फंड वायर

Nifty vs Sensex: क्या है बेहतर निवेश के लिए?

यहां हम रीडर्स के अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में से एक का जवाब दे रहे हैं

यहां हम रीडर्स के अक्सर पूछे जाने वाले सवालों में से एक का जवाब दे रहे हैं

back back back
3:21

हाल के सालों में इंडेक्स फ़ंड्स ने भारी लोकप्रियता हासिल की है. हालांकि, म्यूचुअल फ़ंड अलग-अलग इंडेक्स ट्रैक करते हैं, मगर नीचे दिए कारणों से सेंसेक्स और निफ़्टी सबसे ज़्यादा पसंद किए जाते हैं:

  • ये दोनों इंडेक्स भारत की कुछ सबसे बड़ी कंपनियों के पसंदीदा हैं.
  • क्योंकि ये भारतीय बाज़ार के लिए एक बेंचमार्क हैं, इसलिए मीडिया - घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों - से इनके नियमित अपडेट मिलते हैं, जिससे इनकी ख़बरें निवेशकों के बीच आसानी से पहुंच जाती हैं.
  • इन इंडेक्स में कंपनियों का बड़ा क़ारोबार होता है, जिससे उनमें काफ़ी लिक्विडिटी रहती है.
  • दोनों इंडेक्स में तरह-तरह के सेक्टर्स के स्टॉक हैं, जो इनमें डाइवर्सिटी का अच्छा स्तर देते हैं.

लोगों में इनकी बड़ी जन अपील को देखते हुए, ये कोई चौंकाने वाली बात नहीं कि इक्विटी-आधारित इंडेक्स फ़ंड और ETFs में निवेशकों के ₹5.29 लाख करोड़ में से 79 प्रतिशत पैसा निफ़्टी और सेंसेक्स पर नज़र रखने वाले फ़ंड्स के पास है.

क़रीब-क़रीब एक जैसा फ़र्क़
अब जब हमने निफ़्टी और सेंसेक्स इंडेक्स फंडों की लोकप्रियता जान लिया है, तो आइए दोनों के बीच के अंतर को भी समझें.

शुरुआत के लिए, सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर सबसे ज़्यादा एक्टिव तौर पर क़ारोबार करने वाले 30 शेयरों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है. इसके विपरीत, निफ़्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर सबसे ज़्यादा सक्रिय रूप से क़ारोबार करने वाले 50 शेयरों के प्रदर्शन को ट्रैक करता है.

जैसा कि कहा गया है, दोनों इंडेक्स के बीच काफ़ी ओवरलैप है. हक़ीकत में, 30 सितंबर, 2023 तक दो इंडेक्स फ़ंड्स के पोर्टफ़ोलियो के आधार पर, निफ़्टी सभी 30 सेंसेक्स कंपनियों की पसंदीदा जगह है. सीधे शब्दों में कहें तो निफ़्टी और सेंसेक्स 86.67 फ़ीसदी एक जैसे हैं.

थोड़े शब्दों में, पोर्टफ़ोलियो के नज़रिए से दोनों के बीच बहुत कम अंतर है.

थोड़ा या कोई अंतर नहीं
प्रदर्शन के नज़रिए से भी, बहुत कम अंतर है.

ट्रैलिंग रिटर्न - एक खास तारीख़ से किसी दूसरी तारीख़ तक - बेहद नज़दीक हैं.

पांच साल के रोलिंग रिटर्न चार्ट से पता चलता है कि सेंसेक्स थोड़ा आगे है. (रोलिंग रिटर्न, ट्रेलिंग रिटर्न की एक कड़ी है. ये किसी निवेश की स्थिरता का बेहतर इंडिकेटर है)

आपको क्या करना चाहिए
दोनों में कोई ख़ास अंतर नहीं है. चाहे आप कोई भी पैसिवली-मैनेज इंडेक्स फ़ंड चुनें, हमारा सलाह है कि आप अपना निवेश अभी शुरू करें. दोनों आपको लॉन्ग-रन में वैल्थ बनाने में मदद कर सकते हैं.

वैल्यू रिसर्च से पूछें aks value research information

कोई सवाल छोटा नहीं होता. पर्सनल फ़ाइनांस, म्यूचुअल फ़ंड्स, या फिर स्टॉक्स पर बेझिझक अपने सवाल पूछिए, और हम आसान भाषा में आपको जवाब देंगे.


टॉप पिक

UPI फ़ीस नहीं, आपकी समस्या एक्सपेंस रेशियो है

पढ़ने का समय 3 मिनटआकार रस्तोगी

NSE IPO: ऐसा बिज़नेस जिसमें कोई कमी निकालना मुश्किल है

पढ़ने का समय 6 मिनटLekisha Katyal

वही 100 स्टॉक, एक फ़ंड ने 53% और चार ने दिया 30% रिटर्न

पढ़ने का समय 6 मिनटआकार रस्तोगी

पैसे की ज़रूरत है? तो समझदारी से बेचिए

पढ़ने का समय 3 मिनटआशुतोष गुप्ता

Hero Motors IPO: EV कारोबार बढ़ रहा है, लेकिन क्या इतनी क़ीमत चुकाना सही है?

पढ़ने का समय 7 मिनटसत्यजीत सेन

म्यूचुअल फंड पॉडकास्ट

updateनए एपिसोड हर शुक्रवार

गिरावट का मतलब नुक़सान नहीं होता

आपकी स्क्रीन पर लाल रंग का नंबर कोई नुक़सान नहीं है, आप उस पर कोई कदम उठाकर ही उसे पक्का करते हैं

दूसरी कैटेगरी