Mukul Ojha
धूत ट्रांसमिशन को भारत के इलेक्ट्रिक दोपहिया-तिपहिया वायरिंग हार्नेस बाज़ार की सबसे बड़ी कंपनी बताया जा रहा है. यह इश्यू सब्सक्रिप्शन के लिए 10 अगस्त को खुलेगा और 12 अगस्त को बंद हो जाएगा. नीचे कंपनी और इस IPO से जुड़ी बुनियादी जानकारी दी गई है, और आखिर में इन्हीं आंकड़ों से निकलने वाली एक ज़रूरी बात भी.
कंपनी के बारे में
अप्रैल 1998 में शुरू हुई धूत ट्रांसमिशन, वायरिंग हार्नेस और इलेक्ट्रिकल डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम बनाने वाली भारत की जानी-मानी कंपनियों में से एक है. कंपनी के उत्पाद पेट्रोल-डीज़ल और इलेक्ट्रिक, दोनों तरह की गाड़ियों में इस्तेमाल होते हैं. कंपनी के गाड़ियों से जुड़े उत्पादों का 95% हिस्सा इलेक्ट्रिक व्हीकल-केंद्रित या पावरट्रेन-न्यूट्रल है, यानी ये पेट्रोल-डीज़ल और इलेक्ट्रिक, दोनों तरह की गाड़ियों में काम आ सकते हैं.
- भारत के दोपहिया और तिपहिया वाहनों के वायरिंग हार्नेस बाज़ार में कंपनी की हिस्सेदारी 41% है.
- इलेक्ट्रिक दोपहिया और तिपहिया वाहनों के हिस्से में कंपनी की हिस्सेदारी लगभग 70% है (वित्त वर्ष 2026).
- 31 मार्च 2026 तक कंपनी में 2,735 पूर्णकालिक कर्मचारी थे.
- कंपनी के बड़े ऑटो निर्माता (OEM) ग्राहकों के साथ पुराने रिश्ते हैं.
IPO की बुनियादी जानकारी
| प्राइस बैंड | ₹829 – ₹871 |
| लॉट साइज़ | 17 शेयर (कम से कम ₹14,807 का निवेश) |
| फ्रेश इश्यू | ₹1,400 करोड़ |
| ऑफर फॉर सेल | ₹1,666.89 करोड़ |
| मार्केट कैपिटलाइजेशन (इश्यू के बाद) | ₹17,816.14 करोड़ |
| P/E (इश्यू के बाद) | 44.9 गुना |
कंपनी के फाइनेंशियल आंकड़े
| आंकड़ा (₹ करोड़ में) | 31 मार्च 2026 | 31 मार्च 2025 | 31 मार्च 2024 |
|---|---|---|---|
| कुल एसेट | 4,114.83 | 2,336.23 | 1,711.70 |
| कुल रेवेन्यू | 4,563.70 | 3,472.24 | 2,799.32 |
| मुनाफ़ा (PAT) | 396.84 | 353.89 | 298.75 |
| EBITDA | 710.99 | 590.96 | 512.4 |
| नेट वर्थ | 2,397.15 | 978.18 | 741.01 |
| रिज़र्व और सरप्लस | 2,360.40 | 961.53 | 724.74 |
| कुल कर्ज़ | 841.39 | 776.06 | 554.9 |
| कंपनी का रेवेन्यू साल दर साल 31% बढ़ा है और मुनाफा 12% बढ़ा है (वित्त वर्ष 2025 से 2026 के बीच). | |||
प्रमुख रेशियो (KPI)
| आंकड़ा | 31 मार्च 2026 | 31 मार्च 2025 |
|---|---|---|
| ROE | 16.30% | 35.60% |
| ROCE | 19.14% | 29.66% |
| RoNW | 16.55% | 36.18% |
| प्रॉफ़िट मार्जिन (PAT Margin) | 8.70% | 10.19% |
| EBITDA मार्जिन | 15.71% | 17.15% |
| डेट-टू-इक्विटी रेशियो (Debt/Equity) | 0.35 | 0.78 |
| NAV | ₹149.74 | ₹68.25 |
| प्राइस-टू-बुक (PB) रेशियो | 5.82 | 12.76 |
वैल्यूएशन
| आंकड़ा | IPO से पहले | IPO के बाद |
|---|---|---|
| EPS | ₹21.06 | ₹19.40 |
| P/E | 41.36 गुना | 44.9 गुना |
| मार्केट कैपिटलाइजेशन | ₹16,415.53 करोड़ | ₹17,816.14 करोड़ |
इश्यू से मिली रक़म का इस्तेमाल
| फ्रेश इश्यू से मिली पूंजी | रकम (₹ करोड़ में) |
|---|---|
| कर्ज़ चुकाना - कंपनी का अपना | 464.8 |
| कर्ज़ चुकाना - चार सहायक कंपनियों का | 301.77 |
| नया वायरिंग हार्नेस प्लांट (हरियाणा + तमिलनाडु) | 150 |
| कुल तय किया गया हिस्सा | 916.58 |
| बाकी बचा हिस्सा (कंपनी ख़रीदना / सामान्य कामकाजी ज़रूरतें, रकम तय नहीं) | ₹1,400 करोड़ में से बाक़ी ₹483 करोड़ |
हिस्सेदारी ढांचा
| IPO से पहले | IPO के बाद | |
|---|---|---|
| प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप | 100% | 82.77% |
| आम जनता | - | 17.23% |
ऑफर फॉर सेल में कौन बेच रहा है
| बेचने वाला शेयरधारक | शेयर | रकम |
|---|---|---|
| बीसी एशिया इन्वेस्टमेंट्स XV लिमिटेड | 1,60,18,769 | ₹1,395.23 करोड़ |
| मंगलम कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड | 31,18,833 | ₹271.65 करोड़ |
निष्कर्ष
इन सारे आंकड़ों को एक साथ रखकर देखें तो एक अलग तस्वीर बनती है.
मुनाफे के अनुपात आधे क्यों हो गए
मुनाफा और कमाई बढ़ने के बावजूद ROE, ROCE और RoNW जैसे रेशियो एक ही साल में लगभग आधे हो गए, क्योंकि लिस्टिंग से पहले कंपनी में करीब ₹1,400 करोड़ की पूंजी डाली गई और नेट वर्थ 145% बढ़ गया. जबकि कंपनी का कुल क़र्ज़ घटने के बजाय ₹65.33 करोड़ और बढ़ गया. यानी क़र्ज़-से-पूंजी अनुपात सिर्फ इसलिए सुधरा क्योंकि पूंजी का आधार बड़ा हो गया, क़र्ज़ कम नहीं हुआ.
क़र्ज़ चुकाने पर इतना ज़ोर क्यों
इसी वजह से अब ₹916.58 करोड़ के तय खर्च में से 84% (₹766.57 करोड़) उसी क़र्ज़ को चुकाने में जा रहा है जो पहले से काबू में था और अपने आप बढ़ भी रहा था. नए प्लांट के लिए सिर्फ ₹150 करोड़ यानी 16% बचा है.
असली फायदा किसे मिल रहा है
ऑफर फॉर सेल का ₹1,395.23 करोड़ यानी लगभग पूरा हिस्सा एक निवेशक कंपनी (बीसी एशिया इन्वेस्टमेंट्स) के बाहर निकलने में जा रहा है, जो कंपनी के लिए जुटाई जा रही नई पूंजी से भी ज़्यादा है.
क़ीमत कितनी महंगी है
इन सबके बीच निवेशकों से वित्त वर्ष 2026 की कमाई का 44.9 गुना दाम मांगा जा रहा है, जबकि टेनेको क्लीन एयर इंडिया (28.97 गुना) और स्टड्स एक्सेसरीज़ (33.06 गुना) जैसी हाल की ऑटो कंपोनेंट लिस्टिंग कहीं सस्ती क़ीमत पर आई थीं.
यानी असली सवाल कारोबार की मज़बूती का नहीं, बल्कि इस बात का है कि जिस साल हर मुनाफ़े का रेशियो गिरा हो और ज़्यादातर नई पूंजी किसी और की एग्ज़िट व पुराने क़र्ज़ की सफाई में जा रही हो, क्या उसके लिए इतनी ऊंची क़ीमत चुकाना सही है.
वैल्यू रिसर्च की राय
एक बेहतरीन कारोबार और एक बेहतरीन निवेश, दोनों एक ही बात नहीं होते. वैल्यू रिसर्च स्टॉक एडवाइज़र किसी भी IPO के शोर के पीछे के कारोबार, उसके वित्त और उसकी असली क़ीमत की गहरी पड़ताल करता है, ताकि आप साफ़ तर्क पर टिका फ़ैसला ले सकें.
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