
मल्टी कैप फंड के नेचर को पूरी तरह से बदल देने के लिए शुरू की गई सेबी की पहल कुछ कदम और आगे बढ़ गई है। हमारे जैसे लोग जो इस फंड में निवेश करते हैं उनके लिए यह लिए यह बड़ा बदलाव साबित होने जा रहा है। सेबी ने अब तक औपचारिक तौर पर इसके बारे में जो कुछ कहा है उसका मतलब है कि बेहद लाभदायक केटैगरी अब बाजार से बाहर होने जा रही है। यही नहीं जब तक नई कैटेगरी नहीं बनाई जाती है जब तक निवेशकों के लिए ऐसे म्युचुअल फंड में निवेश करने का कोई विकल्प नहीं होगा जो उनको स्माल, मिड और लार्ज कैप स्टॉक्स का संतुलित एक्सपोजर दे सके। सैद्धांतिकक तौर पर सेबी के नए नियम ऐसा करते हैं लेकिन व्यावहारिक तौर पर नए नियमों ने मल्टी कैप फंड कैटेगरी को पूरी तरह से खाली कर दिया है। ऐसे कुछ संकेत है जिनके तहत माना जा रहा है कि नियमों में कुछ और बदलाव किए जा सकते हैं। लेकिन देखना होगा कि निवेशकों को ये राहत दे पाते हैं या नहीं।
यह कहानी दो सप्ताह पहले शुरू हुई। सेबी ने नए नियम बनाए और कहा कि इन नियमों के तहत 31 जनवरी तक मल्टी कैप फंड को लार्ज, मिड और स्माल कैप स्टॉक्स में अपनी असेट का कम से कम 25 फीसदी करना होगा। इससे वे सही मायने में मल्टी कैप फंड बनेंगे। सेबी की लार्ज, मिड और स्माल कैप की अपनी ही परिभाषा बताती है कि 25 फीसदी की सीमा मल्टी कैप फंड में मिड और स्माल कंपनियों का जरूरत से ज्यादा प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगी। अगर आप सेबी की ही परिभाषा इक्विटी मार्केट के लिए लागू करें तो मार्केट वैल्यू का 74.1 फीसदी लार्ज कैप में 15.6 फीसदी और बाकी 11.3 फीसदी स्माल कैप में है।
अगर 25 फीसदी सीमा को लागू किया गया तो मल्टी कैप फंड काफी हद तक मिड और स्माल कैप फंड हो जाएंगे और उतार चढ़ाव का जोखिम बहुत बढ़ जाएगा। क्योंकि स्माल और मिड कैप स्टॉक्स में कम अवधि के उतार चढ़ाव का जोखिम ज्यादा होता है। जो भारत में स्माल कैप स्टॉक्स के बाजार के बारे में जानते हैं उनको पता है कि व्यावहारिक तौर पर 25 फीसदी सीमा को हासिल करना संभव नहीं है क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर अच्छे स्माल कैप स्टॉक्स उनलब्ध ही नहीं हैं। जमीन पर यह होगा कि मल्टी कैप फंड चलान वाली कंपनियां या तो इनका विलय लार्ज कैप फंड में कर देंगी या इनको किसी और टाइप के फंड में बदल देंगी।
निवेशकों के लिए यह बड़ा झटका होगा। वैल्यू रिसर्च में मल्टी कैप फंड हमेशा हमारा पसंदीदा फंड रहा है। इसे मैंने उन निवेशकों के लिए हमेशा एक आदर्श विकल्प की तौर पर बढ़ावा दिया जिन्होंने निवेश शुरू ही किया है। मेरा मानना है कि लार्ज कैप इक्विटी फंड निवेश का मजबूत आधार होना चाहिए और इसके साथ ही मिड और स्माल कैप भी संतुलित मात्रा में होना चाहिए। मौजूदा समय में मल्टी कैप फंड में यह संतुलन फंड मैनेजर लाता है। वहीं सेबी का नया नियम मल्टी कैप को खत्म कर देंगे और फिर यह काम निवेशक को करना होगा। और कुछ ही फंड निवेशक ऐसा करने की क्षमता रखते हैं। इसीलिए मैं नए नियम के खिलाफ हूं।
हालांकि पिछले कुछ दिनों में उम्मीद की किरण दिखी है। सेबी ने संकेत दिए है कि वह इन नियमों के असर पर विचार कर रहा है। 22 सितंबर को फंड इंडस्ट्री एसोसिएशन एएमएफआई के एजीएम को संबोधित करते हुए सेबी के चेयरमैन अजय त्यागी ने कहा कि नियामक का इरादा इंडस्ट्री को कहीं भी निवेश करने के लिए मजबूर करना नहीं है। एएमएफआई ने इस संबंध में एक ज्ञापन भी सौंदा। सेबी इस ज्ञापन को देख रहा है और जल्द ही नए कदमों की उम्मीद की जा रही है।
इस पूरी कवायद का एक संभावित नतीजा यह हो सकता है कि एक नई कैटैगरी बनाई जाए। यह कैटेगरी मल्टी कैप का लचीला संस्करण यानी एक फ्लेक्सी कैप हो सकती है। ऐसी केटेगरी में फंड मैनेजर को तय करने दिया जाए कि वे लार्ज, मिड और स्माल कैप में कितना कितना निवेश करना चाहते हैं। वास्तव में यह नए नाम से मल्टी कैप होगा। अगर ऐसा होता है तो बहुत से मौजूदा मल्टी कैप फंड फ्लेक्सी कैप की ओर शिफ्ट कर जाएंगे। और एक तरह से यथास्थिति कायम रहेगी।
एक दिलचस्प बात यह है कि मौजूदा समय में हमारे पास एक फ्लेक्सी कैप कैटेगरी पहले से है। यह है टैक्स सेविंग इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम यानी ईएलएसएस। इस कैटेगरी में तीन साल का लॉक इन पीरियड जरूर है लेकिन निवेश के नजरिए से यह वास्तव में फ्लेक्सी कैप है। एक बार जब नियम स्थिर हो जाएंगे तब में एक और कॉलम लिखूंगा। इस कॉलम में मल्टी कैप फंड निवेशकों को बताया जाएगा कि उनके लिए कौन सा रास्ता ठीक होगा। अभी तो यही लग रहा है कि कोई सटीक विकल्प मिल सकता है।






