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Parag Parikh Flexi Cap ने एक साल में इन 5 शेयरों में लगाया सबसे ज़्यादा पैसा

ITC, TCS, HDFC Bank, Infosys और HCL Tech में फ़ंड ने ₹22,000 करोड़ से ज़्यादा झोंके, वो भी तब जब ये शेयर गिर रहे थे

ITC, TCS, HDFC Bank, Infosys और HCL Tech में फ़ंड ने ₹22,000 करोड़ से ज़्यादा झोंके, वो भी तब जब ये शेयर गिर रहे थेAI-generated image

सारांशः देश के सबसे बड़े फ़्लेक्सी कैप फ़ंड ने पिछले एक साल में जिन पांच शेयरों में सबसे ज़्यादा पैसा लगाया, उनमें तीन IT कंपनियां, एक बैंक और एक FMCG कंपनी शामिल है. इन पांचों में कुल मिलाकर ₹22,000 करोड़ से ज़्यादा की ख़रीद हुई. दिलचस्प बात यह है कि इस दौरान ये सभी शेयर 5% से 36% तक गिरे. यानी फ़ंड ने गिरावट को ख़रीदारी के मौक़े की तरह देखा. पर क्या आम निवेशक को भी यही करना चाहिए?

फ़ंड मैनेजर क्या ख़रीद रहे हैं और क्या बेच रहे हैं, यह जानने में हर निवेशक की दिलचस्पी होती है. ख़ासकर तब, जब बात Parag Parikh Flexi Cap जैसे फ़ंड की हो, जो अपने लंबी अवधि के नज़रिए और सोच-समझकर चुने गए पोर्टफ़ोलियो के लिए जाना जाता है. हमने सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक के मासिक पोर्टफ़ोलियो डेटा को देखा. इसमें पता चला कि फ़ंड ने किन भारतीय शेयरों में सबसे ज़्यादा नया पैसा लगाया. नतीजे चौंकाने वाले हैं.

एक नज़र में: टॉप 5 ख़रीद

शेयर नेट ख़रीद (₹ करोड़)* शेयरों की संख्या: सितं. 2025 → अग. 2026 होल्डिंग की वैल्यू, अग. 2026 (₹ करोड़) एक साल के दौरान भाव में बदलाव**
ITC 5,252 13.57 करोड़ → 30.33 करोड़ 7,773 -36%
TCS 4,696 5.7 लाख → 1.77 करोड़ 4,184 -18%
HDFC Bank 4,523 10.17 करोड़ → 15.87 करोड़ 11,254 -25%
Infosys 4,209 93 लाख → 4.27 करोड़ 4,815 -22%
HCL Technologies 3,652 1.87 करोड़ → 4.67 करोड़ 6,108 -5.50%
*सितंबर 2025 से अगस्त 2026 के बीच की अनुमानित नेट ख़रीद, महीने के आख़िरी दिन के भाव पर. **30 सितंबर 2025 से 31 अगस्त 2026 तक.

ITC: सबसे बड़ी ख़रीद

इस सूची में सबसे ऊपर ITC है. फ़ंड ने 12 महीनों में इसमें क़रीब ₹5,252 करोड़ लगाए. सितंबर 2025 में फ़ंड के पास ITC के क़रीब 13.57 करोड़ शेयर थे. अगस्त 2026 तक यह संख्या दोगुने से भी ज़्यादा होकर 30.33 करोड़ पहुंच गई.

सबसे बड़ी एकमुश्त ख़रीद जनवरी 2026 में हुई. उस महीने ITC का भाव क़रीब ₹403 से फिसलकर ₹322 पर आ गया था और फ़ंड ने क़रीब 6.1 करोड़ शेयर ख़रीद लिए. इनकी क़ीमत क़रीब ₹1,973 करोड़ थी. इसके बाद भी फ़ंड रुका नहीं. अप्रैल से जून 2026 के बीच भी भारी ख़रीदारी हुई.

पूरे दौर में ITC का शेयर क़रीब 36% गिरा है, जो इन पांचों में सबसे बड़ी गिरावट है. यानी फ़ंड ने जितना ज़्यादा भाव गिरा, उतना ज़्यादा ख़रीदा.

तीन IT दिग्गज: TCS, Infosys और HCL Tech

टॉप 5 में तीन IT कंपनियों का होना इस डेटा की सबसे बड़ी कहानी है. इन तीनों में फ़ंड ने मिलाकर क़रीब ₹12,560 करोड़ लगाए. यह टॉप 5 की कुल ख़रीद का आधे से ज़्यादा हिस्सा है. ज़ाहिर है, फ़ंड ने IT सेक्टर पर बड़ा दांव लगाया है.

TCS: यहां बदलाव सबसे नाटकीय है. सितंबर 2025 में फ़ंड के पास TCS के सिर्फ़ क़रीब 5.7 लाख शेयर थे, जिनकी वैल्यू क़रीब ₹166 करोड़ थी. अगस्त 2026 तक यह होल्डिंग क़रीब 31 गुना बढ़कर 1.77 करोड़ शेयर और वैल्यू क़रीब ₹4,184 करोड़ हो गई. नवंबर 2025 से जून 2026 के बीच फ़ंड ने लगभग हर महीने TCS ख़रीदा. सबसे बड़ी ख़रीद जनवरी 2026 में हुई, जो क़रीब ₹1,191 करोड़ की थी. इस दौरान TCS का भाव क़रीब 18% गिरा.

Infosys: फ़ंड ने पिछले एक साल के दौरान Infosys में क़रीब ₹4,209 करोड़ लगाए. होल्डिंग 93 लाख शेयर से बढ़कर 4.27 करोड़ शेयर हो गई, यानी क़रीब 4.6 गुना. फ़रवरी से जून 2026 के बीच लगातार ख़रीदारी हुई और अप्रैल 2026 में अकेले क़रीब ₹1,090 करोड़ के शेयर ख़रीदे गए. शेयर का भाव इस दौरान क़रीब 22% टूटा.

HCL Technologies: HCL Tech में फ़ंड ने क़रीब ₹3,652 करोड़ लगाए और होल्डिंग ढाई गुना बढ़ाई. अप्रैल 2026 में सबसे बड़ी ख़रीद हुई, जो क़रीब ₹1,251 करोड़ की थी. पूरे दौर में HCL Tech का भाव सिर्फ़ 5.5% नीचे है, लेकिन बीच में जून 2026 तक यह ₹1,072 तक फिसल गया था. फ़ंड ने इसी गिरावट के दौरान ज़्यादातर ख़रीदारी की.

HDFC Bank: पहले से बड़ी पोज़ीशन अब और बड़ी हुई

HDFC Bank पहले से ही फ़ंड के बड़े दांवों में था. सितंबर 2025 में इसकी होल्डिंग की वैल्यू क़रीब ₹9,670 करोड़ थी. फिर भी फ़ंड ने 11 में से 9 महीनों में इसके क़रीब ₹4,523 करोड़ के और शेयर ख़रीदे. शेयरों की संख्या 10.17 करोड़ से बढ़कर 15.87 करोड़ हो गई.

सबसे बड़ी ख़रीद मार्च 2026 में हुई. उस महीने शेयर का भाव ₹887 से गिरकर ₹732 के आसपास आ गया था और फ़ंड ने क़रीब 2.33 करोड़ शेयर ख़रीदे, जिनकी क़ीमत क़रीब ₹1,707 करोड़ थी. अगस्त 2026 तक क़रीब ₹11,254 करोड़ की वैल्यू के साथ HDFC Bank भारतीय शेयरों में फ़ंड की सबसे बड़ी होल्डिंग है.

यह पैटर्न क्या बताता है

इन पांचों शेयरों में एक बात कॉमन है: फ़ंड ने इन्हें तब ख़रीदा जब बाज़ार इनसे दूर भाग रहा था. ज़्यादातर बड़ी ख़रीद उन्हीं महीनों में हुई जब भाव तेज़ी से गिरे.

यह उसी सोच की झलक है जिसके लिए Parag Parikh Flexi Cap जाना जाता है. अच्छी कंपनी का शेयर सस्ते में मिले, तो उसे ख़रीदो और लंबे समय तक होल्ड करो. बड़ी, मुनाफ़ा कमाने वाली और मज़बूत बैलेंस शीट वाली कंपनियों के शेयर जब गिरते हैं, तो लंबी अवधि के निवेशक के लिए यह मौक़ा हो सकता है.

फ़ंड ने किनसे पैसा निकाला

ख़रीद के साथ-साथ फ़ंड ने कुछ शेयरों से दूरी भी बनाई. सबसे बड़ी बिक्री Balkrishna Industries में हुई. फ़ंड ने इस कंपनी के अपने सभी क़रीब 41.9 लाख शेयर बेच दिए, जिनकी क़ीमत क़रीब ₹930 करोड़ थी. इसके अलावा Reliance Industries में भी होल्डिंग घटाई गई. फ़ंड के पास इसके शेयर क़रीब 62.7 लाख से घटकर 40.6 लाख रह गए, यानी क़रीब ₹302 करोड़ की नेट बिक्री. Multi Commodity Exchange of India (क़रीब ₹195 करोड़) से भी फ़ंड पूरी तरह बाहर निकल गया.

आम निवेशक के लिए सबक

किसी बड़े फ़ंड को कोई शेयर ख़रीदते देखकर उसे ख़ुद ख़रीदने का मन करना स्वाभाविक है. लेकिन ऐसा करने से पहले कुछ बातें समझ लें.

  • पहली बात, फ़ंड का पूरा पोर्टफ़ोलियो कई शेयरों में बंटा होता है. किसी एक शेयर के ख़राब चलने का असर फ़ंड पर सीमित रहता है, जबकि आपके पोर्टफ़ोलियो पर ज़्यादा हो सकता है.
  • दूसरी बात, फ़ंड मैनेजर कई सालों के नज़रिए से ख़रीदते हैं और गिरावट में और ख़रीदने की क्षमता रखते हैं. क्या आप भी 20-30% की और गिरावट झेलने को तैयार हैं?
  • तीसरी बात, पोर्टफ़ोलियो का डेटा महीने भर बाद आता है. जब तक आपको पता चलता है, फ़ंड की ख़रीद हो चुकी होती है और भाव बदल चुके होते हैं.

अगर आपको फ़ंड मैनेजर की स्ट्रैटेजी पसंद है, तो सबसे आसान रास्ता है सीधे फ़ंड में निवेश करना. इससे आपको पूरा पोर्टफ़ोलियो और प्रोफ़ेशनल मैनेजमेंट, दोनों एक साथ मिलते हैं.

जोखिम भी समझ लें

  • इस स्टोरी में दी गई ख़रीद की रकम अनुमानित है. इसे महीने के आख़िरी दिन के भाव के आधार पर निकाला गया है, असल सौदे की क़ीमत अलग हो सकती है.
  • यह डेटा सितंबर 2025 से अगस्त 2026 तक का है. फ़ंड अपनी पोज़ीशन कभी भी बदल सकता है.
  • किसी फ़ंड का किसी शेयर को ख़रीदना उस शेयर में भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं है.
  • सस्ते हुए शेयर और सस्ते हो सकते हैं. गिरावट की वजहें कभी-कभी लंबे समय तक बनी रहती हैं.
  • IT सेक्टर पर बड़ा दांव फ़ंड को इस सेक्टर के उतार-चढ़ाव के प्रति ज़्यादा संवेदनशील बनाता है.

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