फ़र्स्ट पेज

यहां डरना मना है

चिंता में रहना स्थाई-भाव जैसा क्यों लगने लगा है नई पीढ़ी के निवेशकों में…

चिंता में रहना स्थाई-भाव जैसा क्यों लगने लगा है नई पीढ़ी के निवेशकों में…

स्टॉक और इक्विटी निवेश में जुटी, नई पीढ़ी आपको अक्सर चिंता से ग्रस्त दिख जाएगी। पिछले दो साल में, इक्विटी-निवेश में काफ़ी नए लोग शामिल हुए हैं। इस ताज़ा बहार की कई वजहें हो सकती हैं, मगर उसके कारणों पर बात फिर कभी। यहां बात करते हैं, उस चिंता की जो इन नए निवेशकों में अक्सर दिखाई देती है। चिंता भी ऐसी, कि बाज़ार की हर हिचकी पर, उनकी धड़कनें, जैसे थमती हुई सी लगती हैं।

चीनी वायरस की वजह से हुए क्रैश के बाद, जब मई, 2020 के आसपास बाज़ार में वापस उछाल आने लगा, तब से इक्विटी के दाम, रोलर-कोस्टर पर सवार हैं। इस तेज़ रफ़्तार सवारी का ‘एड्रेनेलिन-रश’ है, मुनाफ़ा। जिसका पूरा आनंद, अलग-अलग सैक्टर, और साइज़ की कंपनियां, बारी-बारी से पा रही हैं। मगर इस सब के बीच, निवेशक पूरे ज़ोर-शोर से इस जुगत में हैं कि कहीं से कोई सुराग मिल जाए, आख़िर बाज़ार का ऊंट, अब किस करवट बैठेगा? क्या बातें बाज़ार के रुख़ को तय करेंगी? एक ख़ास बात मैंने ग़ौर की है, वो ये, कि इक्विटी के मज़बूत परफॉर्मेंस के दौरान भी, निवेशकों का भरोसा कमज़ोर ही रहता है। यानि बाज़ार कुछ भी करे, शॉर्ट-टर्म की अटकल-बाज़ियां और डर, उनपर हावी रहते ही हैं।

जिन लोगों से मैं मिलता हूं, उनसे बात कर के एक बात साफ़ हो गयी है - निवेशकों की नई पौध की तबियत, ज़रा जल्दी घबरा जाने की है। हालांकि, इसमें अजीब कुछ भी नहीं है। दरअसल, एक परिपक्व निवेशक बनने के लिए, आपको अनुभव की ज़रूरत होती है। मगर यहां, एक और बात समझने की है, कि आपको किस तरह के अनुभव की ज़रूरत है।

हम सभी ने एक कहावत सुनी है, अनुभव सबकुछ सिखा देता है। ये बात सच तो है, मगर इसमें एक छोटा सा पेंच है, वो ये कि-बुरे अनुभव, अच्छे टीचर होते हैं, और अच्छे अनुभव, बुरे टीचर होते हैं। नए निवेशक जिन्होंने सिर्फ़ अच्छा वक़्त ही देखा है, वो दरअसल अच्छे टीचर की क्लास ही अटेंड नहीं कर पाए हैं।

जब एक नया व्यक्ति निवेश की शुरुआत करता है, कई महीनों (या शायद कई साल) तक, सबकुछ बहुत अच्छा चलता रहता है, और मार्केट ऊपर ही चढ़ता रहता है। तो उसका अनुभव सिर्फ़ कैलेंडर तक ही सीमित रह जाता है, दिमाग़ तक उतर ही नहीं पाता। मैं ये जानता हूं, क्योंकि मैं भी इससे गुज़र चुका हूं। सच तो ये है, कि इस तरह का अनुभव एक नेगेटिव अनुभव है। यानि अक्सर ऐसा अनुभव, व्यक्ति को ख़राब निवेशक बनाता है, बेहतर नहीं करता। इससे सिर्फ़ अति-आत्मविश्वास ही हासिल होता है, और कुछ नहीं। अभी हाल ही में, मैंने एक ट्वीट पढ़ा, ‘चढ़ते हुए बाज़ार में हर किसी का IQ 30 प्वाइंट्स बढ़ जाता है’।

जब कोई निवेश करना शुरु करता है, और अच्छा दौर कुछ समय तक साथ देता है, तो वास्तविकता का बोध धुंधला पड़ जाता है। आप निवेश करते रहते हैं, पैसा तेज़ी से बढ़ता रहता है, और आप इसे ही ‘नॉर्मल’ समझ बैठते हैं। इसे अपना जीनियस तक मान बैठते हैं, या समझने लगते हैं, कि ये सबकुछ यूं ही, सतत चलता रहेगा। और तभी बुरा वक़्त चोट कर देता है। अब ये इस बात पर निर्भर करता है कि कितना बुरा। इस चोट का शॉक छोटा हो सकता है, या फिर बिलकुल झकझोर देने वाला भी हो सकता है। मगर किसी भी सूरत में इससे बचा नहीं जा सकता। क्योंकि, ये हर निवेशक की ज़िंदगी में आता है, और अक्सर कई बार आता है।

और जब बुरा वक़्त आए, तो उससे निपटने का फॉर्मूला बड़ा ही सीधा-सरल है। अगर आप नए निवेशकों में से हैं, और आपने समझदारी से, मगर एक-मुश्त निवेश किया है, तो होल्डिंग की वैल्यू को रोज़-रोज़ देखना बंद कर दीजिए! इससे ज़्यादा घातक आपके लिए और कुछ नहीं हो सकता, कि आप हर हफ़्ते या दस-दिन में, उसे उठते-गिरते देखते रहें। अब ये चाहे स्टॉक हों, या म्यूचुअल फ़ंड, दो बातें आपके लिए काम करेंगी, पहला, आपके अच्छे निवेश का बेसिक लॉजिक, और दूसरा, आपका धीरज के साथ इंतज़ार करना, और य दोनों बातें काफ़ी हैं सबकुछ दुरुस्त करने के लिए।

मगर इससे भी ज़्यादा महत्वपूर्ण ये है, कि आप निवेश करना जारी रखें, और प्राइस के इस घूमते हुए पहिए के नीचे पहुंचने का भरपूर फ़ायदा उठाएं। क्योंकि यही तो वक़्त है अपने पोर्टफ़ोलियो को बेहतर वैल्यू के साथ खड़ा करने का।

मगर इन बुनियादी उसूलों में एक अपवाद भी है-अगर आप शॉर्ट-टर्म पैसे के साथ खेल रहे हैं। शॉर्ट-टर्म पैसा यानि, वो पैसा जिसकी आपको अगले एक या दो साल में ज़रूरत हो सकती है-और इसी वजह से आप इसे गंवाने का ख़तरा नहीं उठा सकते-तो शॉर्ट-टर्म पैसे को इक्विटी में निवेश करना, एक बुरा आइडिया है। और वो भी ऐसे वक़्त में, जब दुनिया एक अभूतपूर्व शॉक से उबर ही रही हो। तब तो इस तरह का निवेश, एक बेहद ख़राब विकल्प ही माना जाएगा। अगर ऐसा है, तो आप जान छुड़वाइए, और बाज़ार से जल्दी निकल जाइए, इस मामले में, कोई और राय हो ही नहीं सकती।

एक बात और, जो शायद आपको अजीब लगे, मगर नए निवेशकों को इस किस्म के अनुभव, और इस वक़्त का शुक्रिया अदा करना चाहिए-क्योंकि इस किस्म का अनुभव एक ऐसा टीचर है, जिसकी हमें सख़्त ज़रूरत है।

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

ज़्यादातर इंटरनेशनल फ़ंड बंद, लेकिन ये 12 अभी भी SIP ले रहे हैं

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

पराग पारिख को REITs पर इतना भरोसा क्यों है?

पढ़ने का समय 6 मिनटहर्षिता सिंह

तेज़ी से बढ़ रहा है यह सेक्टर, लेकिन स्टॉक चुनना कितना मुश्किल है?

पढ़ने का समय 5 मिनटवैल्यू् रिसर्च टीम

हर तिमाही 20% बढ़ी इन 5 कंपनियों की कमाई, लेकिन असल कहानी क्या है?

पढ़ने का समय 6 मिनटसत्यजीत सेन

पुरानी फ़ाइल, नई कंपनी

पढ़ने का समय 4 मिनटधीरेंद्र कुमार

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

इतना लंबा सफ़र

इतना लंबा सफ़र

आज सबसे बड़ा एक्टिव फ़ंड उतनी रक़म मैनेज करता है, जितनी इस मैगज़ीन के शुरू होने पर पूरी इंडस्ट्री करती थी

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी