फंड वायर

क्या आपका डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड असल में निफ़्टी 100 इंडेक्स फ़ंड है?

ये डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड भारत की 100 सबसे बड़ी कंपनियों जैसा ही पोर्टफ़ोलियो रखते हैं और ज़्यादातर अपने बेंचमार्क से पीछे रहे हैं.

5-diversified-equity-funds-secretly-mirror-nifty-100-index-fundVinayak Pathak/AI-Generated Image

सारांशः हर डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड वो नहीं देता जो अपने नाम के तहत भरोसा दिलाते हैं. पांच ELSS और फ़्लेक्सी कैप फ़ंड पर नज़दीक से नज़र डालने पर हर निवेशक के लिए ज़रूरी सवाल खड़ा होता है.

डाइवर्सिफ़ाइड इक्विटी फ़ंड एक बुफ़े की तरह काम करते हैं. फ़ंड मैनेजर पूरे बाज़ार में से, यानी लार्ज, मिड और स्मॉल कैप में से, शेयर चुन सकता है और आपको एक ऐसा पोर्टफ़ोलियो दे सकता है जो सबसे अच्छे मौक़े को दर्शाता हो.

लेकिन कुछ डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड बुफ़े नहीं चला रहे. वो भारत की 100 सबसे बड़ी कंपनियों जैसी ही चीज़ें, लगभग वैसे ही अनुपात में, परोस रहे हैं. यह कुछ ऐसा है, जैसे आपने डाइवर्सिफ़िकेशन की मांग की लेकिन आपको एक तय मेनू मिला.

इस वक़्त, कुछ ELSS (इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम) और फ़्लेक्सी कैप फ़ंड के पोर्टफ़ोलियो निफ़्टी 100 यानी मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के हिसाब से भारत की 100 सबसे बड़ी कंपनियों के इंडेक्स जैसे दिखते हैं. उनकी आधे से ज़्यादा होल्डिंग इंडेक्स से मेल खाती है. उनका AUM कैटेगरी के औसत से कम है, यानी आकार उनकी मजबूरी नहीं है. वहीं, उनका तीन साल का रिटर्न या तो बेंचमार्क से पीछे रहा है या बस थोड़ा आगे.

क्या ये फ़ंड सुरक्षित बने हुए हैं? या साइज़ एक समस्या है? आइए क़रीब से देखते हैं.

पांच फ़ंड, लेकिन एक ही समस्या

पोर्टफ़ोलियो ओवरलैप किसी फ़ंड की होल्डिंग और किसी इंडेक्स के बीच समानता नापता है. 60% ओवरलैप वाला फ़ंड निफ़्टी 100 से 60% मिलता-जुलता दिखता है.

अल्फ़ा नापता है कि कोई फ़ंड बाज़ार के जोख़िम के हिसाब से अपने बेंचमार्क से कितना आगे रहा. नेगेटिव अल्फ़ा का मतलब है कि फ़ंड बेंचमार्क से पीछे रहा.

ELSS और फ़्लेक्सी कैप में पांच ऐसे फ़ंड हैं जिनमें निफ़्टी 100 से 50% से ज़्यादा ओवरलैप है, AUM कैटेगरी के औसत से कम है और तीन साल का अल्फ़ा ज़ीरो से थोड़ा ज़्यादा या नेगेटिव है.

बेंचमार्क की नकल करने वाले फ़ंड

बेंचमार्क की नकल करने वाले पांच डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड

फ़ंड
कैटेगरी निफ़्टी 100 से ओवरलैप (%) AUM (करोड़ ₹) तीन साल का अल्फ़ा (%)
Groww ELSS Tax Saver Fund ELSS 61.3 45.7 -1.1
UTI Children's Equity Fund फ़्लेक्सी कैप 53.8 1,010.10 -1.6
Mahindra Manulife ELSS Tax Saver ELSS 54.7 827.8 -0.3
Sundaram ELSS Tax Saver ELSS 54.2 1,183.40 -0.2
Sundaram Flexi Cap Fund फ़्लेक्सी कैप 53.8 1,825.60 0.2
31 मार्च 2026 तक का डेटा, डायरेक्ट प्लान का है. अल्फ़ा तीन साल में हर फ़ंड के कैटेगरी बेंचमार्क की तुलना में नापा गया. ELSS के लिए कैटेगरी औसत AUM ₹2,294.4 करोड़ और फ़्लेक्सी कैप के लिए ₹2,309 करोड़ है.

ऊपर की टेबल दिखाती है कि पांच में से चार फ़ंड का तीन साल का अल्फ़ा नेगेटिव रहा. UTI Children's Equity Fund -1.6% के साथ बेंचमार्क से सबसे ज़्यादा पीछे है. Sundaram के दोनों फ़ंड और Mahindra Manulife ELSS शून्य के आसपास रहे. हालांकि, Sundaram Flexi Cap अकेला 0.2% के साथ पॉज़िटिव है.

Groww ELSS Tax Saver सबसे स्पष्ट उदाहरण है: निफ़्टी 100 से 61.3% ओवरलैप, -1.1% अल्फ़ा और ₹45.7 करोड़ का AUM. यह इतना छोटा है कि ज़्यादातर निवेशकों की नज़र नहीं पड़ेगी, लेकिन आंकड़े बात साफ़ करते हैं.

आकार यहां बहाना नहीं है

बड़े AUM वाले एक्टिव फ़ंड अक्सर लार्ज-कैप इंडेक्स की तरफ़ झुकाव रखते हैं. एक बार जब फ़ंड एक ख़ास साइज़ से बड़ा हो जाता है, तो एकल शेयर में निवेश की सीमा और मिड व स्मॉल-कैप शेयरों की कम लिक्विडिटी मिलकर पोर्टफ़ोलियो को सबसे बड़े नामों में धकेल देती है. मैनेजर को अपनी पसंद से नहीं, बल्कि मजबूरी में निफ़्टी 100 शेयर रखने पड़ते हैं.

यह बात इन पांच फ़ंड पर लागू नहीं होती. हर एक का AUM कैटेगरी के औसत से कम है. ₹1,000 करोड़ के एसेट बेस वाला फ़्लेक्सी कैप फ़ंड बिना लिक्विडिटी की समस्या के मिड और स्मॉल कैप में अच्छा-ख़ासा निवेश कर सकता है. यहां लार्ज-कैप में ज़्यादा निवेश एक पोर्टफ़ोलियो का फ़ैसला है. मैनेजर ने ही इसका चुनाव किया.

यह फ़र्क़ मायने रखता है. बड़ा फ़ंड जो इंडेक्स की नकल करता है, कम से कम स्ट्रक्चरल मजबूरी में है. छोटा फ़ंड जो इंडेक्स की नकल करता है, वो एक एक्टिव दांव लगा रहा है कि इंडेक्स ही असली रिटर्न देगा और फिर ऊपर से एक्टिव मैनेजमेंट फ़ीस भी ले रहा है.

इंडेक्स की नकल करने वाला एक छोटा फंड, इस बात पर सक्रिय दांव लगा रहा है कि रिटर्न इंडेक्स में ही मिलेंगे, और फिर इसके ऊपर वह 'एक्टिव मैनेजमेंट फ़ीस' भी वसूल रहा है।

आप क्या गंवा रहे हैं

जब कोई डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड लार्ज-कैप इंडेक्स के क़रीब रहता है, तो दो बातें होती हैं.

पहली, फ़ंड लार्ज कैप के साथ-साथ चलेगा. और दूसरी, जब मिड और स्मॉल कैप किसी दौर में आगे निकलते हैं, तो फ़ंड उस फ़ायदे से चूक जाता है, और कभी-कभी ऐसा तेज़ी से होता है.

यह एक असली समझौता है. फ़्लेक्सी कैप या ELSS निवेश में डाइवर्सिफ़िकेशन का फ़ायदा इन्हीं दूसरे हिस्सों के अपने अच्छे सालों में योगदान से आता है. टॉप 100 शेयरों पर केंद्रित पोर्टफ़ोलियो में यह फ़ायदा नहीं मिलता.

जब यही फ़ंड तीन साल में बेंचमार्क को भी मात नहीं दे पाते, तो इन ख़ास फ़ंड में एक्टिव फ़ीस देने का तर्क कमज़ोर पड़ जाता है. निफ़्टी 100 इंडेक्स फ़ंड, या टैक्स बचत के लिए ELSS इंडेक्स फ़ंड, कम ख़र्चे पर वैसा ही फ़ायदा देता.

कैटेगरी समस्या नहीं है 

ELSS और फ़्लेक्सी कैप दोनों में ऐसे फ़ंड हैं जिन्होंने अच्छा अल्फ़ा दिया है और सच में डाइवर्सिफ़ाइड पोर्टफ़ोलियो चलाया है. समस्या कैटेगरी नहीं है. समस्या यह है कि कैटेगरी का नाम आपको अंदर की बात नहीं बताता.

किसी भी एक्टिव डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड में पैसा लगाने से पहले दो सवाल पूछने लायक़ हैं: क्या पोर्टफ़ोलियो उस इंडेक्स से काफ़ी अलग दिखता है जिसे यह बेंचमार्क मानता है? और क्या फ़ंड ने एक सही अवधि में उस बेंचमार्क को पार किया है?

जहां दोनों जवाब नहीं हों, वहां नया पैसा लगाने से पहले सिर्फ़ कैटेगरी के नाम से ज़्यादा जांच ज़रूरी है.

क्या आपका डाइवर्सिफ़ाइड फ़ंड भी बेंचमार्क की नकल कर रहा है?

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यह भी पढ़ें: क्या पिछले साल का बेस्ट म्यूचुअल फ़ंड ख़रीदना चाहिए? जानिए यहां

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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