फ़र्स्ट पेज

NPS ऑटोमैटिक होना चाहिए

नेशनल पेंशन सिस्टम निवेश का शानदार तरीक़ा है, क्या ऐसा सिस्टम बन सकता है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर पाएं?

नेशनल पेंशन सिस्टम निवेश का शानदार तरीक़ा है, क्या ऐसा सिस्टम बन सकता है कि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर पाएं?Anand Kumar

back back back
5:53

क्या आप किसी ऐसे क्रिकेटर का नाम बता सकते हैं जो टीम के लिए बहुत काम का हो पर जिसका खेल ज़्यादा आकर्षक नहीं हो, और इसीलिए उसे शायद ही कभी टीम में शामिल किया जाता हो? मुझे यक़ीन है आपको ऐसे क्रिकेटर का नाम पता होगा. पर अगर, लोगों के निवेश पोर्टफ़ोलियो को एक क्रिकेट टीम की तरह देखें, तो उस खिलाड़ी का नाम होगा नेशनल पेंशन सिस्टम.

NPS मुझे निराश करता है. इसलिए नहीं कि इसमें कोई ख़राबी है, बल्कि इसलिए क्योंकि भारत में बचत करने वालों के लिए निवेश के जितने भी विकल्प मौजूद हैं, उनमें से नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का इस्तेमाल सबसे कम होता है. किसी भी दूसरे निवेश के मुक़ाबले, NPS हर निवेशक के लिए जितना फ़ायदेमंद है उस लिहाज़ से इसका फ़ायदा बेहद कम लोग उठाते हैं.

यहां एक बात कहने जा रहा हूं जो शायद ज़्यादातर पाठकों को अचरज में डाल दे: इसकी ख़ूबियों की वजह से, NPS को हर लंबे-समय का निवेश करने वाले की पहली पसंद होना चाहिए. एक बार आपने अपनी फ़ाइनांशियल प्लानिंग की बुनियादी बातों के ज़रूरी काम कर लिए, जैसे - इमरजेंसी के लिए पैसा अलग रखना, टर्म इंश्योरेंस, और हेल्थ कवर लेना, तो इसके बाद निवेशकों को म्यूचुअल फ़ंड और इक्विटी का रुख़ तभी करना चाहिए जब वो NPS का पूरा फ़ायदा उठा लें. या फिर सिर्फ़ उन ज़रूरतों के लिए दूसरे निवेश करने चाहिए जो NPS से पूरी नहीं हो सकते. हालांकि, शायद ही कोई ऐसा करता है. अगर मैं हज़ार म्यूचुअल फ़ंड निवेशकों से बात करता हूं तो उनमें से मुट्ठी भर ही होते हैं जो NPS को ख़ुद चुनते हैं (यानी, वो लोग नहीं जिनके संस्थानों ने NPS दिया हो).

ये भी पढ़िए- Mutual Funds जिन्हें अभी भी मिल रहा है इंडेक्सेशन बेनेफ़िट

इसका कारण समझना आसान है मगर ये एक कड़वा सच है. निवेश के बिज़नस में हर कोई जानता है कि निवेश के प्रोडक्ट ख़रीदे नहीं जाते; उन्हें बेचना पड़ता है, और उन्हें तभी बेचा जाता है जब उन्हें बेचने में पैसा हो. NPS का कम ख़र्चीला और आसान होना, उन कंपनियों और लोगों के लिए घाटे का सौदा हो जाता है जो आप लोगों को निवेश की सलाह देते हैं. ये उस क़िस्म के पैसे की बात हो रही है जो दूसरे प्रोडक्ट को बेचने से मिलने वाले पैसे का मुक़ाबला कर सकता हो. बात यहीं ख़त्म नहीं हो जाती कि बेचने वाले NPS को बेचने में रुचि नहीं रखते क्योंकि उसमें फ़ायदा नहीं है. असल में, अगर क्लायंट NPS में दिलचस्पी दिखाता भी है, तो बेचने वाले NPS की बुराई कर के उसे ऐसे प्रोडक्ट्स की तरफ़ मोड़ देते हैं जो ज़्यादा कमीशन देते हैं. ये सच है कि शुरुआत में NPS में कई कमियां थीं, जो टैक्स को लेकर, एन्युटी की बाध्यता की वजह से, और इसके अलावा कुछ और भी कारणों से थीं. हालांकि, पिछले कुछ समय में ये सभी कमियां दूर कर ली गई हैं और अब ये खुल कर कहा जा सकता है कि NPS में अब कोई बड़ी समस्या नहीं है.

वैल्यू रिसर्च में, हम NPS बेचने के लिए हतोत्साहित किए जाने की समस्या को हमेशा से समझते रहे हैं. हमने शुरुआत से ही NPS को लगातार और पूरे ज़ोर-शोर से प्रमोट किया है क्योंकि ये बहुत अच्छा प्रोडक्ट है. मगर बहुत ही कम लोग इसकी बात करते हैं. हम NPS को काफ़ी विस्तार से कवर करते हैं, हम NPS का डेटा म्यूचुअल फ़ंड और स्टॉक और बाक़ी के डेटा की तरह पूरे विस्तार से दिखाते हैं. NPS 'मेरे निवेश' नाम के हमारे पोर्टफ़ोलियो ट्रैकर का फ़र्स्ट-क्लास मेंबर है.

ये भी पढ़िए- शिकार मत बनिए

हालांकि, इस तरह की कोशिश बस वहीं तक पहुंच पाती हैं, जहां ये थोड़े से ऐसे लोगों के काम आ सके जो ख़ुद अपना ख़याल रखना अच्छी तरह से जानते हैं. आम निवेशक NPS के बहुत से लोगों तक न पहुंच पाने का समाधान दे, ये तो अच्छा है, मगर क्या NPS को लोगों बहुत से लोगों तक ले जाने का कोई सिस्टम नहीं बनाया जा सकता? मुझे यक़ीन है कि NPS इतना अच्छा सौदा है कि किसी तरह लोगों के साथ इसकी शुरुआत करनी होगी और फिर इसे ख़ुद-ब-ख़ुद गति मिल जाएगी. कुछ साल पहले छोटे NPS खातों को प्रोत्साहित करने के लिए एक योजना की घोषणा की गई थी लेकिन उसमें भी बेचने की समस्या थी. शायद इसका तरीक़ा ऑटोमैटिक NPS अकाउंट शुरू करना है. ब्रिटेन सहित, कुछ दूसरे देशों में ऐसा ही पेंशन सिस्टम पहले से चल रहा है.

मिसाल के तौर पर, जब कोई व्यक्ति, पैन कार्ड या बैंक अकाउंट के साथ फ़ॉर्मल फ़ाइनेंशियल सिस्टम का हिस्सा बनता है, तो कुछ डिफ़ॉल्ट सेटिंग के साथ एक NPS अकाउंट ऑटोमैटिक तरीक़े से खोल सकते हैं. इसे टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट से जोड़ा जा सकता है जो क़रीब-क़रीब ऑटोमैटिक हैं. जैसा कि म्यूचुअल फ़ंड के मामले में होता है कि टैक्स-बचत के निवेश, बचतकर्ताओं को कुछ नया करने की प्रेरणा देने का एक शानदार शुरुआती निवेश बन जाते हैं. मगर इसके लिए NPS में बदलाव की ज़रूरत होगी, लेकिन संभवतः ये इसके लायक़ है. मुझे उम्मीद है (और विश्वास भी) कि अंततः, NPS अपने फ़ायदेमंद रिटर्न, सुरक्षा और ख़ूबियों के कारण ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को आकर्षित करेगा. समय के साथ, और ज़्यादा लोग अपनी बचत का कुछ हिस्सा NPS में रखने का विकल्प चुनेंगे. बात बस इतनी है कि शुरुआत करने के लिए रास्ते को आसान बनाने की ज़रूरत है.

ये भी पढ़िए- ऊपर जाता बाज़ार ख़तरनाक तरीक़े से लुभा रहा है

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

एक ग्लोबल फ़ंड नई SIP के लिए फिर से खुला

पढ़ने का समय 5 मिनटआकार रस्तोगी

Motilal Oswal Nasdaq Q50 ETF: ₹213 की यूनिट में ₹96 प्रीमियम, क्या निवेश करना सही?

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

इन 5 इक्विटी फ़ंड को मिली परफ़ेक्ट 5-स्टार रेटिंग

पढ़ने का समय 5 मिनटख्याति सिमरन नंदराजोग

Fortis vs Aster: दो हॉस्पिटल चेन, लेकिन क्यों एक-दूसरे अलग हैं दांव?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

Rentomojo IPO: मुनाफ़ा असली, लेकिन क्या वैल्यूएशन बहुत महंगी है?

पढ़ने का समय 7 मिनटLekisha Katyal

वैल्यू रिसर्च हिंदी पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

NPS को लेकर नकारात्मकता क्यों?

क्यों सबसे ज़्यादा मुखर आलोचक रिटायरमेंट निवेश की असली बात को नज़रअंदाज़ कर देते हैं

अन्य एपिसोड

These are advertorial stories which keeps Value Research free for all. Click here to mark your interest for an ad-free experience in a paid plan

दूसरी कैटेगरी