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इंटरनेशनल फ़ंड बंद हुए, विदेश में निवेश के कौन-से दो विकल्प अब भी खुले हैं?

दरवाज़ा बंद हुआ है, रास्ता नहीं. जानिए कौन से दो ज़रिए अब भी खुले हैं और इनमें से आपके लिए सही कौन सा है.

दरवाज़ा बंद हुआ है, रास्ता नहीं. जानिए कौन से दो ज़रिए अब भी खुले हैं और इनमें से आपके लिए सही कौन सा है.Aman Singhal/AI-Generated Image

सारांशः भारत के लगभग सभी इंटरनेशनल फ़ंड नया पैसा लेना बंद कर चुके हैं, जिससे विदेश में निवेश करने वालों के सामने सवाल खड़ा हो गया है कि अब कैसे निवेश करें? यह लेख बताता है कि कौन से दो रास्ते अब भी खुले हैं, इंटरनेशनल ETF का पेच क्या है, सीधे विदेशी शेयर ख़रीदने में कौन सा टैक्स छिपा है और इन सबमें आपके लिए सबसे भरोसेमंद रास्ता कौन सा है. 

पाठक का सवाल: सारे इंटरनेशनल फ़ंड बंद हो चुके हैं. क्या विदेश में निवेश फैलाने का कोई और रास्ता है? - प्रसन्ना वेंकटेश

भारतीय निवेशक जिस इंटरनेशनल फ़ंड को बड़ी आसानी से ख़रीद सकते थे, उन सबने अपने दरवाज़े बंद कर लिए हैं, एक को छोड़कर. पर इसका मतलब यह नहीं कि विदेश में निवेश का रास्ता ही ख़त्म हो गया. दो ज़रिए अब भी खुले हैं. फ़र्क़ बस यह है कि दोनों में सहूलियत पहले जैसी नहीं है और दोनों आपसे थोड़ा और होमवर्क मांगते हैं.

पहला रास्ता है GIFT City: यह एक उम्मीद जगाने वाला चलन है, पर यह अभी बन ही रहा है. फ़ंड अब भी लॉन्च हो रहे हैं और इसका पूरा इंतज़ाम अभी तैयार हो रहा है. इसमें म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों के लिए एक अच्छा ज़रिया बनने की संभावना है.

फ़िलहाल इसका तरीक़ा रोज़मर्रा का काम नहीं बना है. निवेश की आसानी, टैक्स का बर्ताव और अपना पैसा भेजने की प्रक्रिया, ये सब अभी तय हो रहे हैं. और यहां भी आप अपनी LRS लिमिट के अंदर ही काम कर रहे होते हैं, जो साल में $250,000 है. 

पर तस्वीर तेज़ी से बदल रही है. 15 फ़ंड कंपनियां पाइपलाइन में हैं. एक बार बैंकिंग वाला हिस्सा रोज़मर्रा का काम बन जाए, तो रुपये को डॉलर में बदलने, वहां निवेश करने और फिर पैसा निकालने के लिए उसी चक्र को उल्टा चलाने की आपकी क्षमता जम जाएगी. अगले छह महीने से एक साल में यह रोज़मर्रा का काम बन जाना चाहिए और हम इस पर क़रीब से नज़र रखेंगे.

दूसरा रास्ता है (लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम) LRS: इसके तहत आप भारत के बाहर एक ब्रोकिंग अकाउंट खोल सकते हैं और सीधे विदेशी ETF या अलग-अलग शेयरों में पैसा लगा सकते हैं.

ETF का ज़रिया, और उसका पेच

एक तीसरा ज़रिया भी दिखता है, इंटरनेशनल ETF. पर उसी दरवाज़ा बंद होने की वजह से, वो भी नया पैसा नहीं ले सकते और अब वो अपनी असल क़ीमत यानी NAV से प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं. इसलिए ETF कोई पसंद करने लायक़ ज़रिया नहीं है. वो असल में एक सट्टेबाज़ी वाला ज़रिया बन गया है. पर हां, एक ज़रिया तो है.

विदेश में निवेश क्यों ज़रूरी है

निवेश फैलाने के लिए यह एक अहम रास्ता है. विदेश में निवेश करना चाहिए. जिन वजहों से आप किसी म्यूचुअल फ़ंड में पैसा लगाते हैं, और जिस वजह से आप अपना निवेश फैलाते हैं, ठीक वही वजहें हैं जिनसे आपको विदेश में भी निवेश करना चाहिए.

और म्यूचुअल फ़ंड ही वो ज़रिया है जिसे इस्तेमाल करना चाहिए. ज़्यादातर भारतीय निवेशकों के लिए, जो अब आसानी से इक्विटी में पैसा लगा सकते हैं और लगा भी रहे हैं, जोख़िम घटाने का सबसे अच्छा तरीक़ा फ़ंड ही है. इसमें सहूलियत है, निवेश करना आसान है और ज़रूरत पड़ने पर अपना पैसा निकालना भी आसान है. इसलिए म्यूचुअल फ़ंड ही आगे का रास्ता रहेंगे.

एक रास्ता जो शायद पहले से आपके पास हो

कुछ ऐसे डोमेस्टिक फ़ंड भी हैं जिनमें पहले से विदेशी हिस्सा मौजूद है. जैसे Kotak Pioneer में क़रीब 20% है. वो हिस्सा आगे घटता ही जाएगा. Kotak Pioneer एक उम्मीद जगाने वाला फ़ंड है. इसे बहुत ही कम आंका गया है. इसने बेहद अच्छा प्रदर्शन किया है. इसमें वही ख़ूबी है जिसके लिए Parag Parikh का फ़ंड पसंद किया जाता है और यह उसके मुक़ाबले कम जाना-पहचाना है. इस पर विचार कीजिए.

सीधे विदेशी शेयर ख़रीदने से पहले यह जान लीजिए

एक अहम बात: सीधे विदेशी शेयरों में पैसा मत लगाइए, बिना यह जाने कि इसमें क्या-क्या शामिल है. जब आप सीधे विदेशी शेयरों में निवेश करते हैं, तो आप पर एस्टेट टैक्स की देनदारी बनती है.

आज कई ऐप और टूल इन लेन-देन को आसान बना देते हैं. Alphabet जैसा कोई शेयर ख़रीदना आसान हो गया है. पर निवेशकों को अक्सर यह अंदाज़ा ही नहीं होता कि उस पर टैक्स कैसे लगेगा, उसका स्ट्रक्चर क्या है, और वो अपने सिर पर क्या ले रहे हैं.

सबसे ज़रूरी बात, हिफ़ाज़त

घरेलू म्यूचुअल फ़ंड वाले ज़रिए बहुत अच्छे हैं. GIFT City वाले ज़रिए भी शानदार होंगे, क्योंकि उनमें सुरक्षा के घेरे और हिफ़ाज़त है. उस नियामक स्ट्रक्चर की फ़िक्र सबसे पहले होनी चाहिए, जो हमारी हिफ़ाज़त करता है.

तो आपके सवाल का सीधा जवाब यह है: रास्ते खुले हैं, पर उनमें से जो सबसे कम चमकदार दिखता है, वही सबसे भरोसेमंद है. आज आपके पास मौजूद कोई डोमेस्टिक फ़ंड, जिसमें एक हिस्सा विदेश में लगा है, कल किसी विदेशी ब्रोकिंग खाते से ज़्यादा काम आ सकता है. और सबसे पहले यह पक्का कीजिए कि आप ऐसी किसी जगह, या ऐसे किसी तरीक़े से पैसा न लगाएं, जहां आपका पैसा गुम हो जाए और आपके पास कोई सुनवाई का रास्ता ही न बचे.

वैल्यू रिसर्च की राय

विदेश में निवेश फैलाना ज़रूरी है, पर रास्ता वही चुनिए जिसमें सहूलियत और हिफ़ाज़त, दोनों हों. वैल्यू रिसर्च फ़ंड एडवाइज़र आपको यह परखने में मदद करता है कि कौन सा फ़ंड और कौन सा रास्ता सच में आपके लिए सही है. गहरी जानकारी के लिए आप धीरेंद्र कुमार का यह लाइव सेशन देख सकते हैं.

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यह भी पढ़ें: इंडेक्स फ़ंड vs ETF: क्या दोनों के लिए टैक्स के नियम अलग हैं?

ये लेख पहली बार अगस्त 12, 2026 को पब्लिश हुआ.

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