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क्रिप्टोकरंसी: डिज़िटल गोल्ड या बेवक़ूफ़ी?

आइये क्रिप्टोकरंसी में पैसा लगाने की दीवानगी और रिस्क समझें

आइये क्रिप्टोकरंसी में पैसा लगाने की दीवानगी और रिस्क समझें

क्रिप्टोकरंसी को लेकर उत्साह स्वाभाविक है. अमेरिका में बिटकॉइन ETF (एक्सचेंज-ट्रेडेड फ़ंड) के लॉन्च होने के बाद बिटकॉइन की क़ीमत में बड़ी तेज़ी और दिग्गज इन्वेस्टमेंट फ़र्म ब्लैकरॉक (Blackrock) की बढ़ती दिलचस्पी ने उन निवेशकों के बीच FOMO (मौक़ा गवाने का डर) पैदा कर दिया है जो इसमें निवेश के लिए उत्साहित हैं और इसे डिज़िटल गोल्ड के तौर पर देखते हैं.

हालांकि, इस उत्साह की वजह से इससे जुड़ा जोख़िम नज़अंदाज हो रहा है. जल्दी मुनाफ़ा कमाने की चाह इन डिज़िटल एसेट्स से जुड़े जोख़िमों और अस्थिरता पर हावी नहीं होनी चाहिए. ये लेख इस बारे में है कि क्यों सावधान रहना या क्रिप्टोकरंसी से पूरी तरह से दूर रहना एक अक्लमंदी भरा फ़ैसला है.

ताश के पत्तों का महल

क्रिप्टोकरंसी एक तरह से सट्टा है. इसमें फ़िजिकल एसेट या कैश-फ़्लो मौजूद नहीं होता, जो आमतौर पर पारंपरिक फ़ाइनेंशियल एसेट्स की निशानी होते हैं. इसलिए, एसेट की इस ग़ैरमौजूदगी में ख़रीदार सिर्फ़ उम्मीद ही कर सकते हैं कि उनकी क़ीमतें बढ़ेंगी. कहने का मतलब ये है कि इसमें ख़रीदार कोई असल एसेट्स नहीं ख़रीद रहा होता है बल्कि इस चीज़ पर दांव लगा रहा होता है कि ये कितना अच्छा प्रदर्शन देगा.

इनकी क़ीमत काफ़ी हद तक मार्केट की अटकलों और इनकी कमी (तथाकथित) पर निर्भर करता है. इस कमी को ख़ासतौर से बिटकॉइन का प्रोटोकॉल उजागर करता है, जिसमें सप्लाई को सीमित रखने और 'कमी' को बढ़ाने के मक़सद से "हाल्विंग" (halving) मैकेनिज़्म का इस्तेमाल किया जाता है. बढ़ती डिमांड और 'कमी' की वजह से शुरुआत में इसकी क़ीमत बढ़ सकती है, पर इससे अस्थिरता और क़ीमत में बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव भी आ सकता है.

क्रिप्टो के समंदर की बड़ी-बड़ी लहरें

क्रिप्टोकरंसी बाज़ार अपनी अस्थिरता के लिए कुख्यात है. मिसाल के तौर पर, पिछले 10 साल में बिटकॉइन में एक ही दिन में 10 फ़ीसदी से ज़्यादा क़ीमत गिरने के 300 से ज़्यादा मामले सामने आए हैं.

छोटी और कम जानी-मानी क्रिप्टोकरंसी और भी ज़्यादा अस्थिर होती है -- कुछ की क़ीमतों में तो रातों-रात बड़ी गिरावट आ जाती है. बहुत ज़्यादा उतार-चढ़ाव दर्शाता है कि ये एक सट्टा है और निवेशकों के लिए काफ़ी जोख़िम पैदा करता है.

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क़ानूनी और रेगुलेटरी अनिश्चितता

क्रिप्टोकरंसी को लेकर कोई साफ़ रेगुलेशन नहीं है और इसे सरकार ने समर्थन भी नहीं दिया है. एल साल्वाडोर और सेंट्रल अफ़्रीकन रिपब्लिक जैसे कुछ देशों ने महंगाई से निपटने के लिए बिटकॉइन को ऑफ़िशियल करंसी के रूप में अपनाया है (वे अब तक तो काफ़ी हद तक विफल रहे हैं), पर क्रिप्टोकरंसी का क़ानूनी और रेगुलेटरी स्टेटस दुनिया भर में काफ़ी हद तक अनिश्चित बना हुआ है.

हालांकि भारत में क्रिप्टोकरंसी पर प्रतिबंध नहीं है, लेकिन सरकार ने निवेशकों का उत्साह कम करने के लिए इसके लेनदेन पर एक कठोर टैक्स प्रणाली शुरू कर दी है. क्रिप्टोकरंसी ट्रेडिंग से होने वाली इनकम पर 30 फ़ीसदी का भारी टैक्स लगाया जाता है, और इस पर 1 फ़ीसदी TDS भी है.

बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी और सुरक्षा की चिंताएं

रेगुलेशन की कमी के कारण क्रिप्टोकरंसी इंडस्ट्री धोखाधड़ी, घोटालों और सुरक्षा कमज़ोरियों से भरी पड़ी है. FTX एक्सचेंज के पतन और इसके संस्थापक सैम बैंकमैन-फ्राइड की कथित धोखाधड़ी ने इन मुद्दों को और ज़्यादा चर्चा में ला दिया है. FTX क्राइसिस के दौरान, कई बड़े वॉलेट्स ने विड्रॉल बंद कर दिया था, जिससे निवेशकों में घबराहट पैदा हो गई और इसके सभी प्लेटफ़ॉर्मों की सुरक्षा और भरोसे पर सवाल उठने लगे.

क्रिप्टो घोटालों और हेरफेर ने भी इस इंडस्ट्री में अपनी पैठ बनाई है. नतीजा, निवेशकों को अरबों डॉलर का नुक़सान हुआ है. इंडस्ट्री में रेगुलेशन की कमी और ब्लॉकचेन तकनीक की वजह से धोखाधड़ी का पता लगाने की तकनीकी चुनौतियां पीड़ितों की ज़्यादा मदद नहीं कर पाती हैं.

सेलिब्रिटी असर

क्रिप्टोकरंसी की क़ीमतों पर सेलिब्रिटी और संगठनों के असर को नकारा नहीं जा सकता है. मिसाल के तौर पर, बिटकॉइन पर एलोन मस्क की बदलती राय ने इसकी मार्केट वैल्यू पर बड़ा असर डाला है. सोशल मीडिया पर सेलिब्रिटी समर्थन पंप-एंड-डंप स्कीमों को जन्म दे सकता है, जिससे क़ीमतें गिरने से पहले कुछ वक़्त के लिए बढ़ जाती हैं. यहां तक कि ब्लैकरॉक के CEO लैरी फिंक जैसे संभल कर चलने वाले लोगों ने भी अपना रुख़ बदल लिया है, जैसा कि ब्लैकरॉक के हालिया क्रिप्टोकरंसी ETF लॉन्च से पता चलता है. ये उदाहरण क्रिप्टोकरंसी मार्केट पर बाहरी असर दर्शाते हैं.

हमारी राय

रेवेन्यू बनाने वाली कंपनियों के शेयरों के उलट, क्रिप्टोकरंसी पूरी तरह से एक सट्टा है, जिसमें क़ीमत तभी बढ़ती है जब अगला ख़रीदार आता है. क़ीमतों में भारी उतार-चढ़ाव आपके क्रिप्टो निवेश के एक बड़े हिस्से को कुछ ही घंटों या दिनों में ख़त्म कर सकता है.

पंप-एंड-डंप स्कीमों, घोटालों और बड़ी-बड़ी अटकलों सहित दूसरे जोख़िमों को देखते हुए निवेशकों को बहुत ज़्यादा सावधानी बरतनी चाहिए. हमारा सुझाव है कि क्रिप्टोकरंसी में निवेश करने से बचें या सिर्फ़ उतना ही निवेश करें जिसे गवानें से आपको कोई फ़र्क़ न पड़ता हो.

ये भी पढ़िए- गोल्ड, बिटक्वाइन वगैरहः निवेशकों को सावधान रहना चाहिए

ये लेख पहली बार अप्रैल 01, 2024 को पब्लिश हुआ.

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