
ये बात तीन दशक पहले मेरे आर्टिकलशिप के दौर की है। तब मैं, बीएसई टॉवर के पीछे की हमाम स्ट्रीट, में मौजूद अपने बाकी साथियों की तरह, स्टॉक मार्केट की तेज़ी से पैसा कमाने की ताकत से प्रभावित था। उन दिनों, स्टॉक मार्केट हमें ‘वाइल्ड-वैस्ट’ की तरह लगता था, जिसमें कई तरह के टर्म खूब इस्तेमाल किए जाते, जैसे - कंपनी सर्कल बाइंग, वंधो (विवाद), पेमेंट क्राइसिस, गालो (गैप/ फ़र्क), पटावट (सेटलमेंट), बैड डिलिवरी, आदि। ये माइट वॉज़ राइट का दौर था जो तेज़ी और मंदी में पैसे बना रहे थे, और मुझ जैसे रिटेल-इन्वेस्टर्स मार खा रहे थे।
इसी दौर में किस्मत ने मेरा साथ दिया, और मेरी मुलाकात एक बुज़ुर्ग लोकल सब-ब्रोकर से हुई जो पारंपरिक दगला (ओवरकोट) पहना करते थे। यहां उनसे गुजराती में मिली सलाह आप सब को बताने में मुझे खुशी होगी। उनकी बातों ने आने वाले बरसों में, पैसों को मैनेज करने में मेरी बड़ी मदद की।
- जहां हम हर साल दलाल स्ट्रीट पर लक्ष्मी पूजन करते हैं, वहीं सरस्वती मां की पूजा आपको हर रोज़ करनी होती है, और स्टॉक मार्केट में पैसा बनाने के लिए ज्ञान बेहद ज़रूरी है।
- निवेश का सीधा वास्ता कॉमनसेंस (सहज-ज्ञान) से है, जो इतनी कॉमन (सहजता से उपलब्ध) नहीं हैं। आपको पैसे बनाने के लिए टाई और सूट (प्रोफ़ेशनल डिग्री) पहनने की ज़रूरत नहीं है। धोती-दगला (ज्ञान और समझ) ही काफ़ी हैं।
- आपको अमीर बनाने में आपके माता-पिता के अलावा किसी और की रुचि नहीं है। सबकी सुनो, पर अपने निर्णय खुद लो। आंख मूंद कर टिप्स को मत मानो।
- तेज़ी-मंदी, पूनम और अमावस के जैसी हैं, हालांकि इसका कोई पैटर्न नहीं है। अमावस के अंधेरे में हमेशा पूनम के बारे में सोचो।
- ट्रेडिंग से पैसे बनाना बहुत मुश्किल है। निवेश एक आसान तरीका है। ट्रेडिंग में स्टॉप-लॉस (हानि को रोकना) बेहद महत्वपूर्ण है। ट्रेडिंग में अनुशासन बहुत ज़रूरी है। निवेश के लिए, धीरज चाहिए। ट्रेडर को तेज़ होना चाहिए। निवेशक को धीरे, और स्थिर होना चाहिए। याद रखो जब आप जल्दी में हो तो गलती कर सकते हो, और धीरज धरे हुए हो तो उनसे बच सकते हो। (उठावला सो बावला, धीर सो गंभीर)।
- कभी बटाटा (कम क्वालिटी के स्टॉक), टाटा (अच्छी क्वालिटी के स्टॉक) के ऊपर बिकने लगे, तो समझ जाओ मार्केट से निकलने का टाइम आ गया।
- भाव भगवान, यानि भाव ही सबसे सही मापदंड है। मार्केट के खिलाफ़ मत जाओ। दलाल स्ट्रीट की सड़क उनकी पलिया (कब्र के पत्थरों) से बनी है, जो मानते थे कि वो मार्केट से ज़्यादा जानते हैं।
- विनम्र रहो। अहं/ अति-विश्वास तो रावण का भी टूटा था, जब अपने अहं की वजह से उसने सोने की लंका गंवा दी। (अभिमान तो राजा रावण नू पण नहीं टक्यो)।
- क्वालिटी में निवेश करें। आप द्वारका (दलाल स्ट्रीट के पास एक छोटा रेस्टोरेंट) का बासी समोसा घर नहीं ले जाते। तो कचरा स्टॉक क्यों घर ले जाना? यानि क्वालिटी सस्ती नहीं आती।
- अगर पैसा कमाना इतना आसान होता तो हर कोई अमीर होता। पैसा कमाने के लिए आपको कड़ी मेहनत और धीरज रखना होता है।
- लोभ की कोई सीमा नहीं होती (लोभ नो थोभ नहीं)।
- पैसे और नाम को सर पर मत सवार होने देना। दलाल स्ट्रीट में, जब आपके पास पैसा और पावर होता है तो आप सेठ नत्थालाल कहलाते हो। जब आपके पास पावर और पैसा नहीं होता तो आप नथियो कहे जाते हो (नाना वगर नो नथियो, नाने नथालाल)।
उनके दशकों में इकठ्ठा किए गए ज्ञान में कई महान निवेशकों की झलक मिलती है।
दलाल स्ट्रीट वो जगह है जहां सपने बनते और बिखरते हैं। तीन दशकों तक शेयर मार्केट में रहने के बाद जो सबसे बड़ी सीख मिली है, वो ये, कि अनुशासन और धीरज सबसे बड़े कारण हैं जो दलाल स्ट्रीट में सफलता, और असफलता का फ़र्क पैदा करते हैं।
आज जब मैं वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश करने जा रहा हूं, मुझे लगने लगा है कि एक निवेशक के तौर पर मेरी ड्यूटी है अच्छे कर्म करने की, और फल (फ़ायदा-नुक्सान) को मार्केट पर छोड़ देने की। जैसे भगवान की दुनिया में देर है पर अंधेर नहीं, वैसे ही मार्केट में भी आपको इंतज़ार करना पड़ सकता है पर न्याय मिलता है।
ये लेख पहली बार अक्तूबर 19, 2021 को पब्लिश हुआ.





