शुरू करते समय मुश्किल लगती थी.

काम अभी पूरा नहीं हुआ है. अब भी बहुत से लोगों को टर्म इंश्योरेंस की जगह ULIP बेचे जा रहे हैं, बहुत से युवा निवेशक F&O में जुआ खेल रहे हैं और बहुत से बचतकर्ता ऐसे कॉन्सेप्ट्स के पीछे भाग रहे हैं, जिन्हें वे समझते नहीं हैं. लेकिन दिशा सही है. हर महीने SIP के ज़रिये ₹29,000 करोड़ म्यूचुअल फ़ंड्स में जा रहे हैं, जो लाखों परिवारों के समझदारी भरे तरीक़े से वेल्थ बनाने का संकेत है.

अगर यहां लिखा गया मेरा कॉलम इस बदलाव में थोड़ा-सा भी योगदान दे पाया है, तो ये सभी साल पूरी तरह सार्थक रहे हैं.

ये भी पढ़ेंः एक दिन बनाम कई साल

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

इंटरनेशनल फ़ंड्स: एकमुश्त निवेश के लिए एक ही विकल्प बचा है

पढ़ने का समय 4 मिनटआकार रस्तोगी

क्या बड़ा कैपिटल गेन हुआ है? ऐसे लग सकता है कम टैक्स

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

क्यों PPFAS के CIO को FII की बिक़वाली की चिंता नहीं है?

पढ़ने का समय 7 मिनटLekisha Katyal

सोने की क़ीमत दोगुनी होना अच्छी बात नहीं, समस्या है

पढ़ने का समय 5 मिनटधीरेंद्र कुमार

सबसे ज़्यादा लोकप्रिय ग्लोबल फ़ंड्स में सबसे ज़्यादा रिस्क है

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

SEBI का नया नियम ग़लत लोगों की मदद करता है

SEBI का नया नियम ग़लत लोगों की मदद करता है

जिन लोगों को थर्ड-पार्टी SIPs से सबसे ज़्यादा फ़ायदा होता, यह नियम उन लोगों के लिए नहीं बनाया गया है

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी