Aditya Roy/AI-Generated Image
सारांशः कई सालों तक, लंबी अवधि के पोर्टफ़ोलियो में सोने को नज़रअंदाज़ करना आसान था. लेकिन जब हालात बदल जाएं और पुरानी मान्यताएं आज की दुनिया पर पूरी तरह फिट न बैठें, तब क्या होता है? ये नोट सोने पर लंबे समय से रखे गए एक नज़रिए पर फिर से ग़ौर करता है, उसमें क्या छूट गया था और क्या अब इसे आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह मिलनी चाहिए.
सारांशः कई सालों तक, लंबी अवधि के पोर्टफ़ोलियो में सोने को नज़रअंदाज़ करना आसान था. लेकिन जब हालात बदल जाएं और पुरानी मान्यताएं आज की दुनिया पर पूरी तरह फिट न बैठें, तब क्या होता है? ये नोट सोने पर लंबे समय से रखे गए एक नज़रिए पर फिर से ग़ौर करता है, उसमें क्या छूट गया था और क्या अब इसे आपके पोर्टफ़ोलियो में जगह मिलनी चाहिए. कुछ दिन पहले एक पाठक का ईमेल ऐसे वक़्त पर आया, जिसे ग़लत भी कहा जा सकता है और शायद बिल्कुल सही भी. मैंने राजीव का ईमेल रविवार को खोला. पीछे चल रही ख़बरों को अनदेखा करना मुमकिन नहीं था. इज़राइल ने ईरान पर हमला कर दिया था. अयातुल्लाह ख़ामेनेई मारे जा चुके थे. होर्मुज़ जलडमरूमध्य में तेल के टैंकर फंसे हुए थे. बाज़ार खुले नहीं थे, लेकिन जो होने वाला था, उसका एहसास साफ़ था. राजीव पिछले 20 साल से Value Research के पाठक हैं. उनका कहना है कि उनके निवेश मेरी सलाह से आकार लेते रहे. फिर उन्होंने बहुत शांत लेकिन भीतर तक चुभ जाने वाली बात कही: जब उन्होंने 2005-06 में निवेश शुरू किया था, तब 10 ग्राम सोने की क़ीमत लगभग ₹6,000 थी. आज ये ₹1,60,000 से ऊपर है. उन्होंने कहा, “अगर मैंने सोने में निवेश को लेकर आपकी सलाह न मानी होती, तो शायद मैं ज़्यादा अमीर होता.” वो सही हैं. और इस लेख को प
ये लेख पहली बार मार्च 16, 2026 को पब्लिश हुआ.
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मेरा पोर्टफोलियो कैसा चल रहा है? मुझे क्या सुधार करना चाहिए? मुझे आगे कहाँ निवेश करना चाहिए? फंड एडवाइज़र इन सभी सवालों के जवाब देता है। हर शनिवार एडवाइज़र नोट। हर दूसरे शनिवार धीरेंद्र कुमार के साथ लाइव सत्र।
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