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सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड मैच्योर होने पर क्या होता है?

जानिए, SGB मैच्योर होने पर आपकी रक़म कैसे वापस मिलती है

जानिए, SGB मैच्योर होने पर आपकी रक़म कैसे वापस मिलती है

सारांशः आपके SGB मैच्योर होने वाले हैं? यहां बताया गया है कि मैच्योरिटी से एक महीने पहले क्या होता है. साथ ही हम ये भी समझा रहे हैं कि SGB सोने में निवेश का सबसे सुविधाजनक तरीक़ों में से एक क्यों हैं.

क्या मैच्योरिटी पर SGB बेचना पड़ता है या रक़म अपने आप डीमैट में आ जाती है? अगर मैंने SGB फ़रवरी 2029 ख़रीदा है तो क्या ये 2029 में मैच्योर होगा और रक़म अपने आप क्रेडिट हो जाएगी? क्या मैच्योरिटी पर हमें मार्केट प्राइस मिलेगा या NSE का भाव मिलेगा? -एक पाठक 

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड्स की अवधि आठ साल होती है. मैच्योरिटी से एक महीने पहले निवेशकों को बॉन्ड की मैच्योरिटी डेट की सूचना भेजी जाती है. मैच्योरिटी की तारीख़ पर रक़म सीधे उस बैंक अकाउंट में जमा कर दी जाती है जो निवेशक ने आवेदन करते समय दिया था. यही बैंक डिटेल SGB सर्टिफ़िकेट पर भी लिखी होती है. अगर बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट से ख़रीदे गए थे, तो कमाई ट्रेडिंग अकाउंट से जुड़े बैंक अकाउंट में जमा कर दी जाएगी.

अगर निवेशक SGB को मैच्योरिटी तक रखते हैं तो उन्हें रिडेम्शन प्राइस पर भुगतान मिलता है. ये क़ीमत IBJA द्वारा प्रकाशित पिछले तीन क़ारोबारी दिनों के 999 शुद्धता वाले सोने के क्लोज़िंग प्राइस के साधारण औसत पर आधारित होती है. बॉन्ड एक्सचेंज पर प्रीमियम या डिस्काउंट पर ट्रेड कर सकते हैं, लेकिन रिडेम्शन के समय निवेशक को वही बाज़ार मूल्य दिया जाता है जितने सोने पर उनका SGB आधारित है.

ये भी ध्यान रखने योग्य है कि सोने में निवेश के सबसे सुविधाजनक तरीक़ों में से एक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड हैं. ये सालाना 2.5 प्रतिशत की तय ब्याज दर देते हैं. ये टैक्स-एफ़िशिएंट हैं और गिफ्ट भी किए जा सकते हैं, इसलिए बहुत से निवेशकों के लिए ये बिना झंझट वाला विकल्प बन जाता है.

ये भी पढ़ें: SGB FAQs: स्टॉक एक्सचेंज पर कैसे ख़रीदें-बेचें?

ये लेख पहली बार दिसंबर 11, 2025 को पब्लिश हुआ.

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