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सारांशः SIP रिटर्न पर सवाल उठाने वाले एक वायरल दावे ने निवेशकों के मन में फिर से शक़ पैदा कर दिया है. यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि यह आंकड़ा आया कहां से और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले निवेशकों को क्या जानना चाहिए.
सारांशः SIP रिटर्न पर सवाल उठाने वाले एक वायरल दावे ने निवेशकों के मन में फिर से शक़ पैदा कर दिया है. यह लेख इस बात की पड़ताल करता है कि यह आंकड़ा आया कहां से और किसी नतीजे पर पहुंचने से पहले निवेशकों को क्या जानना चाहिए. हर कुछ महीनों में, कोई न कोई आंकड़ा सोशल मीडिया पर सामने आता है और अपनी अलग ही ज़िंदगी जीने लगता है. इस बार यह आंकड़ा है 6.7 प्रतिशत, जिसे यह बताते हुए पेश किया जा रहा है कि Nifty पर SIP ने बीते 20 सालों में यही असली रिटर्न दिया है, जबकि इंडस्ट्री कथित तौर पर 12 से 15 प्रतिशत का वादा करती है. X (पहले Twitter) पर इसे क़रीब पांच लाख बार देखा जा चुका है, साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि पूरा SIP कारोबार ही करोड़ों भरोसा करने वाले भारतीयों के साथ किया गया एक धोखा है. इस समस्या के लिए एक नाम भी है, जो एक इतालवी सॉफ़्टवेयर इंजीनियर अल्बर्तो ब्रैंडोलिनी ने गढ़ा था: 'बुलशिट असिमेट्री प्रिंसिपल' (Bullshit Asymmetry Principle). उन्होंने इसे बड़े सटीक ढंग से कहा था, "बकवास को ग़लत साबित करने में जितनी ऊर्
ये लेख पहली बार जुलाई 13, 2026 को पब्लिश हुआ.
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