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म्‍यूचुअल फ़ंड सही है

फ़ंड निवेश में क्‍या करना है ये जानना तो ज़रूरी है, पर क्‍या नहीं करना है ये जानना भी बेहद ज़रूरी है

फ़ंड निवेश में क्‍या करना है ये जानना तो ज़रूरी है, पर क्‍या नहीं करना है ये जानना भी बेहद ज़रूरी है

आजकल हम सब ने सचिन तेंदुलकर का म्‍यूचुअल फ़ंड वाला विज्ञापन टीवी पर देखा होगा. होर्डिंग और अख़बारों में भी अक्सर दिख 'म्‍यूचुअल फ़ंड सही है' लिखा हुआ दिख जाता है. इतना कि अब ये स्लोगन काफ़ी जाना-पहचाना लगने लगा है. लेकिन पिछले कुछ दिनों ऐसे कुछ मामले हुए हैं कि इस स्लोगन के 'सही है' वाले हिस्से की हवा निकल गई है. 2020 में फ्रैंकलिन की स्कीमें बंद हो गईं. और हाल में एक्सिस को लेकर सामने आए स्‍कैंडल ने शक़ के माहौल को और हवा दे दी. इन झटकों के बावजूद, म्‍यूचुअल फ़ंड काफ़ी सुरक्षित निवेश का ज़रिया हैं. इनके लिए कड़े नियम-कानून हैं, जिनके रहते ये गुंजाइश तो बिल्कुल नहीं बचती कि रातों-रात कोई आपका पैसा लेकर रफ़ू-चक्कर हो जाएगा. ये बात तो ठीक है कि आपका म्‍यूचुअल फ़ंड इन्‍वेस्‍टमेंट आपका पैसा गंवा सकता है. लेकिन ये गंवाने की बात काफ़ी हद तक फ़ंड को लेकर आपके अपने चुनाव पर निर्भर करती है. इसके अलावा, मार्केट के परफ़ॉर्मेंस की वजह से ऐसा हो सकता है, पर किसी घोटाले की वजह से नहीं. चलिए, कुछ बुनियादी बातों पर ग़ौर करते हैं और देखते हैं कि आप अपने म्‍यूचुअल फ़ंड इन्‍वेस्‍टमेंट को ग्रो करने का पूरा मौक़ा दे रहे हैं या नहीं. सिर्फ़ ज़्यादा-से-ज़्यादा फ़ायदे के पीछे ही न भागें हर वक़्त बेस्‍ट रिटर्न देने वाले इन्‍वेस्‍टमेंट के पीछे भागते रहना भारी पड़ सकता है. लेकिन क्‍या ये बात इन्वेस्टिंग के पूरे आधार को ही ग़लत नहीं साबित करती? नहीं, असल में नहीं करती. एक आदर्श इन्‍वेस्‍टमेंट वही है, जो आपकी ज़रूरतों पर खरा उतरता हो. बहुत से इन्वेस्टर इस बात को नहीं समझ पाते कि बेस्‍ट रिटर्न की होड़, ऐसे रिस्‍क के साथ आती है, जो आसानी से नहीं दिखाई नहीं देता, ख़ासतौर पर डेट फ़ंड के मामले में तो ऐसा ही है. डेट फ़ंड में, आपका सबसे ज़्यादा ज़ोर पैसों को सुरक्षित रखने का होना चाहिए न कि ज़्यादा रिटर्न पाने का. बड़े मुनाफ़े के लिए आपको इक्विटी में इन्वेस्ट करने को तरजीह देनी चाहिए. जब फ़्रैंकलिन ने अप्रैल 2020 में अपनी छह डेट स्‍कीमें बंद कर दी थीं, तो इसे समझने वाले निवेशकों पर कोई ख़ास असर नहीं पड़ा. ये छह स्‍कीमें कुल ₹25,000 करोड़ से ज़्यादा के एसेट मैनेज कर रही थीं. ये भी पढ़िए- घर के 'शेरों' पर दांव लगा रहे हैं फ

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