Aditya Roy/AI-Generated Image
सारांशः दशकों तक भारत में एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फ़ंड्स का इंडेक्स फ़ंड्स पर साफ़ दबदबा था. लेकिन बाज़ार बदल गया है और अब इस सवाल का ईमानदार जवाब भी बदल गया है कि एक्टिव मैनेजमेंट आज भी अपनी जगह बनाए रखने के क़ाबिल है या नहीं. हम देखते हैं कि साक्ष्य अब किस तरफ़ इशारा करते हैं और कहां इशारा नहीं करते.
सारांशः दशकों तक भारत में एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फ़ंड्स का इंडेक्स फ़ंड्स पर साफ़ दबदबा था. लेकिन बाज़ार बदल गया है और अब इस सवाल का ईमानदार जवाब भी बदल गया है कि एक्टिव मैनेजमेंट आज भी अपनी जगह बनाए रखने के क़ाबिल है या नहीं. हम देखते हैं कि साक्ष्य अब किस तरफ़ इशारा करते हैं और कहां इशारा नहीं करते. इस हफ़्ते एक दोस्त ने मुझसे संपर्क किया. उसने देखा कि वैल्यू रिसर्च ऑनलाइन के होम पेज पर अब सबसे ऊपर 'इंडेक्स इन्वेस्टर' नाम का एक सेक्शन है, जिस पर 'New' लिखा है. उसका सवाल सीधा था: क्या यह आपको अजीब नहीं लगता? 30 साल से आपका पूरा काम एक्टिवली मैनेज्ड म्यूचुअल फ़ंड्स के एनालिसिस, रेटिंग और तुलना पर टिका है. और अब आप लोगों को बता रहे हैं कि शायद उन्हें इस सब की ज़रूरत ही नहीं? यह कुछ ऐसा है जैसे कोई रेस्टोरेंट क्रिटिक 'बस घर पर पकाओ' नाम का सेक्शन शुरू कर दे. लेकिन मैंने उसे जो जवाब दिया, वो आपको भी बताने लायक है क्योंकि आप फ़ंड एडवाइज़र के सब्सक्राइबर हैं और शायद आपके मन में भी यही सवाल उठ रहा हो. जब मैंने
ये लेख पहली बार मई 11, 2026 को पब्लिश हुआ.
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