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BAF में इक्विटी एक्सपोज़र कई साल के हाई पर, क्या यह बाज़ार में पैसा लगाने का संकेत है?

देश के सबसे बड़े Balanced Advantage Fund ने इक्विटी का हिस्सा बढ़ाकर 73% कर दिया है, लेकिन इसे आगे की तेज़ी की गारंटी मानना ग़लत होगा

देश के सबसे बड़े Balanced Advantage Fund ने इक्विटी का हिस्सा बढ़ाकर 73% कर दिया है, लेकिन इसे आगे की तेज़ी की गारंटी मानना ग़लत होगाAI-generated image

सारांशः बाज़ार की चाल देखकर इक्विटी घटाने-बढ़ाने वाले Balanced Advantage Funds ने अपना इक्विटी एक्सपोज़र कई साल के ऊंचे स्तर पर पहुंचा दिया है. 2024 की तेज़ी में इन्होंने इक्विटी काफ़ी घटा दी थी. अब दो साल की सुस्ती और 2026 की गिरावट के बाद Nifty का वैल्यूएशन अपने 10 साल के औसत से नीचे आ गया है. इसका मतलब यह नहीं कि बाज़ार अब चढ़ेगा ही. पर इतना साफ़ है कि इन फ़ंड्स के मॉडल को शेयर पहले से सस्ते लग रहे हैं.

बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड्स (BAF) बाज़ार के हिसाब से इक्विटी और डेट के बीच पैसा घटाते-बढ़ाते रहते हैं. शेयर महंगे लगें तो ये इक्विटी कम कर देते हैं और सस्ते लगें तो बढ़ा देते हैं. इसलिए किसी BAF का मौजूदा एसेट एलोकेशन यह भी बताता है कि उसका फ़ंड मैनेजर या मॉडल बाज़ार को कैसे देख रहा है.

BAF क्या है और किसके लिए सही है?

BAF को SEBI की कैटेगरी में Dynamic Asset Allocation Fund कहा जाता है. इसका मक़सद है निवेशक को इक्विटी की बढ़त का फ़ायदा देना और साथ ही बाज़ार गिरने पर झटका कम रखना. SEBI के नियमों के मुताबिक़, इस कैटेगरी के फ़ंड इक्विटी और डेट के बीच अपना निवेश हालात के हिसाब से पूरी तरह बदल सकते हैं. इक्विटी या डेट के लिए कोई न्यूनतम या अधिकतम सीमा तय नहीं है, यह हिस्सा 0 से 100% तक कुछ भी हो सकता है. कब कितनी इक्विटी रखनी है, यह हर फ़ंड हाउस का अपना मॉडल तय करता है, जो वैल्यूएशन, बाज़ार के ट्रेंड या दूसरे संकेतों पर आधारित होता है. ये फ़ंड उन निवेशकों के लिए ठीक हैं जो इक्विटी में पहली बार कदम रख रहे हैं या बाज़ार के बड़े उतार-चढ़ाव से घबराते हैं. ये उनके लिए भी ठीक हैं जो इक्विटी और डेट के बीच पैसा बांटने का फ़ैसला ख़ुद नहीं करना चाहते और जो कम से कम 5 साल तक निवेश बनाए रख सकते हैं. लेकिन जो निवेशक पूरी तरह इक्विटी फ़ंड जैसा ऊंचा रिटर्न चाहते हैं, या जिन्हें एक-दो साल में ही पैसे की ज़रूरत है, उनके लिए यह सही विकल्प नहीं है.

अभी कितनी इक्विटी है?

इस वक्त कुछ बड़े BAFs में इक्विटी का हिस्सा कई साल के ऊंचे स्तर पर है.

इस कैटेगरी के सबसे बड़े फ़ंड HDFC Balanced Advantage Fund का AUM ₹1 लाख करोड़ से ज़्यादा है. अगस्त 2026 के अंत में इसका नेट इक्विटी एक्सपोज़र 73.3% था, जो कम से कम दो साल का सबसे ऊंचा स्तर है. जनवरी 2026 से इस फ़ंड ने अपनी इक्विटी पर हेजिंग भी पूरी तरह हटा दी है.

दूसरे सबसे बड़े फ़ंड ICICI Prudential Balanced Advantage Fund में अगस्त 2026 के अंत में नेट इक्विटी 63.8% रही, जो जुलाई के 64.4% से थोड़ी कम है. फ़ंड हाउस के अपने आंकड़ों के मुताबिक़, जुलाई में इसकी नेट इक्विटी 68% थी, जो छह साल का सबसे ऊंचा स्तर था. इससे पहले यह फ़ंड 2020 की शुरुआत में कोविड वाली गिरावट के दौरान क़रीब 74% तक गया था.

इक्विटी में कौन कितना भारी!

बड़े BAFs में 31 अगस्त 2026 तक नेट इक्विटी एलोकेशन

फ़ंड नेट इक्विटी एक्सपोज़र पिछला टॉप लेवल (महीना) नेट एसेट्स (₹ करोड़)
HDFC Balanced Advantage Fund 73.30% 71.37% (जुलाई 2026) 1,07,296
ICICI Prudential Balanced Advantage Fund 63.80% 64.39% (जुलाई 2026) 75,399
SBI Balanced Advantage Fund 54.91% 58.74% (जून 2025) 41,803
Kotak Balanced Advantage Fund 64.12% 63.32% (जुलाई 2026) 17,373
Edelweiss Balanced Advantage Fund 83.81% 83.40% (फ़रवरी 2026) 13,445
Aditya Birla Sun Life Balanced Advantage Fund 65.26% 75.18% (मई 2025) 10,125
Nippon India Balanced Advantage Fund 62.92% 65.32% (नवंबर 2025) 9,918
स्रोत: Value Research. सभी आंकड़े 31 अगस्त 2026 तक के हैं. पिछला टॉप इक्विटी लेवल 1 अगस्त, 2024 से 31 अगस्त, 2026 के बीच के आंकड़ों से लिया गया है. HDFC, Kotak और Edelweiss अगस्त 2026 में इस स्तर को पार कर नए हाई पर पहुंच गए हैं. नेट इक्विटी का मतलब है हेजिंग के बाद इक्विटी का हिस्सा. फ़ंड हाउस के अपने आंकड़े हिसाब के तरीक़े की वजह से थोड़े अलग हो सकते हैं.

पूरी कैटेगरी में बढ़ी इक्विटी

यह बदलाव सिर्फ़ बड़े फ़ंड्स तक सीमित नहीं है. Value Research के डेटा के मुताबिक़, अगस्त 2026 के अंत में इस कैटेगरी के 36 फ़ंड्स का औसत नेट इक्विटी एक्सपोज़र 64.3% था. अगस्त 2024 में यह 54.6% और फ़रवरी 2025 में 53.6% था. अभी 36 में से 19 फ़ंड्स में नेट इक्विटी 65% या उससे ज़्यादा है, जबकि अगस्त 2024 में ऐसे सिर्फ़ 7 फ़ंड थे. 15 फ़ंड्स का इक्विटी एक्सपोज़र इस वक्त पिछले दो साल के सबसे ऊंचे स्तर पर है. हालांकि, सभी फ़ंड्स एक ही दिशा में नहीं चल रहे. SBI, Aditya Birla Sun Life और Nippon India BAF में इक्विटी अभी भी 2025 के अपने ऊंचे स्तर से नीचे है.

2024 की तेज़ी में घटाई थी इक्विटी

2024 में शेयर बाज़ार लगातार चढ़ रहा था. 2023 के अंत में Nifty 50 क़रीब 21,700 पर था. 27 सितंबर 2024 को यह 26,277 के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया, यानी क़रीब 20% की बढ़त. इस दौरान वैल्यूएशंस भी काफ़ी ऊपर चले गए.

BAFs ने इसका जवाब इक्विटी घटाकर दिया. जुलाई 2024 में HDFC BAF का नेट इक्विटी 50% से नीचे आ गया, जो कम से कम दो साल का सबसे निचला स्तर था. फ़ंड हाउस के आंकड़ों के मुताबिक़, ICICI Prudential BAF में यह सिर्फ़ 31.2% रह गया, जो 20 महीने का निचला स्तर था. SBI Balanced Advantage Fund में इक्विटी और भी कम, 30.9% थी.

यानी जब बाज़ार में उत्साह चरम पर था, तब ये फ़ंड्स जोखिम घटा रहे थे.

गिरावट आई तो इक्विटी बढ़ने लगी

सितंबर 2024 के बाद बाज़ार पलटा. फ़रवरी 2025 के अंत तक Nifty अपने हाई से 15% से ज़्यादा गिर चुका था. मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में गिरावट इससे भी ज़्यादा थी.

इस दौरान BAFs ने धीरे-धीरे इक्विटी बढ़ाई. फ़रवरी 2025 तक HDFC BAF का नेट इक्विटी 56.1% और ICICI Prudential BAF का 47% हो गया. फिर भी यह स्तर सतर्क माना गया, क्योंकि ज़्यादातर फ़ंड्स की नेट इक्विटी 65% से नीचे ही थी. Value Research के डेटा के मुताबिक़, उस वक्त 34 में से 27 फ़ंड्स इसी दायरे में थे.

2026 की गिरावट ने बदला हिसाब

इसके बाद बाज़ार ने रिकवरी की और 5 जनवरी 2026 को Nifty 26,373 के नए रिकॉर्ड पर पहुंचा. लेकिन यह तेज़ी टिकी नहीं. विदेशी निवेशकों की भारी बिकवाली के बीच 2 अप्रैल 2026 तक Nifty क़रीब 16% गिरकर 22,182 पर आ गया. सितंबर 2026 के मध्य में यह क़रीब 23,400 के आसपास है, यानी अब भी अपने रिकॉर्ड से 10% से ज़्यादा नीचे.

इस गिरावट को कई BAFs ने ख़रीदारी के मौक़े की तरह देखा. मार्च 2026 में, जब बाज़ार तेज़ी से गिर रहा था, ICICI Prudential BAF ने एक ही महीने में नेट इक्विटी 53% से बढ़ाकर 61.7% कर दी.

पिछले दो साल में लार्ज कैप शेयरों ने गिरावट का सामना किया है. बाज़ार लंबे समय तक एक दायरे में घूमता रहा, जबकि कंपनियों की कमाई बढ़ती रही. नतीजा यह हुआ कि शेयर पहले से सस्ते हो गए. अभी Nifty 50 का 12 महीने का फॉरवर्ड P/E क़रीब 18.1 है, जबकि इसका 10 साल का औसत 21.4 है.

फ़ंड मैनेजर क्या कह रहे हैं?

एक मीडिया रिपोर्ट में ICICI Prudential AMC में प्रिंसिपल-इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजी चिंतन हरिया ने कहा कि पिछले कुछ सालों में लार्ज-कैप शेयरों ने टाइम करेक्शन झेला है और इसी दौरान कंपनियों की कमाई बढ़ती रही. इससे वैल्यूएशंस सही स्तर पर आ गए हैं और यही फ़ंड में इक्विटी के ऊंचे स्तरों में दिख रहा है. ICICI Prudential BAF अपने एलोकेशन के लिए मुख्य रूप से प्राइस-टू-बुक (P/B) वैल्यूएशन को आधार बनाता है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक़, HDFC AMC में Senior Fund Manager (Equity) गोपाल अग्रवाल ने कहा कि इक्विटी बढ़ाने के पीछे सिर्फ़ वैल्यूएशन नहीं है. उनके मुताबिक़, ठीक-ठाक वैल्यूएशन, कमाई को लेकर बेहतर उम्मीदें और देश की मज़बूत आर्थिक स्थिति, तीनों की वजह से ऐसा किया गया है. बाज़ार के उतार-चढ़ाव ने कुछ शेयरों में लंबी अवधि के लिए अच्छे मौक़े भी बनाए हैं. HDFC का एलोकेशन फ़्रेमवर्क वैल्यूएशन के साथ आर्थिक हालात और अलग-अलग शेयरों में मौक़ों को भी देखता है.

सीधी बात यह है कि ऊंचा इक्विटी एक्सपोज़र यह नहीं बताता कि फ़ंड मैनेजर को आगे पक्की तेज़ी दिख रही है. यह बस इतना बताता है कि उनके मॉडल के हिसाब से अब शेयरों में जोखिम के मुक़ाबले संभावित रिटर्न 2024 से बेहतर है.

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सभी BAF एक जैसी स्ट्रैटेजी नहीं अपनाते

नाम एक जैसा होने के बावजूद हर BAF अलग तरीक़े से काम करता है. ज़्यादातर BAF काउंटरसाइक्लिकल (countercyclical) मॉडल पर चलते हैं, यानी बाज़ार महंगा हो तो इक्विटी घटाओ और सस्ता हो तो बढ़ाओ.

Edelweiss Balanced Advantage Fund इसका उल्टा करता है. यह प्रो-साइक्लिकल यानी मोमेंटम पर आधारित मॉडल अपनाता है. बाज़ार का ट्रेंड ऊपर की ओर हो तो यह इक्विटी बढ़ाता है और ट्रेंड कमज़ोर पड़े तो घटाता है. सितंबर 2024 में बाज़ार पलटने के बाद अक्टूबर तक इसने नेट इक्विटी 69.6% से घटाकर 58.4% कर दी थी, जबकि HDFC BAF उसी दौरान इक्विटी बढ़ा रहा था. अभी 83.8% नेट इक्विटी के साथ यह बड़े BAFs में सबसे ऊपर है. इसलिए ऐसे फ़ंड में ऊंची इक्विटी का मतलब यह नहीं कि बाज़ार सस्ता है.

मतलब, सिर्फ़ यह देखना काफ़ी नहीं कि किसी BAF में इक्विटी 60% है या 75%. यह भी समझना होगा कि उसका मॉडल इक्विटी किस आधार पर बढ़ाता या घटाता है.

निवेशक के लिए इसका क्या मतलब?

BAF में बढ़ी हुई इक्विटी एक संकेत ज़रूर है, पर इसे बाज़ार में एकमुश्त पैसा लगाने का सीधा इशारा न मानें. इन फ़ंड्स का काम ही हालात के हिसाब से एलोकेशन बदलना है.

अगर आप पहले से किसी BAF में निवेश कर रहे हैं, तो आपको ख़ुद कुछ बदलने की ज़रूरत नहीं है. यह फ़ैसला फ़ंड आपकी तरफ़ से ले रहा है.

अगर आप BAF में नया निवेश करने की सोच रहे हैं, तो तीन चीज़ें ज़रूर देखें:

पहला, फ़ंड का एलोकेशन मॉडल क्या है, और वह वैल्यूएशन, मोमेंटम या किसी और संकेत पर कितना टिका है.

दूसरा, पिछले मार्केट साइकिल्स में फ़ंड ने गिरावट में इक्विटी कितनी बढ़ाई और तेज़ी में कितनी घटाई.

तीसरा, सिर्फ़ हाल का रिटर्न नहीं, बल्कि 5-7 साल में अलग-अलग बाज़ार हालात में फ़ंड का प्रदर्शन कैसा रहा.

जोखिम भी समझें

गिरावट से बचाव कम होगा: 70% के आसपास नेट इक्विटी वाले BAF में अब 2024 जितना बचाव नहीं है, जब कई फ़ंड्स 30-50% नेट इक्विटी पर थे. अगर बाज़ार यहां से और गिरता है, तो इन फ़ंड्स पर उसका असर पहले से ज़्यादा दिखेगा.

सारा बाज़ार सस्ता नहीं है: Nifty 50 की वैल्यूएशन भले अपने औसत से नीचे हो, पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप इंडेक्स अब भी अपने लंबे औसत से काफ़ी महंगे हैं. जिन BAF में इन शेयरों का हिस्सा ज़्यादा है, उनमें जोखिम भी ज़्यादा है.

मॉडल भी ग़लत हो सकता है: वैल्यूएशन सस्ता होने के बाद भी बाज़ार कई महीनों तक गिरता या एक दायरे में अटका रह सकता है. विदेशी निवेशकों की बिकवाली, कच्चे तेल की क़ीमत और कमाई की रफ़्तार अब भी बड़े फ़ैक्टर हैं.

मौजूदा आंकड़े इतना ज़रूर बताते हैं कि 2024 के महंगे बाज़ार की तुलना में कई बड़े BAF अब शेयरों को ज़्यादा आकर्षक मान रहे हैं. पर बाज़ार आगे किधर जाएगा, यह सिर्फ़ उनके इक्विटी एक्सपोज़र से तय नहीं किया जा सकता.

क्या आपका BAF आपके लक्ष्य के लिए सही है? 

हर बैलेंस्ड एडवांटेज फ़ंड एक जैसा नहीं होता. कुछ वैल्यूएशन देखकर चलते हैं, कुछ मोमेंटम देखकर. Value Research Fund Advisor आपको बताता है कि आपके पोर्टफ़ोलियो के फ़ंड्स आपके निवेश लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता से मेल खाते हैं या नहीं, और कौन-से फ़ंड्स सच में आपके काम के हैं. 

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