Anand Kumar/AI-Generated Image
सारांशः SME IPO की भागदौड़ हाल के सालों में और तेज़ हुई है. इस क़तार में शामिल होने से पहले, यह समझना ज़रूरी है कि आंकड़े लंबी अवधि की कामयाबी की संभावना के बारे में क्या कहते हैं.
2016 के बाद लिस्ट हुई 1,192 SME कंपनियों में से 52 प्रतिशत आज अपने इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार कर रही हैं.
सबसे ज़्यादा कोट किया जाने वाला यह आंकड़ा, कहानी बताने का सबसे नरम तरीक़ा भी है, क्योंकि इसमें यह मान लिया जाता है कि आपने शेयर इश्यू प्राइस पर ख़रीदे थे. लेकिन बुरी तरह ओवरसब्सक्राइब हुए SME IPO में लगभग कोई भी ऐसा नहीं करता.
मिसाल के तौर पर NACDAC Infrastructure को लें. इसका 2024 में आया IPO लगभग 1,976 गुना सब्सक्राइब हुआ था, यानी एलॉटमेंट क़रीब-क़रीब एक लॉटरी बन गई और नतीजतन ज़्यादातर आवेदकों को कुछ नहीं मिला. कंपनी ने अपने शेयर ₹35 पर इश्यू किए. वे 90 प्रतिशत की उछाल के साथ ₹66.5 पर खुले और अब क़रीब ₹26 पर कारोबार कर रहे हैं.
जिसे एलॉटमेंट मिला, वह क़रीब एक चौथाई नुक़सान में है. लिस्टिंग वाले दिन ख़रीदने वाला, जो कि लगभग हर रिटेल निवेशक की स्थिति थी, क़रीब 61 प्रतिशत नुक़सान में है. इश्यू प्राइस सिर्फ़ चंद ख़ुशनसीब लोगों की क़िस्मत है. लिस्टिंग प्राइस का फ़ायदा उससे संबंधित हर किसी के लिए है.
इसलिए यह स्टोरी SME IPO को लिस्टिंग प्राइस से मापती है, यानी वह क़ीमत जो एक सामान्य निवेशक असल में चुका सकता है.
लिस्टिंग का उछाल ही टोल है
इश्यू जितना गर्म होता है, अंदर आने के लिए उतना ही ज़्यादा टोल चुकाना पड़ता है.
2016 के बाद के सभी SME IPO में, आम तौर पर डेब्यू के दिन शेयर क़रीब 6 प्रतिशत उछले और 73 प्रतिशत इश्यू अपने इश्यू प्राइस से ऊपर खुले. जिन 202 कंपनियों के सब्सक्रिप्शन आंकड़े उपलब्ध हैं, जो ज़्यादातर हाल की लिस्टिंग हैं, उनमें सब्सक्रिप्शन का स्तर लिस्टिंग के उछाल के साथ काफ़ी मिलता था, लेकिन लिस्टिंग के बाद निवेशकों को मिले रिटर्न से इसका लगभग कोई ताल्लुक़ नहीं था.
जिन IPO में निवेशकों ने घुसने के लिए सबसे ज़्यादा ज़ोर लगाया, वे बाद में औसतन कुछ ख़ास बेहतर साबित नहीं हुए.
एलॉटमेंट की क़तार लगातार लंबी होती गई है. SEBI के अपने आंकड़े बताते हैं कि हर सफल एलॉटी के मुक़ाबले आवेदनों की संख्या 2021-22 में चार से बढ़कर अगले साल 46 हो गई, और फिर 2023-24 में 245 तक पहुंच गई. इतने कठिन मौक़ों पर, इश्यू प्राइस चंद ख़ुशनसीब लोगों को दी गई एक रियायत बनकर रह जाती है. लिस्टिंग प्राइस वह क़ीमत है जो मार्केट बाक़ी सबसे वसूलता है.
ख़ामोश कमाई करने वाले शेयर
ऐसे शेयर जो बिना किसी शोर-शराबे के लिस्ट हुए, फिर भी पैसा कई गुना बढ़ा दिया.
| City Pulse Multiventures | 2019 | -5 | 32 | 64 | SME board |
|---|---|---|---|---|---|
| Spectrum Electrical Industries | 2018 | 2.3 | 30 | 55 | Mainboard |
| Solex Energy | 2018 | -16.3 | 23 | 45 | Mainboard |
| NPST | 2021 | 4.9 | 19 | 82 | Mainboard |
| Shri Venkatesh Refineries | 2021 | 5 | 17 | 82 | SME board |
| Pansari Developers | 2016 | 0 | 16 | 33 | Mainboard |
| Rhetan TMT | 2022 | 0 | 14 | 99 | Mainboard |
| Laxmi Goldorna House | 2020 | 0 | 14 | 53 | Mainboard |
| Creative Newtech | 2017 | 1 | 12 | 31 | Mainboard |
| Megastar Foods | 2018 | 1.7 | 12 | 36 | Mainboard |
सबसे ज़ोरदार डेब्यू
लिस्टिंग-डे की 10 सबसे बड़ी उछालें 242 से 387 प्रतिशत के बीच रहीं. इनमें से आठ अब अपने लिस्टिंग प्राइस से नीचे कारोबार कर रही हैं और छह में 60 प्रतिशत से ज़्यादा गिरावट आ चुकी है.
| Winsol Engineers | 2024 | 387 | -67% |
|---|---|---|---|
| Kay Cee Energy & Infra | 2024 | 367 | -64% |
| Maxposure | 2024 | 339 | -76% |
| Vivo Collaboration Solutions | 2021 | 333 | -78% |
| Medicamen Organics | 2024 | 305 | -84% |
| GP Eco Solutions India | 2024 | 299 | 16% |
| Divine Power Energy | 2024 | 288 | 274% |
| Purv Flexipack | 2024 | 266 | -82% |
| Esconet Technologies | 2024 | 245 | -58% |
| Goyal Salt | 2023 | 242 | -9% |
| इनमें से नौ कंपनियां 2023-24 के उफ़ान में लिस्ट हुई थीं. जिस ख़रीदार ने उछाल की क़ीमत चुकाई, उसने असल में टैक्स ही चुकाया. | |||
आंकड़ों को लिस्टिंग प्राइस पर फिर से टिकाएं, तो हर हेडलाइन और बिगड़ जाती है. इश्यू प्राइस से नीचे कारोबार करने वाली कंपनियों का हिस्सा 52 प्रतिशत से बढ़कर 57 प्रतिशत हो जाता है. मीडियन रिटर्न माइनस 6 प्रतिशत से गिरकर माइनस 13 प्रतिशत पर आ जाता है. और 455 कंपनियां, यानी पूरे यूनिवर्स का एक तिहाई से ज़्यादा हिस्सा, इश्यू प्राइस से ऊपर खुलकर बाद में अपने लिस्टिंग प्राइस से भी नीचे चली गईं, यह राउंड ट्रिप इश्यू-प्राइस स्कोरबोर्ड कभी दर्ज़ नहीं करता.
विनर निकल जाते हैं और लूज़र ग़ायब हो जाते हैं
आम SME आंकड़ों में एक और गड़बड़ी छिपी है. वे सिर्फ़ उन कंपनियों को गिनते हैं जो अभी भी SME बोर्ड पर लिस्टेड हैं. लेकिन SME बोर्ड नर्सरी हैं, आख़िरी मंज़िल नहीं.
कामयाब कंपनियां मेनबोर्ड पर चली जाती हैं और वे ग्रैजुएट्स अक्सर विनर्स ही होते हैं. हमने ऐसी 200 कंपनियों को ट्रैक किया जिन्होंने यह छलांग लगाई और उन्हें उनके SME डेब्यू से मापा. उनका मीडियन रिटर्न प्लस 49 प्रतिशत रहा और 43 प्रतिशत मल्टीबैगर बन गईं, जबकि जो कंपनियां वहीं रह गईं, उनमें सिर्फ़ 17 प्रतिशत ही मल्टीबैगर बनीं.
Knowledge Marine 2021 में क़रीब ₹19 पर लिस्ट हुई थी और आज क़रीब ₹2,400 पर कारोबार कर रही है. Advait Energy और SBC Exports दोनों अपनी क़ीमत से 80 गुने से ज़्यादा बढ़ चुके हैं.
सिर्फ़ आज के SME बोर्ड से बनाया गया स्कोरबोर्ड, दौड़ का आकलन चैंपियन के मैदान छोड़ने के बाद करता है.
दूसरे सिरे पर इसका उलटा होता है.
जब कोई SME डूब जाती है या धोखाधड़ी के आरोपों में फंस जाती है, तो वह पूरी तरह एक्सचेंज से ग़ायब हो सकती है और शेयरधारकों के हाथ में ऐसे शेयर रह जाते हैं जिन्हें वे बेच भी नहीं सकते. हमारे सैंपल में डीलिस्ट हुई 20 कंपनियों का मीडियन रिटर्न माइनस 82 प्रतिशत रहा. Suumaya Corporation क़रीब ₹ 70 से गिरकर लगभग ₹1 पर आ गई. Varanium Cloud, ₹30 से गिरकर ₹6 से नीचे चली गई.
चूंकि मरे हुए टिकर सबसे पहले डेटाबेस से ग़ायब होते हैं, इसलिए 20 का यह आंकड़ा शायद असली संख्या से कम ही है.
पूरी तरह डूबने वाले शेयर
सबसे नीचे की 10 कंपनियां अपने लिस्टिंग प्राइस से 90 प्रतिशत या उससे ज़्यादा गिर चुकी हैं. इनमें से तीन डूबने से पहले मेनबोर्ड पर भी पहुंच गई थीं.
| Suumaya Corporation | 2021 | -98.6 | 70 → 1.01 | Delisted |
|---|---|---|---|---|
| Omnipotent Industries | 2021 | -97.5 | 99 → 2.50 | SME board |
| Diksha Greens | 2018 | -97.1 | 36 → 1.04 | SME board |
| Akshar Spintex | 2018 | -95.9 | 10.12 → 0.42 | Mainboard |
| Jinaam's Dress | 2019 | -95.8 | 56 → 2.37 | Delisted |
| Powerful Technologies | 2018 | -95.7 | 45 → 1.95 | Delisted |
| Jalan Transolutions | 2017 | -95.6 | 42 → 1.85 | SME board |
| Suich Industries | 2019 | -93.9 | 71.35 → 4.33 | Delisted |
| SecUR Credentials | 2017 | -92.9 | 23 → 1.63 | Mainboard |
| Debock Industries | 2018 | -91.7 | 9.86 → 0.82 | Mainboard |
| एक टेबल दिखाती है कि जब दोनों तरह के माइग्रेशन को गिना जाए, तो तस्वीर कैसी बनती है. | ||||
| गिनी गई कंपनियां | संख्या | लिस्टिंग से मीडियन रिटर्न (%) | लिस्टिंग प्राइस से नीचे (%) |
|---|---|---|---|
| अभी SME बोर्ड पर लिस्टेड (आम तौर पर इस्तेमाल होने वाला आधार) | 972 | -15.2 | 59 |
| माइग्रेट हुए विनर्स को जोड़ने पर | 1,172 | -11.8 | 56 |
| डीलिस्ट हुई फ़्लॉप कंपनियों को जोड़ने पर | 992 | -15.8 | 59 |
| पूरा रिकॉर्ड, दोनों शामिल | 1,192 | -13 | 57 |
माइग्रेशन, सबसे अच्छी कंपनियों को हटाकर बाक़ी बचे शेयरों को अच्छा दिखाता है. डीलिस्टिंग, सबसे ख़राब कंपनियों को हटाकर वही काम फिर से करती है. पूरा रिकॉर्ड इन दोनों को साथ रखता है.
औसत किसी और का है
सभी 1,192 कंपनियों में से 676 अपने लिस्टिंग प्राइस से नीचे हैं, जबकि सिर्फ़ 516 फ़्लैट या उससे ऊपर हैं.
फिर भी पूरे यूनिवर्स का औसत रिटर्न प्लस 115 प्रतिशत है.
यह पूरा आंकड़ा मुट्ठी भर नामों के कंधों पर टिका है.
10 सबसे बड़े विनर्स, जो सैंपल का एक प्रतिशत से भी कम हिस्सा हैं, आपस में औसतन क़रीब 6,000 प्रतिशत रिटर्न रखते हैं. सिर्फ़ टॉप 10वें हिस्से के परफ़ॉर्मर्स को हटा दें, तो औसत रिटर्न पलटकर माइनस 2 प्रतिशत हो जाता है.
औसत, जैकपॉट वाले नामों का है.
मीडियन बाक़ी सबका है.
जैकपॉट वाले 10 शेयर
10 सबसे बड़े विनर्स में से आठ ने 3 प्रतिशत या उससे कम के उछाल के साथ डेब्यू किया था. इनके लिए किसी ने क़तार नहीं लगाई.
| Knowledge Marine & Engineering Works | 2021 | 2.7 | 128 | 149 | Mainboard |
|---|---|---|---|---|---|
| SBC Exports | 2019 | 0 | 86 | 88 | Mainboard |
| Advait Energy Transitions | 2020 | 1.9 | 84 | 115 | Mainboard |
| Sky Gold and Diamonds | 2018 | 0.2 | 69 | 72 | Mainboard |
| Gretex Corporate Services | 2021 | 1.2 | 52 | 123 | Mainboard |
| Kesar India | 2022 | 1.5 | 50 | 166 | SME board |
| KPI Green Energy | 2019 | 1 | 45 | 66 | Mainboard |
| Concord Control Systems | 2022 | 99.9 | 41 | 169 | SME board |
| D.P. Abhushan | 2017 | 20 | 35 | 50 | Mainboard |
| DJ Mediaprint & Logistics | 2020 | 3 | 33 | 75 | Mainboard |
| पैसा कितना गुना बढ़ा, यह एडजस्टेड लिस्टिंग प्राइस पर लगाए गए Re 1 की मौजूदा क़ीमत के हिसाब से निकाला गया है. इनमें से आठ कंपनियां तब से मेनबोर्ड पर ग्रैजुएट हो चुकी हैं. | |||||
अगर कुछ है, तो यह सबक़ IPO की चली आ रही मान्यताओं के ख़िलाफ़ ही जाता है. मार्केट के सबसे बड़े विनर्स वे नाम शायद ही कभी रहे हों, जिनके लिए निवेशकों ने सबसे ज़्यादा ज़ोर लगाया.
सबक़ वही है.
विनर्स खोजने के लिए आपको लॉटरी टिकट की ज़रूरत नहीं थी.
एक ही दौर ने ज़्यादातर नुक़सान किया
रिकॉर्ड को लिस्टिंग साल के हिसाब से बांटें, तो नुक़सान साफ़ तौर पर एक ख़ास दौर में सिमटा दिखता है.
| लिस्ट हुई | कंपनियां | मीडियन होल्डिंग पीरियड (साल) | मीडियन कुल रिटर्न (%) | सालाना मीडियन रिटर्न (%) |
|---|---|---|---|---|
| 2021 से पहले | 260 | 8.1 | 10 | 1.2 |
| 2021 से 2022 | 154 | 4.1 | 11 | 2.6 |
| 2023 से 2024 | 421 | 2.4 | -28 | -12.8 |
| 2025 के बाद | 357 | 0.8 | -14 | सालाना नहीं निकाला गया |
2023 से पहले ख़रीदा गया औसत शेयर अभी भी मुनाफ़े में है.
नुक़सान का ज़्यादातर हिस्सा 2023 और उसके बाद की क्लास में सिमटा है, जो 2016 के बाद आए सभी SME IPO का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है.
फिर भी सिर्फ़ दौर को दोष देने से पहले सालाना आंकड़े देखें. पुराने विनर्स भी सिर्फ़ एक से तीन प्रतिशत सालाना की दर से बढ़े, जो इसी दौर में पूरे मार्केट के दिए रिटर्न का बस एक छोटा हिस्सा है.
हाल के दौर ने शायद सबसे ज़्यादा नुक़सान देखने को मिला है. लेकिन लंबी अवधि का रिकॉर्ड कभी भी ख़ासा मज़बूत नहीं रहा.
यह सिर्फ़ कमज़ोर मार्केट की बात नहीं थी
आसान बचाव यह है कि स्मॉल कैप शेयर अस्थिर होते हैं और SME IPO सिर्फ़ उनके साथ ही गिरे.
असल में, ऐसा नहीं है.
सितंबर 2016 से जुलाई 2026 के बीच, निफ़्टी स्मॉलकैप 250 ने क़रीब 285 प्रतिशत का रिटर्न दिया, यानी सालाना लगभग 14.4 प्रतिशत. जब हर शेयर की अपनी होल्डिंग अवधि के दौरान इसे इस इंडेक्स से मिलाकर देखा गया, तो औसत SME IPO क़रीब 50 प्रतिशत पॉइंट पीछे रहा और 70 प्रतिशत कंपनियों का प्रदर्शन बेंचमार्क से कमज़ोर रहा.
यही तुलना तेज़ी का उदाहरण भी बताती है.
औसतन, SME IPO ने बेंचमार्क को क़रीब 43 प्रतिशत अंक से पीछे छोड़ा और S&P BSE SME IPO Index 2016 के बाद सौ गुने से भी ज़्यादा बढ़ चुका है.
दोनों बातें ही सच हैं.
और दोनों को उठाने वाली भी विनर्स की वही छोटी सी लिस्ट है.
यह इंडेक्स एक ऐसा प्राइस मीटर है, जिसे कोई निवेशक ख़रीद नहीं सकता और जो चुपचाप अपने फ़्लॉप शेयरों को डीलिस्टिंग के साथ खो देता है. SME IPO के पक्ष में दिया गया तर्क आख़िर में विनर्स को अपने पास रखने का समर्थन करना है.
मीडियन शेयर, जो लिस्टिंग से 13 प्रतिशत नीचे है, दिखाता है कि इस कैटेगरी को पूरे तौर पर अपनाने का असल मतलब क्या रहा है.
SEBI ने दख़ल क्यों दिया
SEBI ने 1 जुलाई, 2025 से नियम कड़े कर दिए, और हर बदलाव उस कमज़ोरी को सुधारने के लिए है जो आंकड़ों में साफ़ दिख रही थी.
कंपनियों को अब पिछले तीन में से कम से कम दो सालों में ₹1 करोड़ का ऑपरेटिंग प्रॉफ़िट दिखाना ज़रूरी है, ताकि सिर्फ़ काग़ज़ी नेट वर्थ के आधार पर क्वालिफ़ाई करने वाली कंपनियां बाहर रह जाएं. प्रमोटर अब इश्यू का पांचवां हिस्सा से ज़्यादा नहीं बेच सकते, जिससे यह जोख़िम कम होता है कि IPO असल में एक छिपा हुआ एग्ज़िट बन जाए. मिनिमम एप्लिकेशन साइज़ दोगुना होकर ₹2 लाख हो गया है, जो साफ़ तौर पर उस रिटेल भागदौड़ को धीमा करने की कोशिश है, जो लिस्टिंग की उछाल को हवा देती है.
रेगुलेटर ने अपना इरादा 2024 में ही ज़ाहिर कर दिया था, जब उसने Trafiksol ITS Technologies का IPO रद्द किया, जो लगभग 346 गुना सब्सक्राइब हुआ था, इसकी वजह यह थी कि फ़ंडिंग चेन का कुछ हिस्सा एक शेल कंपनी से जुड़ा पाया गया.
क्या कड़े नियम आख़िर में बेहतर कंपनियां लाएंगे, यह अभी देखना बाक़ी है.
नए नियम लागू होने के बाद लिस्ट हुई 270 कंपनियां अपने लिस्टिंग प्राइस से मीडियन 15 प्रतिशत नीचे हैं, और 62 प्रतिशत डेब्यू से नीचे हैं. ज़्यादातर ने पुराने नियमों के तहत ही फ़ाइलिंग की थी और सभी अभी भी नई लिस्टिंग हैं, इसलिए आज सिर्फ़ यही ईमानदार नतीजा निकलता है कि पॉप-एंड-फ़ेड (यानी कुछ समय की तेजी के बाद फीका पड़ना) का यह पैटर्न अभी टूटा नहीं है.
आपके लिए इसका मतलब क्या है
इससे दो नियम निकलते हैं.
पहला, लिस्टिंग प्राइस आपकी लागत है, इश्यू प्राइस नहीं. कारोबार को इस आधार पर परखें कि आप पहले दिन असल में क्या क़ीमत चुका सकते थे.
दूसरा, औसत पर भरोसा न करें.
ऐसे मार्केट में जहां मुट्ठी भर कंपनियां 50 या 100 गुना बढ़ जाती हैं, जबकि सैकड़ों कंपनियां आधी हो जाती हैं, वहां औसत उन विनर्स को दिखाता है जिनके आपके पास होने की संभावना बहुत कम है.
मीडियन आपको नज़र आता है. और 2016 के बाद का मीडियन SME IPO अपने लिस्टिंग प्राइस से 13 प्रतिशत नीचे है.
डेब्यू के दिन का उत्साह सच था. लेकिन औसत ख़रीदार के लिए, रिटर्न सच नहीं निकले.
अभी भी SME IPO को लेकर उत्साहित हैं?
SME IPO लिस्टिंग वाले दिन शानदार मुनाफ़ा दे सकते हैं, लेकिन इनके साथ कई जोख़िम भी जुड़े होते हैं. मेनबोर्ड पर लिस्टेड कंपनियों के मुक़ाबले, SME कंपनियों में कारोबार और फ़ाइनेंशियल्स को लेकर पारदर्शिता अभी भी कम है.
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