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सारांशः NPS ने चुपचाप गैर सरकारी सब्सक्राइबर्स के लिए नए रास्ते खोले हैं, लेकिन जो मुख्य आंकड़ा चर्चा में है, वो पूरी कहानी नहीं है. कहीं और जो पढ़ा है उस पर कोई क़दम उठाने से पहले, दो नियम जान लें जो पूरा हिसाब बदल देते हैं.
अगर आपका NPS अकाउंट प्राइवेट सेक्टर में है, तो शायद यह हेडलाइन आपकी नज़र से गुज़री होगी: NPS अब 100% पैसा इक्विटी में लगाने की इजाज़त देता है. एक ऐसे प्रोडक्ट के लिए जिसने पूरी उम्र इक्विटी की सीमा 75% रखी, यह उस बदलाव जैसा लगता है जिसका लॉन्ग-टर्म निवेशक इंतज़ार कर रहे थे. और यह सच भी है. लेकिन दो नियम तय करते हैं कि यह आपके काम का है या नहीं और ज़्यादातर कवरेज इन दोनों को नज़रअंदाज़ कर गई है.
असल में क्या बदला है? 1 अक्तूबर 2025 से PFRDA ने गैर सरकारी सब्सक्राइबर्स के लिए मल्टीपल स्कीम फ़्रेमवर्क (MSF) लॉन्च किया है, जो All Citizen और Corporate मॉडल पर लागू होता है. इसके तहत पेंशन फ़ंड मॉडरेट और हाई-रिस्क वैरिएंट में स्कीम ऑफ़र करते हैं और हाई-रिस्क वैरिएंट में 100% तक इक्विटी हो सकती है. आपका पुराना NPS अकाउंट वैसे का वैसा ही रहेगा. उन्हें अब 'Common Schemes' कहा जाता है और उनमें 75% इक्विटी की सीमा बनी रहती है. 100% तक पहुंचने के लिए MSF के तहत एक नई स्कीम खोलनी होगी; आप अपने मौजूदा अकाउंट को सीधे फुल इक्विटी में नहीं बदल सकते. यही वो पहली बात है जो '100% इक्विटी!' की हेडलाइन्स दबा देती हैं - नई सीमा सिर्फ़ नई स्कीम में नए पैसे पर लागू होती है, उस कॉर्पस पर नहीं जो आप पहले से बना चुके हैं.
दूसरा नियम और भी ज़्यादा मायने रखता है. MSF स्कीम्स में कम से कम 15 साल का वेस्टिंग पीरियड होता है. इन 15 सालों में आप MSF स्कीम से Common Scheme में तो जा सकते हैं, लेकिन MSF स्कीम्स के बीच आज़ादी से स्विच नहीं कर सकते. यह सुविधा 15 साल बाद या नॉर्मल एग्ज़िट पर ही मिलती है. तो जिस प्रोडक्ट को 'ज़्यादा आज़ादी' के नाम पर बेचा जा रहा है, वो असल में Common Scheme से ज़्यादा सख्त बंदिशें लगाता है और बदले में ऊंची इक्विटी सीमा मिलती है. 30 साल के किसी शख़्स के लिए 15 साल का नज़रिया ठीक है. लेकिन जो किसी गोल के क़रीब हों, उनके लिए यह एक असली रुकावट है.
फिर वापस मिलने वाली रक़म का भी एक पेंच है. PFRDA के 2025 के एग्ज़िट नियम गैर सरकारी सब्सक्राइबर्स को एग्ज़िट पर 80% तक एकमुश्त लेने की सहूलियत देते हैं, जबकि कम से कम 20% एन्युटी में जाना ज़रूरी है. पहले यह रेशियो 60/40 था. यानी हाथ में सच में ज़्यादा पैसा. लेकिन टैक्स का क़ानून अभी इसके साथ क़दम नहीं मिला पाया है: फ़िलहाल कॉर्पस का सिर्फ़ 60% ही टैक्स-फ़्री है. जो 20% अब आप निकाल सकते हैं, वो एक ग्रे ज़ोन में है जब तक फ़ाइनेंस मिनिस्ट्री इसे स्पष्ट नहीं कर देती. तो '80% निकाल सकता हूं' और '80% टैक्स-फ़्री है' - ये दो अलग बातें हैं और फ़िलहाल सिर्फ़ पहली बात सच है. अगर आपका कॉर्पस ₹8 लाख या उससे कम है, तो पूरी रक़म निकाली जा सकती है; ₹8-12 लाख के बीच भी नियम थोड़े आसान हैं. एन्युटी की असली तकलीफ़ ₹12 लाख से ऊपर पर ही है.
लागत के मोर्चे पर ख़बर अच्छी और साफ़ है. MSF स्कीम्स की फ़ीस साल में एसेट्स का ज़्यादा से ज़्यादा 0.30% है (कुछ फ़ंड्स के लिए एक इंसेंटिव के छोटे प्रोविजन के साथ यह थोड़ा ऊपर जा सकती है). यह पुराने NPS की एकदम न्यूनतम फ़ीस से थोड़ी ज़्यादा है, लेकिन किसी इक्विटी म्यूचुअल फ़ंड के मुक़ाबले अब भी बहुत कम. कम लागत हमेशा NPS का सबसे मज़बूत पहलू रही है और MSF इसे बनाए रखता है.
तो यह असल में किसके लिए है? अगर आप युवा हैं, 15 साल या उससे ज़्यादा के नज़रिये से सहज हैं और म्यूचुअल फ़ंड से बहुत कम लागत पर अधिकतम इक्विटी चाहते हैं, तो MSF आपके रिटायरमेंट पोर्टफ़ोलियो में एक मज़बूत जोड़ है. अगर आपको 10-15 साल में पैसे की ज़रूरत पड़ने वाली है, या आप चाहते हैं कि स्कीम्स जल्दी बदलने की सहूलियत रहे, तो इसकी बंदिशें सोचने पर मजबूर करती है. ऐसे में मौजूदा Common Scheme, 75% इक्विटी के साथ, शायद आपके लिए ज़्यादा सही रहे. हर हाल में, MSF स्कीम खोलते वक़्त यह न सोचें कि आपका पुराना NPS बैलेंस भी साथ आ जाएगा. नहीं आएगा.
साफ़ शब्दों में: NPS सही इंसान के लिए एक गंभीर वेल्थ-बिल्डिंग टूल बन गया है. बस यह जानकर आगे बढ़ें कि 100% इक्विटी का नंबर वो हिस्सा है जो बेचा जाता है, और 15 साल का लॉक और टैक्स का ग्रे ज़ोन वो हिस्से हैं जिस पर फ़ैसला करना चाहिए.
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ये लेख पहली बार जून 09, 2026 को पब्लिश हुआ.





