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क्या सोना वाक़ई ‘खरा सौदा’ है?

हम बचत करने वालों को जानना चाहिए कि सोना हमारे लिए क्या करता है और क्या नहीं

हम बचत करने वालों को जानना चाहिए कि सोना हमारे लिए क्या करता है और क्या नहीं

आम तौर पर किसी को भी लग सकता है कि लगभग 5,000 साल किसी तर्क को सही साबित करने के लिए काफ़ी होंगे, लेकिन हक़ीक़त ये है कि निवेश के तौर पर सोने की उपयोगिता कितनी है ये अभी भी तय नहीं हुआ है. सोने के बारे में पारंपरिक नज़रिया यही है कि ये सरल और उपयोगी निवेश है, बुरे समय से सुरक्षा देता है और सभी परिवारों को इसमें निवेश करना चाहिए. जो लोग ऐसा मानते हैं, उन्हें लगता है कि सोना वेल्थ का एक ऐसा ज़रिया है जिसके बदले कैश आसानी से पाया जा सकता है यानी ये एक लिक्विड एसेट है, जिससे वैल्यू मिलने का भरोसा किया जा सकता है. एक कुछ आधुनिक नज़रिया ये मानता है कि सोना दूसरी कमोडिटी की तरह ही ट्रेड की जाने वाली कमोडिटी है, जो एक आम बचत करने वाले के लिए बहुत उपयोगी नहीं है.

एक तीसरा नज़रिया भी है, जिससे मैं सहमत हूं. वो कहता है कि कि सोने को क़ानूनी तौर पर एक निवेश के रूप में देखा जा सकता है और भले ही, इसमें कुछ अनूठी ख़ूबियां हैं, लेकिन ये बहुत अच्छा निवेश नहीं कहा जा सकता.

किसी भी निवेश का वैल्यूएशन मोटे तौर पर रिटर्न के मुताबिक़ किया जाना चाहिए, जिसमें तरलता या लिक्विडिटी, स्थिरता और ऐसे ही दूसरे फ़ैक्टर होते हैं. और इन पैमानों पर, सोना बहुत अच्छा स्कोर हासिल नहीं करता है.

सोने का रिटर्न न केवल दूसरे निवेशों की तुलना में ख़राब होता है, बल्कि इसके कुछ बुनियादी कारण भी हैं कि ऐसा हमेशा क्यों होता है. ऐसा इसलिए, क्योंकि सोना ऐसे निवेशों की कैटेगरी में आता है जो असल में कुछ भी जेनरेट नहीं करते या कोई वैल्यू नहीं बनाते. इसके दाम का बढ़ना इस भरोसे पर आधारित होता है कि बेचने का समय आने पर, कोई दूसरा व्यक्ति इसके लिए ज़्यादा पैसे देने पर राज़ी होगा. इक्विटी या बॉन्ड या डिपॉज़िट्स के उलट, आप जो पैसा सोने में निवेश करते हैं वो इकोनॉमिक ग्रोथ में कोई रोल अदा नहीं करता. किसी बिज़नस या किसी उत्पादक आर्थिक गतिविधि में लगाए गए पैसे, असली वेल्थ तैयार करेंगे और बड़े मौलिक तरीक़े से बढ़ेंगे, जबकि सोने की मात्रा उतनी ही रहेगी.

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तो, क्या मैं ये कह रहा हूं कि किसी को… कभी भी सोने में निवेश नहीं करना चाहिए? इसका जवाब साफ़ है. जो लोग ये कॉलम पढ़ रहे हैं और उनके पास मॉडर्न फ़ाइनेंशियल सिस्टम तक पहुंच होगी ही, जिसमें उन्हें निवेश के सभी विकल्प मिल जाते हैं, ऐसे लोगों के लिए सोना कोई मायने नहीं रखता. सोना केवल उन लोगों के लिए मायने रखता है, जिनकी पहुंंच फ़ाइनेंशियल सिस्टम तक नहीं है या उन्हें सिस्टम पर भरोसा ही नहीं है. सोने को वैकल्पिक करेंसी के रूप में देखना अच्छा है. डिमोनेटाइज़ेशन के दौर में, उन गृहिणियों की तमाम कहानियां थीं, जिन्होंने गुप्त रूप से बड़ी मात्रा में नक़दी बचा कर रखी थी. ये उसी तरह का मामला है जहां नक़दी के बजाय सोना बेहतर तरीक़े से काम कर सकता था. बेशक़, भारत में, फ़िजिकल गोल्ड ने एक और उद्देश्य पूरा किया है जो इसी का एक रूप है, वो है, पैसे को टैक्स से दूर रखना.

अगर आप अभी भी सोना ख़रीदना चाहते हैं, तो 'पेपर गोल्ड' के कई रूप उपलब्ध हैं. सोने पर आधारित म्यूचुअल फ़ंड उपलब्ध हैं जो सोने के मूल्य को बारीक़ी से ट्रैक करते हैं. हालांकि, अगर आपको कम से कम पांच साल के लिए पैसे को लॉक करने में कोई आपत्ति नहीं है, तो भारत सरकार के गोल्ड बॉन्ड हैं. इनकी वैल्यू सोने के साथ बढ़ती है, साथ ही हर साल 2.5 फ़ीसदी का अतिरिक्त ब्याज भी मिलता है. गोल्ड म्यूचुअल फ़ंड के विपरीत, गोल्ड बॉन्ड से होने वाला फ़ायदा टैक्स फ़्री है. इसकी सीमा प्रति व्यक्ति 4 किलोग्राम है.

इतिहास और संस्कृति में सोने का स्थान लोगों के लिए ये स्वीकार करना मुश्किल बनाता है कि सोना एक अच्छा निवेश नहीं है. हम सहज रूप से सोने को वेल्थ के रूप में, एक तरह की करेंसी के रूप में सोचते हैं जो सभी प्रकार की ऐतिहासिक परेशानियों से बची रहती है. ये निस्संदेह सच है. सोने की वैल्यू है क्योंकि हर कोई सोचता है कि इसकी वैल्यू है. कई लोगों के लिए, ये काफ़ी ज़्यादा है. हालांकि, वास्तविकता को समझे बिना इसे निवेश के रूप में न सोचिए.

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