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सारांशः PF से पैसा निकालने की सुविधा है, लेकिन हर ज़रूरत के लिए शर्तें एक जैसी नहीं हैं. जानिए, कितनी बार पैसा निकाल सकते हैं, कितना अकाउंट में छोड़ना होगा और आज निकाला गया ₹1 लाख आगे की बचत पर क्या असर डाल सकता है.
घर में किसी का इलाज चल रहा हो, बच्चे की फ़ीस भरनी हो या घर बनवाने के लिए पैसे कम पड़ रहे हों, तो PF की बचत से मदद मिल सकती है. इन ज़रूरतों के लिए रिटायरमेंट से पहले भी अकाउंट से कुछ पैसा निकालने की सुविधा है.
EPFO ने अपने सोशल मीडिया हैंडल में 8 सितंबर 2026 को एक पोस्ट शेयर की जिसमें नए नियम समझाए हैं. पैसा निकालने से पहले ये जानना ज़रूरी है कि आपके लिए कौन-सी शर्तें हैं और कितना पैसा अकाउंट में बचाकर रखना होगा.
EPF एडवांस क्या है?
कुछ तय ज़रूरतों के लिए अपने PF अकाउंट से पैसा निकालने को EPF एडवांस कहते हैं. ये पैसा आपकी अपनी बचत से मिलता है. इसे वापस चुकाने की ज़रूरत नहीं होती.
नौकरी करते हुए भी इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं. जितना पैसा निकालेंगे, उतना अकाउंट से कम हो जाएगा. बाक़ी बचत अकाउंट में रहेगी. पूरा PF निकालने के नियम अलग हैं.
किन कामों के लिए पैसा निकाल सकते हैं?
EPFO ने इन ख़र्चों को तीन हिस्सों में रखा है. पहले में इलाज, पढ़ाई और शादी हैं. दूसरे में घर से जुड़े ख़र्च हैं. तीसरा हिस्सा ख़ास हालात के लिए है. हर ख़र्च के लिए कितनी बार पैसा निकाल सकते हैं, ये नीचे देखिए:
| किस काम के लिए | कितनी बार पैसा निकाल सकते हैं? |
|---|---|
| अपना या परिवार का इलाज | कोई तय लिमिट नहीं |
| अपनी या परिवार की पढ़ाई | कुल 10 बार तक |
| अपनी या परिवार की शादी | कुल 5 बार तक |
| घर ख़रीदना या बनवाना, घर बनाने के लिए प्लॉट लेना, होम लोन चुकाना, घर की मरम्मत या सुधार | इन सभी कामों के लिए मिलाकर कुल 5 बार तक |
| EPFO के तय ख़ास हालात में | हर साल अप्रैल से अगले मार्च के बीच 2 बार तक |
पढ़ाई, शादी और घर के लिए बताई गई गिनती हर साल की नहीं है. ये PF से जुड़े रहने के पूरे समय की लिमिट है. इलाज के लिए बार की लिमिट नहीं है, लेकिन रक़म की लिमिट लागू रहती है. नई स्कीम लागू होने की तारीख़ से पैसा निकालने की गिनती फिर शुरू होती है. यानी उससे पहले के एडवांस इस गिनती में नहीं जुड़ेंगे.
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कितने समय बाद पैसा निकाल सकते हैं?
आम तौर पर PF से जुड़े हुए कम से कम एक साल, यानी 12 महीने पूरे होने चाहिए. नौकरी बदलने पर पिछली नौकरी में PF से जुड़े रहने का समय भी जोड़ा जा सकता है. लेकिन अगर पहले पूरा PF निकालकर PF से अलग हो चुके थे, तो उस पुराने समय को नहीं जोड़ सकते.
अगर एक साल पूरा होने से पहले ही नौकरी छोड़ दी है, तो भी कुछ पैसा निकालने की छूट है. इस मामले में भी अकाउंट में ज़रूरी हिस्सा बचाकर रखना होगा.
कितना पैसा निकाल सकते हैं?
EPFO की गाइड में PF बैलेंस का 75% तक निकालने की बात है. इसमें आपका पैसा, कंपनी का EPF में जमा पैसा और ब्याज शामिल हैं.
इसका हिसाब समझ लीजिए. अब तक आपने और कंपनी ने EPF में जितना पैसा जमा किया है, उसमें ब्याज जोड़कर जो कुल रक़म बनती है, उसका 25% अकाउंट में छोड़ना ज़रूरी है. आपके अकाउंट में अभी जितना पैसा है, उसमें से ये ज़रूरी हिस्सा घटाने के बाद बची रक़म निकाल सकते हैं. एडवांस कम से कम ₹1,000 का होना चाहिए.
मान लीजिए, आपने पहले कभी PF से पैसा नहीं निकाला है. आपके और कंपनी के जमा पैसे व ब्याज को मिलाकर अकाउंट में ₹8 लाख हैं. ऐसे में ₹2 लाख अकाउंट में रखने होंगे. बाक़ी शर्तें पूरी होने पर ₹6 लाख तक निकाल सकते हैं.
पहले पैसा निकाल चुके हैं, तो बचे हुए बैलेंस का सीधा 75% मानकर हिसाब न लगाएं. ऊपर के उदाहरण में ₹6 लाख निकालने के बाद बचे ₹2 लाख अकाउंट में रखना ज़रूरी है. बिना नया पैसा या ब्याज जुड़े इसमें से फिर 75% नहीं निकाल सकते.
क्लेम करने से पहले क्या चेक करें?
PF पासबुक में देख लें कि अकाउंट में कितना पैसा है और पहले कितना निकाल चुके हैं. जिस काम के लिए अब पैसा चाहिए, उसके लिए पहले कितनी बार एडवांस लिया है, ये भी जांच लें.
ऑनलाइन फ़ॉर्म भरने से पहले देखें कि UAN से आपका आधार और बैंक अकाउंट जुड़ा है या नहीं. UAN, EPFO से मिला आपका पहचान नंबर है. नौकरी बदलने पर भी ये वही रहता है. आधार और बैंक की जानकारी सही तरह जुड़ी हो, तो कंपनी से फ़ॉर्म पर दस्तख़त कराए बिना सीधे EPFO को क्लेम दे सकते हैं. ऑनलाइन क्लेम करते समय चेक या बैंक पासबुक की फ़ोटो अपलोड करने की ज़रूरत नहीं है. ये शर्त अप्रैल 2025 से हट चुकी है.
आज ₹1 लाख निकालने से आगे क्या असर होगा?
PF से निकाला गया पैसा आज की ज़रूरत पूरी कर सकता है. लेकिन उस पैसे पर आगे मिलने वाला ब्याज भी छूट जाता है. समय के साथ इस ब्याज पर भी ब्याज जुड़ता, जिससे आपकी बचत बढ़ती.
मान लीजिए, रिटायरमेंट में 20 साल बाक़ी हैं. अगर अकाउंट में रखे ₹1 लाख पर हर साल 8% ब्याज मिले, तो 20 साल बाद ये लगभग ₹4.66 लाख हो सकते हैं. इसमें शुरुआत के ₹1 लाख भी शामिल हैं.
यहां 8% ब्याज सिर्फ़ हिसाब समझाने के लिए लिया गया है. EPF की ब्याज दर हर साल तय होती है. आगे भी यही दर मिलेगी, इसकी गारंटी नहीं है.
तो EPF का पैसा कब इस्तेमाल करें?
इलाज का बड़ा ख़र्च आ जाए, तो देखें कि हेल्थ इंश्योरेंस और मुश्किल वक़्त के लिए रखी बचत से कितना ख़र्च पूरा हो सकता है. पैसे कम पड़ें, तो EPF की मदद ले सकते हैं. इससे महंगा क़र्ज़ लेने की ज़रूरत कम हो सकती है.
पढ़ाई या घर के जिस ख़र्च का पहले से अंदाज़ा है, उसके लिए अलग से बचत करें. PF से पैसा निकालना पड़े, तो उतना ही लें जितनी ज़रूरत है. हालात संभलने पर रिटायरमेंट के लिए फिर से ज़्यादा पैसा बचाने की कोशिश करें.
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ये लेख पहली बार सितंबर 10, 2026 को पब्लिश हुआ.






