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इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम: टैक्‍स बचाए अच्‍छा रिटर्न भी दिलाए

टैक्‍स बचाने के लिए कहीं भी निवेश करने से होता है नुकसान

टैक्‍स बचाने के लिए कहीं भी निवेश करने से होता है नुकसान

इनकम टैक्‍स के नियमों के तहत आपके पास ऐसे कई विकल्‍प हैं, जहां निवेश करके आप टैक्‍स बचा सकते हैं। जैसे पब्लिक प्रॉविडेंट फंड, टैक्‍स सेविंग फिक्‍स्ड डिपॉजिट, नेशनल सेविंग्‍स सर्टिफिकेट, इक्विटी लिंक्‍ड सेविंग स्‍कीम यानी ईएलएसएस। इसके अलावा भी दूसरे विकल्‍प हैं। इनकम टैक्‍स एक्‍ट के सेक्‍शन 80 सी के तहत इन विकल्‍पों में आप सालाना 1.5 लाख रुपए तक निवेश करके टैक्‍स छूट पा सकते हैं। इसके बावजूद बड़े पैमाने पर लोग टैक्‍स बचाने के सही विकल्‍प नहीं चुन पाते हैं। तो सवाल उठता है कि ऐसा क्‍यों होता है।

सिर्फ टैक्‍स बचाना ही नहीं है समझदारी

इसकी सबसे बड़ी वजह तो यह है कि आम तौर पर लोगों की सोच यह है कि टैक्‍स बचाना अलग चीज है और निवेश करना अलग। टैक्‍स बचाने के लिए निवेश करते समय उनकी सोच होती है कि अरे यार निवेश नहीं किया तो टैक्‍स कट जाएगा। यानी वे इसे एक ऐसे काम के तौर पर लेते हैं जिसे न करने से उनका नुकसान होगा। वहीं जब वे अपनी बचत को कहीं निवेश करते हैं तो उनकी सोच एकदम बदली हुई होती है। आसान शब्‍दों में कहें तो वे टैक्‍स बचाने के लिए जब निवेश करते हैं तो रिटर्न की खास परवाह नहीं करते हैं। वहीं जब अलग से निवेश करते हैं तो रिटर्न को लेकर खूब माथापच्‍ची करते हैं।

समय से शुरू करें निवेश

अगर आपको टैक्‍स बचाने के लिए निवेश करना है और उस निवेश से अच्‍छा फायदा या रिटर्न हासिल करना है तो आपको दो काम करने होंगे। पहला आप को टैक्‍स बचाने के लिए निवेश फाइनेंशियल ईयर की शुरूआत से ही या जितना जल्‍दी हो सके शुरू करना होगा। इससे आप पर आखिरी समय में कहीं भी निवेश करने का दबाव नहीं होगा। इस तरह से हर माह थोड़ा थोड़ा निवेश करते रहेंगे तो फाइनेंशियल ईयर के अंत तक उस लिमिट तक पहुंच जाएंगे जितना निवेश आपको करना है। दूसरा काम यह करना है कि आप टैक्‍स बचाने वाले निवेश के विकल्‍पों पर अच्‍छी तरह से सोच विचार करें।

ईएलएसएस है शानदार विकल्‍प

टैक्‍स बचाने के लिहाज से ईएलएसएस बेहतरीन विकल्‍प है। सैलरी क्‍लास के लोगों का पीएफ कटता है तो 1.5 लाख की लिमिट में कुछ पैसा पीएफ के तौर पर अपने आप चला जाता है। बाकी रकम निवेश करने के लिए आप ईएलएसएस चुन सकते हैं। 1.5 लाख की लिमिट में ईएलएसएस ऐसा विकल्‍प है जो इक्विटी रिटर्न हासिल करने का मौका देता है। यूनिट लिंक्‍ड प्‍लान यानी यूलिप्‍स और नेशनल पेंशन सिस्‍टम में निवेश करने वालों को भी इक्विटी रिटर्न मिलता है। लेकिन यूलिप्‍स में लॉकइन पीरियड 5 साल का होता है। इसमें निवेश का खर्चा काफी अधिक होता है। वहीं एनपीएस रिटायरमेंट फंड बनाने के लिए है न कि बचत करने के लिए। इसमें आपके निवेश का एक हिस्‍सा इक्विटी में निवेश किया जाता है और कुछ विशेष जरूरतों के अलावा रिटायर होने पर ही पैसा निकाल सकते हैं। ऐसे में एनपीएस की तुलना ईएलएसएस से नहीं की जा सकती है। ईएलएसएस में लॉकइन पीरियड तीन साल का होता है।

इक्विटी में निवेश भी सिखाएगा ईएलएसएस

निवेश की शुरूआत करने वाले निवेशकों के लिए ईएलएसएस ऐसा प्रोडक्‍ट है जो उनको निवेश के बारे में काफी कुछ सिखाता है। यह उनको इक्विटी और म्‍युचुअल फंड में निवेश का अनुभव देता है। साफ है कि निवेशकों के लिए टैक्‍स बचना ही बड़ा आकर्षण होता है। इसके अलावा ईएलएसएस में लॉकइन पीरियड भी दूसरे विकल्‍पों की तुलना में छोटा होता है। ईएलएसएस में निवेश का अनुभव उनको इक्विटी म्‍युचुअल फंड में और निवेश करने के लिए प्रेरित करता है। जब उनको लंबी अवधि के इक्विटी रिटर्न की आदत हो जाती है तो और दूसरे तरह के इक्विटी निवेश में भी निवेश की संभावनाएं तलाशते हैं। इक्विटी में कम अवधि के लिए निवेश करने का मतलब है ज्‍यादा जोखिम। लेकिन अगर निवेश पांच साल या इससे अधिक अवधि के लिए है तो जोखिम बहुत कम हो जाता है।

अगर आप महंगाई को ध्‍यान में रखें तो बैंक एफडी और दूसरी डिपॉजिट्स से आपको 1 या 2 फीसदी रिटर्न मिलता है। एक तरह से यह कुछ भी नहीं है। मौजूदा समय में एफडी पर तमाम बैंक 6 से 7 फीसदी रिटर्न दे रहे हैं। अगर महंगाई दर 5 फीसदी मान लें तो आपको वास्‍तव में 1 या 2 फीसदी ही रिटर्न मिलेगा। वहीं इक्विटी में निवेश करके आप काफी अधिक रिटर्न हासिल कर सकते हैं।

ये लेख पहली बार सितंबर 05, 2019 को पब्लिश हुआ.

Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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