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Investment Portfolio 4: रिटायरमेंट के बाद आराम का इंतज़ाम

निवेश पोर्टफ़ोलियो की 5 पार्ट सीरीज़ का ये चौथा पार्ट है, और इसमें हम बता रहे हैं 60-70 साल के लोगों के लिए मॉडल पोर्टफ़ोलियो

निवेश पोर्टफ़ोलियो की 5 पार्ट सीरीज़ का ये चौथा पार्ट है, और इसमें हम बता रहे हैं 60-70 साल के लोगों के लिए मॉडल पोर्टफ़ोलियो

इस सीरीज़ के पिछले पार्ट में, हमने 50-60 साल की उम्र के लोगों के लिए ख़ासतौर से तैयार की गई निवेश स्ट्रैटजी की बात की. अब, हम 60-70 साल की उम्र के लोगों की पैसों से जुड़ी ज़रूरतों और मॉडल पोर्टफ़ोलियो का प्लान बता रहे हैं. 60-70 साल के लोगों के लिए मॉडल पोर्टफ़ोलियो 60 वर्षीय ज़ैनब अली के लिए आराम करने का समय है. हाल ही में रिटायर होने के बाद, वो हैदराबाद के बाहरी इलाक़े के अपने पुश्तैनी घर में वापस चली गईं, और उनके बचपन के दोस्तों और रिश्तेदारों ने गर्मजोशी से उनका स्वागत किया. इससे भी ज़्यादा अहम ये है कि उन्होंने अपने पेशेवर करियर के दौरान ₹1 करोड़ की एक बड़ा कॉर्पस तैयार किया. कुल मिलाकर उन्होंने अपने आराम के दिनों के लिए अच्छी रक़म बचा ली है. लेकिन क्या वो इसको बचाए रख सकती हैं? घोटालेबाज़ों, ज़मीन माफ़ियाओं, बेईमान रिश्तेदारों और न जाने क्या-क्या करने वालों को छोड़ भी दिया जाए, तो भी तमाम तरह के ख़तरे उनकी नींद उड़ाने के लिए तैयार हैं. तो, इससे पहले कि बदक़िस्मती उनके लिए सिर उठाए, आइए ख़तरों की पहचान करें और उन्हें शुरुआत में ही ख़त्म कर दें. ये बातें जितनी चौंकाने वाली लग सकती हैं, मगर उम्र बढ़ने के साथ-साथ ये इनके होने की संभावना से इनकार भी नहीं किया जा सकता. जब जीवन के 20-30 साल बिना किसी आमदनी के बिताने का दौर आता है, तब इस तरह के भय भी सिर उठा लेते हैं. यानी, जीवन बढ़ने के साथ और रिटायरमेंट की उम्र 60 साल होने का मतलब है, हममें से ज़्यादातर बिना किसी नियमित आमदनी के, कई दशकों तक जीवन जिएंगे. महंगाई भी एक ख़तरा है. ये आपकी ख़रीद क्षमता (purchasing power) को काफ़ी हद तक ख़त्म कर देती है. ये मानते हुए कि महंगाई हर साल 6 फ़ीसदी की दर से बढ़ती है, आपका ख़र्च हर 12 साल में दोगुना हो जाएगा. अगर सुश्री अली का महीने का बजट 60 साल की उम्र में ₹40,000 है, तो यही ख़र्च 72 साल की उम्र में ₹80,000 और 84 साल में आश्चर्यजनक रूप से ₹1.6 लाख हो जाएगा. इलाज से जुड़े ख़र्च इसके बाद आते हैं, जो रिटायर होने के बाद सुश्री अली (और आप) के महीने के बजट का एक बड़ा हिस्सा निगल सकते हैं. RBI का डेटा बताता है कि पिछले पांच साल में 60 फ़ीसदी अवधि में, स्वास्थ्य संबंधी लागत कुल महंगाई दर से ज़्यादा रही. इसलिए, आपके मेडिकल बिल आपकी व्यक्तिगत महंगाई दर को बढ़ा सकते हैं, जिसे आपको ध्यान में रख कर अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग करने के लिए मजबूर होना पड़ सकता ह

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