इंटरव्यू

देश पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत है, और मैक्रो फ़ैक्टर सभी मोर्चों पर स्थिर

बैंक ऑफ़ इंडिया इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के आलोक सिंह के साथ मार्केट और उनके फ़ंड्स पर ख़ास बातचीत

बैंक ऑफ़ इंडिया इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के आलोक सिंह के साथ मार्केट और उनके फ़ंड्स पर ख़ास बातचीत

फ़ाइनांस सेक्टर में दो दशकों के काम के दौरान, आलोक सिंह ने बहुत सी भूमिकाएं निभाई हैं - UTI बैंक (अब एक्सिस बैंक) में प्रोप्राइटरी ट्रेडर के तौर पर अपना कैरियर शुरू करने से लेकर मशहूर AMC में फ़िक्स्ड इनकम और इक्विटी एसेट्स का मेनेजमेंट करने तक.

सिंह 12 साल पहले बैंक ऑफ़ इंडिया इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स में शामिल हुए और 2015-16 में चीफ़ इन्वेस्टमेंट ऑफ़िसर की भूमिका में आए. उनकी लीडरशिप में, बैंक ऑफ़ इंडिया फ़्लेक्सी कैप फ़ंड, स्मॉल कैप फ़ंड और ELSS टैक्स सेवर फ़ंड ने ख़ास तौर ख़ूब तरक्की की है. फंड मैनेजर ने कामयाबी के पीछे रिस्क के मैनेजमेंट को एक ज़रूरी फ़ैक्टर बताया. इस इंटरव्यू में, वह अपने निवेश स्ट्रक्चर को साझा कर रहे हैं और हमें अपने कार्यकाल के दौरान ₹100 करोड़ से ₹10,000 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति के मैनेजमेंट की फ़ंड हाउस के सफ़र के बारे में बता रहे हैं.

पेश हैं इंटरव्यू के संपादित अंश.

इक्विटी पोर्टफ़ोलियो के मैनेजमेंट में आपका ख़ास नज़रिया क्या है? आप बाज़ार की अलग-अलग स्थितियों और सेक्टर्स को कैसे नेविगेट करते हैं?

फ़िक्स्ड इनकम की अपनी पृष्ठभूमि के चलते, मैं इंटरनल रेट आफ़ रिटर्न (IRR) और कैश फ़्लो की अहमियत समझता हूं. उसी के उसूलों का इक्विटी में इस्तेमाल करता हूं, जिसमें इंटरनल रेट ऑफ़ रिटर्न (IRR) की जगह रिटर्न ऑन इक्विटी (ROE) ले लेता है, और कैश फ़्लो दोनों में ही अहमियत रखता है. ये किसी भी फ़ाइनांशियल एसेट, चाहे डेट (debt) हो या इक्विटी (equity), में मेरे निवेश सिद्धांत की बुनियाद है.

दूसरा पहलू बाज़ार निवेश के लिए ज़रूरी एलोकेशन, रिस्क और कैपिटल से जुड़ा है. मेरे लिए, ये सिर्फ़ नज़रिए की बात नहीं, बल्कि कैपिटल के पूल, उसे जुड़े मसलों, उसके रिस्क और इन सभी के बीच काम कैसे किया जाए, इस विषय में भी है.

आप अपने पोर्टफ़ोलियो के लिए स्टॉक का चुनाव कैसे करते हैं?

हम मार्केट कैपिटलाइज़ेशन के आधार पर क़रीब 1,000 शेयरों को ट्रैक करते हैं और क़रीब 250 शेयर हमारे एक्टिव यूनिवर्स का हिस्सा हैं. हम इन शेयरों का चुनाव टॉप-डाउन और बॉटम-अप नज़रिए का इस्तेमाल करके करते हैं, हर बिज़नस का व्यक्तिगत तौर पर विश्लेषण होता है. टॉप-डाउन नज़रिया अलग अलग डेटा पर आधारित है जो मिलता है और बड़ी संख्या में कंपनियों पर इसके संभावित असर पर आधारित होता है. बाद में, फ़ोकस बॉटम-अप नज़रिए पर ट्रांसफ़र हो जाता है, जो बिज़नस के मैनेजमेंट और कैश फ़्लो से शुरू होता है. हर बिज़नस की अलग-अलग बारीक़ियां होती हैं, और किसी को ये विचार करना चाहिए कि क्या वे टिकाऊ हैं.

क्वॉन्टेटिव और क्वॉलिटेटिव पर विचार करने के बाद, हम एक सीधी-सादी परिकल्पना तैयार करने की कोशिश करते हैं, जो परसंटेज रिटर्न पर आधारित नहीं, बल्कि हमारे इस यकीन पर आधारित होती है कि मार्जिन या बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ेगी. हम नियम से इन पूर्वानुमानों पर नज़र रखते हैं. जब तक परिकल्पना बरक़रार है, हम इसे अपने पोर्टफ़ोलियो में बनाए रखते हैं, जिससे हमें एक लंबी होल्डिंग मिलती है, जहां हम बीच में पैदा हो रहे शोर से परेशान नहीं होते. इससे हमें अपने पोर्टफ़ोलियो में सफ़र के एक बड़े हिस्से को कैप्चर करने में मदद मिली है.

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हाल ही में मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों को लेकर काफ़ी चर्चा रही है. कुछ लोगों का कहना है कि उनका वैल्यूएशन ज़्यादा है, जबकि दूसरे को उनमें बढ़ोतरी की संभावना दिखती है. मौजूदा मार्केट साइकल में आप कहां खड़े हैं?

मैं अपना नज़रिया शेयर करना चाहता हूं. अगर हम निफ़्टी 50 के पांच साल का औसत को देखें, तो ये 23 होगा. आज, ये 23.5 के आसपास है. 10 फ़ीसदी अर्निंग में ग्रोथ के साथ, हम 23 की औसत से नीचे हैं, और 15 या 20 फ़ीसदी की अर्निंग में ग्रोथ के साथ ये बहुत कम होगा. इसलिए, आपको अर्निंग के नज़रिए से देखना होगा, और हमारा मानना ​​है कि वैल्यूएशन बहुत ज़्यादा ऊंचे नहीं हैं.

इसी तरह, अगर मैं स्मॉल कैप पर नज़र डालूं, तो पांच-वर्षीय औसत 29 के आसपास है; वर्तमान में, ये 32 के आसपास हो सकता है. 10 फ़ीसदी अर्निंग ग्रोथ के साथ, हम औसत के क़रीब हैं.

लेकिन अगर मैं मिड कैप का पांच साल का औसत देखूं तो यह 27 है. वर्तमान में ये 44 के क़रीब है. 20 फ़ीसदी की बढ़ोतरी दर के साथ ये 27 के औसत से बहुत दूर है. मिड कैप के मामले में मैं ये कहना चाहूंगा कि ये '150 का क्लब' 2016-17 में बनाया गया था और तब से बाज़ार का ये हिस्सा म्यूचुअल फ़ंड पोर्टफ़ोलियो के सभी हिस्सों में एक जैसा रहा - चाहे वो लार्ज कैप हो, मिड कैप हो, स्मॉल कैप हो या फिर हाइब्रिड हो.

इन 150 शेयरों में अच्छी खासी पूंजी लगी हुई है, जिसकी वजह से इतनी बढ़ोतरी आई है. अगर '150 का ये क्लब' बढ़ता है या फिर इसमें से भारी संख्या में एग्ज़िट होती है, तो इसमें गिरावट हो सकती है. इनमें से कोई एक ही बात होनी चाहिए. वरना, ये कमी होने का प्रीमियम है - ये 150 शेयर प्रीमियम पर बने रहेंगे.

जैसा कि पहले कहा कि मुझे लगता है कि लार्ज और स्मॉल कैप में कोई बड़ी अतिश्योक्ति नहीं होगी. हम अपनी पिछली औसत से ज़्यादा ज़रूर हैं, लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि हमारा देश पहले से कहीं ज़्यादा मज़बूत हो रहा है, और हमारे मैक्रो फ़ैक्टर सभी मोर्चों पर पहले से कहीं ज़्यादा स्थिर हैं. इसलिए, जैसे-जैसे स्थिरता और उत्पादकता बढ़ती है, प्रीमियम भी बढ़ता है.

ज़ाहिर है, बाज़ारों में कुछ निराशा हो सकती है, जिससे कुछ अस्थिरता हो सकती है. हर तेज़ी वाले बाज़ार में कई मध्यवर्ती सुधार होते हैं. 2004 से 2007 तक, ऐसे आठ या नौ मिसाल थीं जब बाज़ार में 8-10 फ़ीसदी तक सुधार हुआ. एक ऐसी मिसाल थी जब बाज़ार में 20 फ़ीसदी तक सुधार हुआ.

बैंक ऑफ़ इंडिया फ़्लेक्सी कैप, मल्टीकैप और ELSS टैक्स सेवर जैसे आपके कुछ इक्विटी फ़ंड ने पिछले एक या दो साल में अच्छा प्रदर्शन किया है. आपको क्या लगता है कि उनके मज़बूत प्रदर्शन के पीछे ख़ास फ़ैक्टर क्या हैं?

हमारा फ़्लेक्सी-कैप फ़ंड चार साल पुराना है, जबकि ELSS फ़ंड ने 15 साल पूरे कर लिए हैं. हमारे स्मॉल-कैप फ़ंड का इतिहास छह साल पुराना है, और हमारा मल्टी-कैप एक साल पुराना फ़ंड है. अब, अगर आप इन सभी पुराने फ़ंड्स को देखें, तो उन्होंने पांच साल और 10 साल के अरसे में अच्छा प्रदर्शन किया है.

अगर हम ELSS फ़ंड को देखें तो इसने अपने अस्तित्व के 15 सालों में 20 फ़ीसदी का चक्रवृद्धि वार्षिक बढ़ोतरी दर (CAGR) रिटर्न दिया है, जबकि स्मॉल-कैप फ़ंड ने पिछले पांच सालों में 35 फ़ीसदी रिटर्न दिया है. हमने पिछले दो से तीन सालों में 'सीमाएं' पार की हैं. हमारी इंडस्ट्री इन सीमाओं को आकार के संदर्भ में मानता है और जबकि हमने पिछले एक से दो सालों में मान्यता हासिल करना शुरू कर दिया है, हमारा प्रदर्शन लंबे अरसे तक स्थिर रहा है.

हमारी रणनीति के अलावा, हमारे रिस्क मैनेजमेंट ने भी अहम भूमिका निभाई है. इसने हमें किसी भी वक़्त बहुत ज़्यादा उत्साह का अनुभव करने से रोका है और हमें एक संतुलित पोर्टफ़ोलियो बनाए रखने में काबिल बनाया है. अगर मैं पिछले तीन से पांच सालों में अपने फ़ंड के प्रदर्शन का विश्लेषण करता हूं, तो मुझे लगता है कि हमने एलोकेशन और चयन दोनों के मामले में काफी अच्छा प्रदर्शन किया है. हमने फ़्लेक्सी-कैप और ELSS फ़ंड दोनों में अच्छा प्रदर्शन किया है क्योंकि हम उन्हें समान रूप से प्रबंधित करते हैं.

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आपके कुछ फ़ंड्स के हालिया मज़बूत प्रदर्शन को देखते हुए, क्या आपके AMC में इस कामयाबी का फ़ायदा उठाने और ज़्यादा निवेशकों को लुभाने की कोई रणनीति है?

इस सवाल का जवाब देने के लिए, मैं अतीत में जाना चाहूंगा. जब मैं पहली बार 2012 में बैंक ऑफ़ इंडिया म्यूचुअल फ़ंड में शामिल हुआ, तो इसे भारती एक्सा म्यूचुअल फ़ंड के नाम से जाना जाता था, जिसमें ₹100 करोड़ की प्रबंधन के तहत एसेट (AUM) थे. हमें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. 2018 में, डेट (debt) संकट हुआ, और 2020 में, हम चुनौतीपूर्ण कोविड के दौर से गुज़रे. इन मुद्दों को सुलझाने में हमें क़रीब तीन से चार साल लग गए.

हालांकि, आज हम जिस तरह से बात कर रहे हैं, हम अपनी स्थिति को फिर से हासिल करना शुरू कर रहे हैं. हमारे फ़ोलियो बढ़कर पांच लाख से ज़्यादा हो गए हैं, पिछले तीन सालों में हमारी मासिक सिस्टमेटिक इंवेस्टमेंट प्लान (SIP) बुक ₹5 करोड़ से बढ़कर ₹71 करोड़ हो गई है, और म्यूचुअल फ़ंड डिस्ट्रिब्यूटर (MFD) की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई है. आम तौर पर, बैंक द्वारा स्पॉन्सर फ़ंड हाउस में, बैंक के पास MFD या डायरेक्ट चैनल के मुक़ाबले में फ़ंड बेचने का बड़ा हिस्सा होता है. वर्तमान में, हमारे बिज़नस का क़रीब 25 फ़ीसदी बैंकों से आता है, और बाकी MFD और सीधी भागीदारी से आता है.

हालांकि हमने अलग-अलग वजहों से अपने नज़रिए में थोड़ी देरी की है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि मौजूदा प्रबंधन और बैंक इस बिज़नस को बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं और प्रतिबद्ध हैं. हम उस दौर के क़रीब हैं जहां हम सही चीजें करके बाज़ार हिस्सेदारी बढ़ा सकते हैं. बाज़ार काफ़ी ऊपर चले गए हैं, और हमारा 10,000-11,000 करोड़ रुपये का AUM (एसेट्स अंडर मैनेजमेटं) काफी छोटा है. हालांकि, हमें सही चीज़ें करनी होंगी, और उम्मीद है कि जब हम अगली बार मिलेंगे, तो संख्या बहुत बड़ी होगी.

नए ज़माने की टेक कंपनियां चर्चा का विषय बन गई हैं, लेकिन आपने अपने फ़ंड में उनके लिए सीमित निवेश रखा है. इन कंपनियों और आपके पोर्टफ़ोलियो में उनकी भूमिका के बारे में आपका क्या कहना है?

इनोवेशन बहुत महत्वपूर्ण है, और ये हमेशा से धन सृजन का स्रोत रहा है. अगर हम इतिहास पर नज़र डालें, तो इनोवेश ने सबसे ज़्यादा पैसा कमाया है, चाहे वह प्रोडक्ट इनोवेशन हो या प्रक्रिया इनोवेशन. इसलिए, हम नए ज़माने की टेक कंपनियों के बारे में पॉसिटिव नज़रिया रखते हैं.

हालांकि, इन बिज़नस से हमारी दूरी की वजह इन बिज़नस पर रखी गई बहुत ज़्यादा अपेक्षाओं से आई है. हम सभी जानते हैं कि 2021 में क्या हुआ; वे दो साल तक सुस्त रहे. अचानक, पिछले साल, उन्होंने अच्छा प्रदर्शन किया है. इसलिए जहां भी हमें व्यावसायिक अपेक्षाओं के मामले में कुछ सही मिलता है, फिर भले ही वो सभी आज महंगे हों मगर उन्हें लेकर हमारा नज़रिया खुला हुआ हैं. ऐसा नहीं है कि हम उन्हें नहीं खरीदेंगे; हमारा कुछ ब्रांडों से कुछ संपर्क भी है.

2021 के बाद से इस सेक्टर में पूरा सूखा पड़ा है, जब कई खिलाड़ियों ने बाज़ार में एंट्री की है. एक फ़ंड मैनेजर के तौर पर, मैं क्लासिक कैश फ़्लों वाली कंपनियों में निवेश करने का पालन करता हूं, भले ही हम जल्द ही बाज़ार में ज़्यादा खिलाड़ियों को आते हुए देख सकते हैं. किसी को कैश फ़्लो के बारे में जागरूक रहना चाहिए. हमें लगता है कि मुनाफ़ा टिकाऊ होना चाहिए, क्योंकि कुछ ने उन्हें बनाना शुरू कर दिया है.

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Disclaimer: यह कंटेंट सिर्फ़ जानकारी के लिए है और इसे निवेश सलाह या रेकमेंडेशन नहीं मानना चाहिए.

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