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PPFAS का बड़ा प्लान! पांच साल में आएगा IPO और NPS में होगी एंट्री

एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने मुंबई में 12वीं यूनिटहोल्डर्स मीट के दौरान लार्ज-कैप फ़ंड के लिए अपनी योजनाओं के बारे में भी बताया

एसेट मैनेजमेंट कंपनी ने मुंबई में 12वीं यूनिटहोल्डर्स मीट के दौरान लार्ज-कैप फ़ंड के लिए अपनी योजनाओं के बारे में भी बतायाAditya Roy/AI-Generated Image

सारांशः PPFAS ने अपने सालाना कार्यक्रम में दिखाया कि वो अपनी मूल निवेश सोच से समझौता किए बिना कैसे आगे बढ़ने की योजना बना रहा है. नए लॉन्च, वैश्विक पहुंच वाले प्रोडक्ट और इक्विटी में अनुशासित रुख उसकी टिकाऊ ग्रोथ की ओर इशारा करते हैं.

PPFAS म्यूचुअल फ़ंड ने शनिवार को मुंबई में अपनी 12वीं यूनिटहोल्डर्स’ मीट आयोजित की, जिसमें निवेशकों और फ़ंड की टीम ने रणनीति, प्रदर्शन और आगे की योजनाओं पर खुलकर चर्चा की.

फ़ंड हाउस के चेयरमैन और CEO नील पराग पारिख ने CIO और फ़ंड मैनेजरों के साथ मिलकर वैल्यूएशन और बदलते बाज़ार माहौल से जुड़े अहम सवालों का जवाब दिया. फ़ंड हाउस ने प्रोडक्ट इनोवेशन, ग्लोबल ऑफ़रिंग और रिटायरमेंट वाले प्लेटफ़ॉर्म में विस्तार को लेकर अपने अपडेट भी साझा किए.

2030 में IPO

यूनिटहोल्डर मीट में एक बड़ी बात सामने आई कि फ़ंड हाउस अगले पांच साल में अपना खुद का IPO लाने की योजना बना रहा है.

अनलिस्टेड मार्केट में बढ़ती वैल्यूएशन के कारण लिस्टिंग को लेकर चर्चा बढ़ी है, लेकिन PPFAS म्यूचुअल फ़ंड ने दोहराया कि IPO एक लॉन्ग-टर्म लक्ष्य है. फ़ंड हाउस का मानना है कि फ़ाइनेंशियल ईयर 2030 के आसपास ही पब्लिक ऑफ़र पर विचार किया जाएगा, जब कर्मचारियों को दिए गए ESOP पूरी तरह शेयर में तब्दील हो जाएंगे.

CEO नील पारिख ने कहा कि इससे पहले लिस्टिंग करने से टीम पर टैक्स का भारी बोझ आएगा, जिससे कर्मचारी मालिकाना हिस्से का उद्देश्य पूरा नहीं होगा.

PPFAS जनवरी 2026 में लार्ज-कैप फ़ंड लाने की तैयारी में

PPFAS म्यूचुअल फ़ंड ने अपने आने वाले लार्ज-कैप फ़ंड की विस्तृत योजना भी साझा की, जिसे जनवरी 2026 में लॉन्च किया जाना है.

फ़ंड हाउस के इक्विटी फ़ंड मैनेजर रुकुन तराचंदानी ने कहा कि ये रणनीति उन निवेशकों के लिए बनाई गई है जो भारत के प्रमुख मार्केट लीडर्स का एक्सपोज़र चाहते हैं. पोर्टफ़ोलियो मुख्य रूप से निफ़्टी 100 यूनिवर्स को फ़ॉलो करेगा, जो भारत की कुल मार्केट कैप का लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा दिखाता है, लेकिन “स्मार्ट एक्जीक्यूशन” के ज़रिए थोड़ा अतिरिक्त रिटर्न हासिल करने का लक्ष्य भी रहेगा. इसमें कैश–फ़्यूचर्स मिसप्राइसिंग, इंडेक्स रिबैलेंसिंग फ़्लो, मर्जर में स्वैप-रेशियो की गड़बड़ियां और वोलैटिलिटी आधारित इंडेक्स-फ़्यूचर डिस्काउंट जैसे मौक़ों का इस्तेमाल शामिल होगा.

स्टॉक वेट बेंचमार्क के क़रीब रहेंगे और प्रति स्टॉक 10 प्रतिशत की सीमा में रखे जाएंगे, जबकि फ़ंड हमेशा 95 प्रतिशत से ज़्यादा इक्विटी एक्सपोज़र बनाए रखेगा. बिना लोड वाले स्ट्रक्चर और 10–30 बेसिस पॉइंट (100 बेसिस पॉइंट = 1 प्रतिशत) के बीच रहने वाले ख़र्च के साथ, ये फ़ंड लॉन्ग-टर्म इक्विटी एलोकेटर्स के लिए कम-ख़र्च वाले समाधान के रूप में पेश किया जा रहा है.

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PPFAS ने GIFT सिटी और NPS में एंट्री के साथ स्ट्रैटेजिक विस्तार तेज़ किया

कार्यक्रम के दौरान, PPFAS म्यूचुअल फ़ंड ने अपने बड़े विस्तार की योजनाएं भी बताईं, जिनसे विभिन्न क्षेत्रों और रिटायरमेंट प्लेटफ़ॉर्म तक उसकी पहुंच बढ़ेगी.

GIFT City में, फ़ंड हाउस पहले से ही HNI निवेशकों के लिए ग्लोबल PMS चला रहा है और S&P 500 व NASDAQ 100 इंडेक्स को फ़ॉलो करने वाले दो अंतरराष्ट्रीय पैसिव फ़ंड के लिए मंज़ूरी भी मिल चुकी है. $5,000 की कम एंट्री लिमिट के साथ, ये योजनाएं भारतीय रिटेल निवेशकों के लिए ग्लोबल निवेश को कहीं ज़्यादा आसान बनाएंगी.

कंपनी ने एक इनबाउंड फ़ंड स्ट्रक्चर के लिए भी आवेदन किया है, जिससे विदेशी निवेशक और NRI भारत में निवेश कर सकेंगे.

इसके अलावा, बोर्ड ने एक नई सब्सिडियरी बनाने को मंज़ूरी दी है, जो NPS (National Pension System) में शामिल होने के लिए PFRDA लाइसेंस के लिए आवेदन करेगी.

अमेरिका में टेक एक्सपोज़र

अमेरिकी टेक सेक्टर PPFAS पोर्टफ़ोलियो का अहम हिस्सा बना हुआ है, लेकिन बेहद चुनिंदा रूप में. CIO राजीव ठक्कर ने कहा कि फ़ंड का एक्सपोज़र Alphabet, Meta, Microsoft और Amazon जैसी कैश जेनरेट करने वाली बड़ी कंपनियों में है, न कि अधिक कैश ख़र्च करने वाले AI आधारित नए खिलाड़ियों में. ये कंपनियां अपने-अपने क्षेत्रों में मज़बूत हैं और डिजिटल विज्ञापन, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, प्लेटफ़ॉर्म और सब्सक्रिप्शन जैसे व्यापक स्रोतों से कमाई करती हैं.

उन्होंने कहा कि इन कंपनियों का वैल्यूएशन नकद कमाई की स्पष्टता पर आधारित है और ये आम तौर पर अर्निंग्स की तुलना में 20–30 गुने अके दायरे में ट्रेड करती हैं, जो 1970 के दशक के निफ़्टी 50 दौर की अत्यधिक उछाल से बहुत अलग है.

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